इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका की मध्यस्थता के जरिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के सामने रखा। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। उन्हें डर है कि इजराइली सेना की भागीदारी से सऊदी अरब में जनता की नाराजगी बढ़ सकती है। लेकिन इजराइल आखिर इस सैन्य अभियान में जुड़ना क्यों चाहता है… दरअसल इसकी मुख्य रूप से 3 वजहें हैं… 1. इजराइल सऊदी के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है सऊदी अरब यमन में सक्रिय हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान चला रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल को उम्मीद थी कि सऊदी अरब के साथ सैन्य सहयोग से दोनों अमेरिकी सहयोगियों के संबंध मजबूत होंगे। इजराइल को यह भी उम्मीद थी कि इससे भविष्य में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध सामान्य करने का समझौता भी हो सकता है। 2. इजराइल ईरान समर्थित हूतियों को कमजोर करना चाहता है ईरान और हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संबंध हैं। सऊदी अरब और अमेरिका का आरोप है कि ईरान हूतियों को हथियार, ट्रेनिंग और तकनीकी मदद देता है। इससे हूती ड्रोन और मिसाइलों से हमले करने में सक्षम हुए हैं। इस ही वजह से हूती इजराइल और क्षेत्र के कई देशों के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और जहाजों को प्रभावित करने वाले हमले किए हैं। उन्होंने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच इजराइल को भी निशाना बनाया है। इसलिए इजराइल इस सैन्य अभियान में शामिल होकर हूतियों को कमजोर करना चाहता है। 3. इजराइल सऊदी के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ा सकता है हूतियों की गतिविधियों से सऊदी अरब को भी खतरा रहा है। सऊदी अरब लंबे समय से अपनी दक्षिणी सीमा के पास हूतियों को सुरक्षा चुनौती मानता है। इजराइल सऊदी की मदद कर क्षेत्र की एक बड़ी अरब शक्ति के साथ सैन्य तालमेल भी बढ़ सकता है। हालांकि, इससे रियाद के सामने राजनीतिक जोखिम भी हैं। सऊदी अरब से जुड़े सैन्य अभियानों में इजराइली सेना की भागीदारी पर देश के अंदर और पूरे अरब जगत में विरोध हो सकता है। यह विरोध खास तौर पर तब बढ़ सकता है, जब फिलिस्तीनी मुद्दा अब भी हल नहीं हुआ है। सऊदी और इजराइल के बीच फिलिस्तीन को लेकर मतभेद सऊदी अरब और इजराइल के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि दोनों ईरान के खिलाफ एक ही रुख अपनाते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी कई बार सऊदी से इजराइल के साथ संबंध बनाने की अपील कर चुके है। इसके लिए अमेरिका ने अब्राहम समझौता भी सामने रखा है। अब्राहम समझौते के तहत इजराइल ने 2020 में कई अरब देशों के साथ संबंध सामान्य किए थे। सऊदी अरब का कहना है कि इजराइल के साथ संबंध सामान्य करने का फैसला फिलिस्तीनी मुद्दे पर प्रगति से जुड़ा होना चाहिए। इसमें एक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना भी शामिल है। लेकिन नेतन्याहू फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का विरोध करते रहे हैं। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा: अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर पढ़ें…
OpenAI ऑफिस में जासूसी की कोशिश करने वाला गिरफ्तार:TV के पीछे रिकॉर्डर लगाया था, AI की मदद से सऊदी नागरिक की पहचान
अमेरिका की AI कंपनी OpenAI के सैन फ्रांसिस्को स्थित ऑफिस में जासूसी की कोशिश का मामला सामने आया है। कंपनी के एक कर्मचारी पर अधिकारियों की गोपनीय बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपाने का आरोप है। कंपनी ने अपने AI मॉडल की मदद से आरोपी की पहचान की, जिसके बाद FBI ने सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान को 9 अक्टूबर को गिरफ्तार कर लिया। टॉयलेट पेपर में छिपाकर लगाया था रिकॉर्डर OpenAI के मुताबिक, 30 सितंबर को कंपनी के कर्मचारियों को सुरक्षा जांच के दौरान यह डिवाइस मिला था। इसे टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगाया गया था। डिवाइस को छिपाने के लिए टॉयलेट पेपर का उपयोग हुआ था। डिवाइस में माइक्रोफोन, कैमरा सेंसर और डेटा स्टोर करने के लिए माइक्रो SD कार्ड था। कंपनी के मुताबिक, इसे 28 सितंबर के आसपास लगाया गया था। डिवाइस में रिकॉर्डिंग लॉक थी, इसलिए जांचकर्ता उसे सुन नहीं पाए। AI चैटबॉट से भी मदद ली थी अमेरिकी जांचकर्ताओं का आरोप है कि अलफोजान ने डिवाइस लगाने की तैयारी पहले से की थी। उसने एक प्रोडक्टिविटी टूल के जरिए कंपनी की इमारतों, मीटिंग रूम, अधिकारियों के आने-जाने के समय और बाहरी साझेदारों के साथ होने वाली बैठकों की जानकारी हासिल की। जांचकर्ताओं के मुताबिक, 24 से 30 सितंबर के बीच उसने अपनी पत्नी से जुड़े AI चैटबॉट अकाउंट का इस्तेमाल कर डिवाइस बनाने, उसे लगाने, ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच करने, छिपाने और दूर से एक्सेस करने के बारे में सवाल पूछे थे। जिस कॉन्फ्रेंस रूम में डिवाइस लगाया गया था, वहां OpenAI के अधिकारी गोपनीय मुद्दों पर चर्चा करते थे। शिकायत के मुताबिक, CCTV फुटेज में अलफोजान कई तारीखों पर उस कमरे के आसपास दिखाई दिया, जबकि उसे वहां जाने या उन बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। दूसरे कमरे में भी रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला जांचकर्ताओं के मुताबिक, 5 अक्टूबर को CCTV फुटेज में अलफोजान कॉन्फ्रेंस रूम में जाकर टीवी के पीछे देखते हुए नजर आया। उसी दिन उसने एक दूसरे कमरे में अपना बैग छोड़ दिया था। OpenAI के सुरक्षा कर्मचारियों ने बैग की जांच की तो उसमें अलफोजान का वॉलेट, पहचान पत्र और पहले डिवाइस जैसा एक दूसरा एन्क्रिप्टेड रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। आरोप है कि बाद में अलफोजान ने अपना बैग वापस लिया और शिकायत की कि उसका कुछ सामान गायब है। हालांकि, उसने दूसरे रिकॉर्डिंग डिवाइस का जिक्र नहीं किया। दोष साबित होने पर 5 साल तक की जेल 35 साल के अलफोजान सऊदी अरब के नागरिक हैं और अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की अनुमति रखते हैं। वे जुलाई 2025 में OpenAI से जुड़े थे। उन्हें 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और मंगलवार को पहली बार संघीय अदालत में पेश किया गया। अमेरिकी न्याय विभाग के मुताबिक, दोष साबित होने पर उन्हें 5 साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर (करीब 2.3 करोड़ रुपए) तक का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रहने की सजा हो सकती है। OpenAI ने नौकरी से निकाला, डेटा चोरी के सबूत नहीं OpenAI ने कहा कि फिलहाल उसे ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे पता चले कि अलफोजान ने कंपनी के AI मॉडल के मूल डेटा, सोर्स कोड या ग्राहकों की जानकारी तक गलत तरीके से पहुंच बनाई या उसे बाहर भेजा। कंपनी ने घटना के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया। अलफोजान वेंचर कैपिटल फर्म राएद वेंचर्स में भी वेंचर पार्टनर हैं। कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, OpenAI में वे इंजीनियरिंग लीड थे और AI एजेंट्स तथा डेटा प्लेटफॉर्म पर काम करते थे। इससे पहले वे मेटा, माईक्रोसॉफ्ट और SAP में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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