JNU से बर्खास्तगी के बाद Congress MP Bimol Akoijam पर Delhi Police का शिकंजा, पूछताछ का नोटिस
दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को नोटिस जारी कर उनसे कहा है कि वे अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच में शामिल हों। वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने अकोइजम के घर के बाहर नोटिस चिपकाया और उन्हें गुरुवार (15 अक्टूबर) को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन आने का निर्देश दिया। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत जारी किया गया है और इसमें उनसे जांच में शामिल होने और अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
इसे भी पढ़ें: ड्रग एक्टिविस्ट की हत्या पर AAP सरकार पर बरसी Punjab BJP, CM के इस्तीफे की मांग
नोटिस में उन्हें वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, लोकसभा में इनर मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले अकोइजम पर यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि JNU के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत दर्ज किया गया है, जो यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से किए गए कामों से संबंधित हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल मई में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मीटिंग या इकट्ठा होने के बहाने छात्राओं को कैंपस स्थित अपने घर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने क्लास में अश्लील और अनुचित टिप्पणियाँ कीं। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 9 अक्टूबर को JNU ने प्रोफेसर अकोइजम को यौन उत्पीड़न की शिकायतों के कारण नौकरी से निकाल दिया। आदेश में कहा गया है कि 'स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज' के तहत 'सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ सोशल सिस्टम्स' में पढ़ाने वाले इस प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इसे भी पढ़ें: प्रमोद तिवारी का दावा, Congress Revival से बैकफुट पर BJP, इसलिए Amit Shah को तोड़नी पड़ी चुप्पी
आदेश में बताया गया है कि आंतरिक समिति ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की और अपनी जांच के नतीजों के आधार पर कड़ी सजा की सिफारिश की। वाइस-चांसलर शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया है कि उचित प्रक्रिया का पालन करने, सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर, यूनिवर्सिटी की सेवा से बर्खास्तगी की सज़ा दी जाती है।
SRFTI Kolkata में सुरक्षा नाकामी पर छात्रों का प्रदर्शन, VC के इस्तीफे पर अड़े
सत्यजीत राय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) परिसर में हुई हिंसा के विरोध में विद्यार्थियों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा और उन्होंने कुलपति पर परिसर में सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। एसआरएफटीआई छात्र संघ ने 13 अक्टूबर को जारी एक बयान में आरोप लगाया कि संस्थान के अधिकारी ‘‘संभावित हिंसा की पूर्व चेतावनी मिलने के बावजूद चार अक्टूबर को परिसर के द्वार पर एक रैली के पहुंचने से पहले पर्याप्त एहतियाती कदम उठाने में विफल रहे।’’ छात्रों ने अधिकारियों पर ‘‘पुलिस में दर्ज शिकायतों को कमजोर करने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की धमकी देने और उनके साथ सार्थक बातचीत करने से इनकार’’ करने का भी आरोप लगाया। एसआरएफटीआई के विद्यार्थियों पर 27 सितंबर और चार अक्टूबर को हिंसा की दो अलग-अलग घटनाओं में कथित तौर पर हमला किया गया था।
बयान के अनुसार, 27 सितंबर की घटना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े समूह ‘अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत’ (एबीजीपी) से संबंधित एक कार्यक्रम के सिलसिले में हुई थी। छात्र संघ का दावा है कि पंचसायर थाने में संगठन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ‘बंगीय हिंदू जागरण मंच’ के सदस्यों द्वारा चार अक्टूबर को आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान परिसर में एक बार फिर झड़प हुई।
पुलिस द्वारा रोके जाने पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने संस्थान का द्वार तोड़ने की कोशिश की। छात्र संघ का दावा है कि चार अक्टूबर को संस्थान के द्वार तक मार्च निकालने की घोषणा से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट प्रसारित होने के बावजूद प्रशासन ने रैली को परिसर तक पहुंचने से रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि चार अक्टूबर की घटना के बाद दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत में किसी भी संगठन का नाम शामिल नहीं किया गया।
इसके अलावा, छात्रों ने संस्थान के कुछ कर्मचारियों पर पांच और छह अक्टूबर को कुलपति संतोष अजमेरा के कार्यालय में धरने के दौरान उनके साथ हाथापाई करने का आरोप लगाया। छात्रों का कहना है कि अजमेरा ने न तो हस्तक्षेप किया और न ही घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। एसआरएफटीआई में पिछले 17 दिन से शैक्षणिक गतिविधियां ठप हैं।
छात्र संघ ने दावा किया कि कुलपति ने चेतावनी दी है कि यदि कक्षाएं दोबारा शुरू नहीं हुईं, तो संस्थान को बंद किया जा सकता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi











