Arvind Kejriwal ने कॉजपा नेताओं की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल, पुलिस कार्रवाई को बेतुका बताया
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह से बेतुका बताते हुए सवाल किया कि क्या अपने ही देश में राष्ट्रीय ध्वज लहराना अपराध है। पुलिस ने बताया कि शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉण्ड का कथित उल्लंघन करने और प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जा चुके जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के आरोप में दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया।
उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति और सदाचार बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया। शिंदे को निजी मुचलके और पांच हजार रुपये की जमानत पर रिहा कर दिया गया। केजरीवाल ने इस खबर पर सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘क्या अपने ही देश में अपना ही झंडा लहराना अपराध है?
यह पूरी तरह से बेतुका है।’’ दास, रांका और शिंदे सहित कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के अन्य सदस्य मंगलवार को निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने तिरंगा फहराया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। समूह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
आप की दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि कॉजपा नेताओं की गिरफ्तारी ‘‘शर्मनाक’’ है। भारद्वाज ने कहा कि उनकी पार्टी युवा प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करती रहेगी। आप नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि उनके साथ खड़े रहें।
भारद्वाज ने कहा, ‘‘शुरुआत से हमारा रुख बहुत स्पष्ट रहा है। जब किसानों ने प्रदर्शन किया था, हमें लगा कि उनकी मांगें जायज हैं, तो हमने उनका समर्थन किया।’’ आप नेता ने कहा कि उनकी पार्टी ने जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों का भी समर्थन किया था और उसे लगता है कि युवाओं, खासकर जेन-जी की मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा कि कुछ समूहों को जहां हिंसा करने दी जा रही है, वहीं युवा प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा रहा है।
भारद्वाज ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘सरकार का चुप्पी साधना समझ में आता है क्योंकि पुलिस उनकी ओर से ही कार्रवाई कर रही है। हालांकि, अगर न्यायपालिका भी मौन रही और स्वत: संज्ञान नहीं लेती तथा लोगों को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बाध्य होना पड़ा तो यह देश के लिए चिंता का विषय है।’’ उन्होंने मौजूदा हालात की तुलना 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल से की। दिल्ली पुलिस के अनुसार, कॉजपा के नेता और समूह के 11 सदस्य कथित तौर पर निजी परिसर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करके जंतर-मंतर पहुंचे थे।
पुलिस ने बताया कि पुलिसकर्मियों के काम में कथित तौर पर बाधा डालने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। इस संबंध में कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थानों में दो प्राथमिकी दर्ज की गईं। पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में नेताओं को शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया गया था।
इसके बाद सार्वजनिक शांति भंग करने की कथित बार-बार की कोशिशों और सोशल मीडिया के जरिए दूसरों को उकसाने के आरोप में उन्हें एहतियाती प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया।
AAP MP Sanjay Singh ने विशेषाधिकार समिति को लिखा पत्र, Delhi Police पर बदसलूकी का आरोप
आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनके साथ बार-बार कथित बदसलूकी और बल प्रयोग को लेकर सदन की विशेषाधिकार समिति को पत्र लिखकर आग्रह किया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की जाए। आप नेता ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ दो, 10 और 12 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की, उन्हें धमकाया और जबरन हिरासत में लिया। सिंह ने कहा, ‘‘हम कोई गुंडे, माफिया या आतंकवादी नहीं हैं।
हम संसद सदस्य हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके साथ ‘‘बेहद क्रूर’’ व्यवहार किया। सदन की 15 सदस्यीय विशेषाधिकार समिति संसदीय विशेषाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करती है और उचित सिफारिशें करती है। सिंह ने कहा कि वह विशेषाधिकार समिति के समक्ष साक्ष्य पेश करेंगे और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत में भी शिकायत दर्ज कराएंगे।
समिति के सभापति हरिवंश को लिखे पत्रों में सिंह ने कथित घटनाओं को लेकर दिल्ली पुलिस आयुक्त, जाफरपुर के थाना प्रभारी (एसएचओ) और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो और 10 अक्टूबर की घटनाओं को लेकर पहले शिकायत करने के बावजूद 12 अक्टूबर के प्रदर्शन के दौरान उनके साथ फिर बदसलूकी की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। आप नेता ने दावा किया कि पुलिस आयुक्त की ओर से उनकी शिकायत पर कोई जवाब नहीं मिला।
उन्होंने इन घटनाओं में शामिल पुलिसकर्मियों के आचरण के लिए जवाबदेही तय करने की मांग की।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi









