Supreme Court पहुंची AIMIM, वोटर लिस्ट SIR और फॉर्म में बदलाव को दी कानूनी चुनौती
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी ने वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका और एक रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर की है। इसमें इस प्रक्रिया और कानूनी फॉर्म में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए गए हैं। पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि ये याचिकाएं उनके वकील, एडवोकेट निज़ाम पाशा के ज़रिए दायर की गईं और इनमें अलग-अलग राज्यों के उदाहरण भी शामिल हैं। ओवैसी ने कहा हमने अपने वकील, एडवोकेट निज़ाम पाशा के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका और एक रिव्यू पिटीशन दायर की है। सुप्रीम कोर्ट जाने के पीछे हमारा मकसद यह है कि कानूनी तौर पर चुनाव आयोग को मिलकर काम करना होता है। यह साफ़ नहीं है कि लिए गए फ़ैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे या किसी ने असहमति जताई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी ने SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के संबंध में एक समीक्षा याचिका भी दायर की है, और कहा कि इस प्रक्रिया के कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण की ज़रूरत है।
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उन्होंने कहा बिहार SIR मामले में हम याचिकाकर्ता थे। हमें समझ नहीं आ रहा है कि गणना फ़ॉर्म में वैधानिक फ़ॉर्म को कैसे बदला गया, और हमारे पास इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। हमने इन सभी मुद्दों को माननीय सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक विस्तृत याचिका में शामिल किया है।" उत्तर प्रदेश में राजनीतिक स्थिति पर ओवैसी ने कहा कि AIMIM मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में लगातार तीसरी बार BJP को सत्ता में आने से रोकने के लिए गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, हम गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, और आज भी हम उस दिशा में प्रयास कर रहे हैं ताकि उत्तर प्रदेश में BJP सरकार तीसरी बार सत्ता में न आए।" गठबंधन की बातचीत के लिए 2 अक्टूबर की समय-सीमा तय करने के बारे में पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा कि बातचीत अभी भी चल रही है। उन्होंने कहा हमने 2 अक्टूबर की समय-सीमा दी थी, लेकिन हमारी बातचीत जारी है। जब बातचीत पूरी हो जाएगी और हम किसी नतीजे पर पहुँचेंगे, तो हम आपको सूचित करेंगे।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान पर कि 2029 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन और खराब होगा और बीजेपी सत्ता में लौटेगी, ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा, "हम यह पक्का करने की पूरी कोशिश करेंगे कि 2029 में उनकी सरकार सत्ता में न आए। हमारी कोशिश हमेशा बीजेपी को हराने की रही है।" ओवैसी ने SIR के खिलाफ AIMIM के काम का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी पिछले तीन से साढ़े तीन महीनों से तेलंगाना में इस प्रक्रिया को लेकर चिंताएं उठा रही है।
JNU से बर्खास्तगी के बाद Congress MP Bimol Akoijam पर Delhi Police का शिकंजा, पूछताछ का नोटिस
दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजम को नोटिस जारी कर उनसे कहा है कि वे अपने ऊपर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच में शामिल हों। वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन ने अकोइजम के घर के बाहर नोटिस चिपकाया और उन्हें गुरुवार (15 अक्टूबर) को पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन आने का निर्देश दिया। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 35(3) के तहत जारी किया गया है और इसमें उनसे जांच में शामिल होने और अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
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नोटिस में उन्हें वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, लोकसभा में इनर मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाले अकोइजम पर यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने बताया कि JNU के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर की शिकायत पर 11 अक्टूबर को वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत दर्ज किया गया है, जो यौन उत्पीड़न और महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने के इरादे से किए गए कामों से संबंधित हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल मई में कम से कम 11 छात्राओं ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें दर्ज कराई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि उन्होंने मीटिंग या इकट्ठा होने के बहाने छात्राओं को कैंपस स्थित अपने घर बुलाया और उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने क्लास में अश्लील और अनुचित टिप्पणियाँ कीं। एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, 9 अक्टूबर को JNU ने प्रोफेसर अकोइजम को यौन उत्पीड़न की शिकायतों के कारण नौकरी से निकाल दिया। आदेश में कहा गया है कि 'स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज' के तहत 'सेंटर फ़ॉर द स्टडी ऑफ़ सोशल सिस्टम्स' में पढ़ाने वाले इस प्रोफेसर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
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आदेश में बताया गया है कि आंतरिक समिति ने प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच की और अपनी जांच के नतीजों के आधार पर कड़ी सजा की सिफारिश की। वाइस-चांसलर शांतिश्री डी. पंडित के हस्ताक्षर वाले आदेश में कहा गया है कि उचित प्रक्रिया का पालन करने, सभी उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने और आंतरिक समिति की रिपोर्ट के आधार पर, यूनिवर्सिटी की सेवा से बर्खास्तगी की सज़ा दी जाती है।
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