IDBI Bank में Fairfax को 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री को केंद्र सरकार की मंजूरी
सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लि. को बेचने को मंजूरी दे दी। आईडीबीआई के सुधारात्मक कार्रवाई से रणनीतिक पुनर्गठन तक पहुंचने के नौ साल के सफर के प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं: मई 2017: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पूंजी पर्याप्तता, परिसंपत्ति गुणवत्ता, परिसंपत्तियों पर प्रतिफल और कर्ज अनुपात के निर्धारित मानकों का उल्लंघन करने पर आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा। मार्च 2017 में बैंक की शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) 13 प्रतिशत से अधिक थी।
जनवरी 2019: भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने आईडीबीआई बैंक में 51 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल की। इसके बाद आरबीआई ने नियामकीय उद्देश्यों के लिए बैंक को निजी क्षेत्र के बैंक के रूप में वर्गीकृत किया। मार्च 2021: आरबीआई ने वित्तीय प्रदर्शन में सुधार का हवाला देते हुए करीब चार साल बाद आईडीबीआई बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई के दायरे से बाहर कर दिया।
अप्रैल 2021: एलआईसी ने सरकार की प्रस्तावित रणनीतिक विनिवेश योजना के साथ-साथ इक्विटी हिस्सेदारी घटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। मई 2021: मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आईडीबीआई बैंक में सरकार और एलआईसी की हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री को मंजूरी दी। इसमें प्रबंधन नियंत्रण का हस्तांतरण भी शामिल था।
अक्टूबर 2022: सरकार ने आईडीबीआई बैंक में 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए रुचि पत्र आमंत्रित किए। इसमें सरकार की 30.48 प्रतिशत और एलआईसी की 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी शामिल थी। जनवरी 2023: सरकार को संभावित बोलीदाताओं से कई रुचि पत्र प्राप्त हुए।
जुलाई 2024: संभावित बोलीदाताओं को गृह मंत्रालय से आवश्यक सुरक्षा मंजूरी मिली और आरबीआई ने उनकी पात्रता एवं उपयुक्तता का आकलन किया। जनवरी 2026: सरकार ने प्रस्तावित हिस्सेदारी बिक्री के लिए वित्तीय बोलियां आमंत्रित कीं। फरवरी 2026: सरकार को प्रेम वत्स के नेतृत्व वाली फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और दुबई स्थित एमिरेट्स एनबीडी से वित्तीय बोलियां मिलीं।
मार्च 2026: वित्तीय बोलियां आरक्षित मूल्य से कम रहने के बाद सरकार ने बिक्री प्रक्रिया रोक दी। अप्रैल 2026: सरकार ने विनिवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू की और आगे की रणनीति के लिए तकनीकी मूल्यांकन किया। जुलाई 2026: सरकार ने संशोधित वित्तीय बोलियां आमंत्रित कीं।
इसके बाद फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और एमिरेट्स एनबीडी से संशोधित प्रस्ताव मिले। अक्टूबर 2026: मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी दी। फेयरफैक्स 52,878 करोड़ रुपये में बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी।
हिस्सेदारी बिक्री के बाद केंद्र सरकार और एलआईसी के पास संयुक्त रूप से 34 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी।
IDBI Bank की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी Fairfax को बेचने की मिली मंजूरी
आईडीबीआई बैंक के मालिकाना हक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने बैंक में अपनी और एलआईसी की कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह हिस्सेदारी कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की सहायक कंपनी M/S 10955230 कनाडा इंक को ₹52,878.08 करोड़ में बेची जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बुधवार को इस सौदे को मंजूरी दी है। इससे बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।
इस सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48% और एलआईसी अपनी 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी। बिक्री पूरी होने के बाद सरकार के पास बैंक की 15% हिस्सेदारी और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी बची रहेगी। इस तरह दोनों की कुल हिस्सेदारी घटकर 34% रह जाएगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, सौदा पूरा होने पर यह भारत के वित्तीय क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।
गौरतलब है कि इस बिक्री के लिए खरीदार का चयन प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिए किया गया है। इसमें कई स्तरों पर जांच और मंजूरी की व्यवस्था अपनाई गई। सरकार ने 7 अक्टूबर 2022 को शुरुआती सूचना जारी कर इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की उपयुक्तता संबंधी मंजूरी और गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी लेना जरूरी था।
वित्त वर्ष 2025-26 में मिली शुरुआती बोलियां सरकार द्वारा तय ₹94.42 प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य से कम थीं। इसलिए उन्हें स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2026-27 में योग्य बोलीदाताओं से नए और अंतिम प्रस्ताव मांगे गए। 2 स्वतंत्र मूल्यांकन एजेंसियों ने अलग-अलग तरीकों से बैंक का मूल्य तय किया। दोनों के औसत आकलन के मुताबिक, बैंक का उचित मूल्य ₹75.99 प्रति शेयर था। फेयरफैक्स की ओर से ₹81 प्रति शेयर की बोली लगाई गई, जो इस औसत मूल्य से अधिक थी। इसी आधार पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने प्रस्ताव को मंजूरी दी।
हालांकि, सौदा पूरा होने से पहले खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक के सामने अपनी वित्तीय और कारोबारी क्षमता से जुड़े दस्तावेज पेश करने होंगे। साथ ही, उसे केंद्रीय बैंक की नियामकीय शर्तों का पालन करने की योजना भी देनी होगी। सरकार ने अपनी बची हुई 15% हिस्सेदारी में से कुछ हिस्सा भविष्य में बाजार के जरिए बेचने के लिए संबंधित समिति को अधिकार दिए हैं। वहीं, एलआईसी अपनी बची हुई हिस्सेदारी का प्रबंधन अपने नियमों और नियामकीय शर्तों के अनुसार करेगी।
बता दें कि आईडीबीआई बैंक की स्थापना 1964 में एक विकास वित्तीय संस्था के रूप में हुई थी। साल 2004 में इसे वाणिज्यिक बैंक में बदला गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने 21 जनवरी 2019 से इसे निजी क्षेत्र के बैंक की श्रेणी में रखा है, हालांकि सरकार और एलआईसी की बड़ी हिस्सेदारी बनी रही।
एक समय बैंक की वित्तीय हालत काफी कमजोर हो गई थी। गैर-निष्पादित कर्ज और घाटे के कारण सरकार तथा एलआईसी को इसमें बार-बार पूंजी डालनी पड़ी। साल 2010 से 2020 के बीच सरकार ने बैंक में करीब ₹25,000 करोड़ की पूंजी लगाई थी। 5 मई 2017 को रिजर्व बैंक ने बैंक को सुधारात्मक कार्रवाई की व्यवस्था के तहत रखा था। बाद में 10 मार्च 2021 को कुछ शर्तों और निगरानी के साथ ये पाबंदियां हटा दी गईं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, बैंक की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार हुआ है। सितंबर 2018 में इसका सकल एनपीए 31.78% था, जो मार्च 2026 में घटकर 2.32% रह गया। इसी दौरान शुद्ध एनपीए 17.30% से घटकर 0.15% पर आ गया। बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात भी 2018 के 6.22% से बढ़कर मार्च 2026 में 26.65% हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने ₹9,513 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया। 30 सितंबर 2026 तक उसका कुल कारोबार ₹6,27,149 करोड़ था, जो एक साल पहले की तुलना में 18% अधिक है। अब इस सौदे के पूरा होने के बाद बैंक के स्वामित्व और आगे की कारोबारी रणनीति में अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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