Explainer: क्या है 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन योजना'? जानिए कैसे घटेगी विदेशी तेल पर भारत की निर्भरता
Samudra Manthan Scheme: भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. उद्योग, परिवहन, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए देश को बड़ी मात्रा में तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरत पड़ती है. लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह है कि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है. ऐसे में अगर दुनिया में युद्ध हो जाए, समुद्री रास्ते बंद हो जाएं या तेल की कीमतें अचानक बढ़ जाएं, तो इसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है.
इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार 84,084 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी 'समुद्र मंथन योजना' लेकर आई है. इस योजना का मकसद समुद्र की गहराइयों में छिपे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार की खोज को तेज करना और भारत को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाना है.
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह योजना क्या है, इसकी जरूरत क्यों पड़ी और इससे देश को क्या फायदे हो सकते हैं.
भारत को इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
आज भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस आयात करता है. यानी देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों पर निर्भर है.
हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़ी चिंताओं ने दिखाया कि वैश्विक संकट का असर भारत पर भी पड़ता है.
इसके अलावा भारत के कई पुराने तेल और गैस क्षेत्र अब परिपक्व हो चुके हैं. वहां से उत्पादन धीरे-धीरे कम हो रहा है, जबकि देश की ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के समुद्री इलाकों में अभी भी बड़े पैमाने पर तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार छिपे हो सकते हैं. इन्हें खोजने के लिए बड़े निवेश और अत्याधुनिक तकनीक की जरूरत है.
क्या है 'समुद्र मंथन योजना'?
समुद्र मंथन योजना केंद्र सरकार की एक वित्तीय सहायता योजना है. इसका उद्देश्य सरकारी और निजी कंपनियों को गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज के लिए प्रोत्साहित करना है.
समुद्र में तेल और गैस की खोज बेहद महंगी होती है और कई बार वर्षों की मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता. इसी जोखिम की वजह से कई कंपनियां निवेश करने से बचती हैं. सरकार अब इस जोखिम का एक हिस्सा खुद उठाएगी, ताकि कंपनियां ज्यादा उत्साह के साथ खोज का काम शुरू करें. अगर किसी क्षेत्र में खोज सफल नहीं होती, तब भी कंपनियों को पूरा नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा.
84,084 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?
सरकार ने इस पूरी राशि को अलग-अलग हिस्सों में बांटा है.
- 28,534 करोड़ रुपये समुद्र के नीचे तेल और गैस की खोज के लिए आधुनिक सिस्मिक सर्वे पर खर्च किए जाएंगे.
- 10,000 करोड़ रुपये ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर लगाए जाएंगे, ताकि तेल और गैस मिलने के बाद उन्हें निकालकर बाजार तक पहुंचाया जा सके.
- 2,000 करोड़ रुपये भारत में तेल और गैस उद्योग से जुड़े उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे.
- सबसे बड़ा हिस्सा कंपनियों को ड्रिलिंग लागत में वित्तीय सहायता देने पर खर्च किया जाएगा. सरकार प्रत्येक योग्य कुएं की ड्रिलिंग लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 675 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) तक सहायता दे सकती है.
डीपवाटर और अल्ट्रा डीपवाटर क्या होते हैं?
समुद्र मंथन योजना का मुख्य फोकस गहरे समुद्री क्षेत्रों में छिपे ऊर्जा संसाधनों की खोज है. जब समुद्र की गहराई 500 मीटर से अधिक होती है, तो उसे डीपवाटर (Deepwater) कहा जाता है. वहीं, जहां गहराई 1,500 मीटर या उससे ज्यादा हो, उसे अल्ट्रा डीपवाटर (Ultra Deepwater) कहा जाता है.
इतनी गहराई में काम करना बेहद कठिन होता है क्योंकि वहां—
- पानी का दबाव बहुत अधिक होता है.
- तापमान केवल 1 से 5 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है.
- अत्याधुनिक मशीनों और विशेष तकनीक की जरूरत होती है.
- परियोजनाओं की लागत बहुत ज्यादा होती है.
इसी कारण दुनिया भर में ऐसे प्रोजेक्ट सबसे महंगे ऊर्जा प्रोजेक्ट्स में गिने जाते हैं.
किन इलाकों में होगी खोज?
भारत के कई समुद्री क्षेत्रों में अभी पूरी तरह खोज नहीं हो सकी है. विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में इन क्षेत्रों में बड़े भंडार मिलने की संभावना है.
इनमें प्रमुख क्षेत्र हैं—
- कृष्णा-गोदावरी बेसिन
- महानदी बेसिन
- कावेरी बेसिन
- अंडमान क्षेत्र
- अरब सागर का पश्चिमी तटीय इलाका
- बंगाल की खाड़ी के गहरे समुद्री क्षेत्र
अगर यहां बड़े भंडार मिलते हैं तो भारत का घरेलू उत्पादन काफी बढ़ सकता है.
इस योजना से भारत को क्या फायदे होंगे?
अगर योजना सफल रहती है तो इसके कई बड़े लाभ हो सकते हैं.
1. आयात पर निर्भरता घटेगी
आज भारत अधिकांश तेल विदेशों से खरीदता है. घरेलू उत्पादन बढ़ने पर आयात कम हो सकता है. सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक के कच्चे तेल के आयात में कमी आ सकती है.
2. विदेशी मुद्रा की बचत होगी
भारत हर साल तेल खरीदने पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है. अगर देश में ही ज्यादा तेल और गैस मिलने लगे तो यह खर्च काफी कम हो सकता है.
3. ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
युद्ध, वैश्विक संकट या समुद्री तनाव की स्थिति में भी भारत के पास अपने ऊर्जा स्रोत उपलब्ध रहेंगे. इससे देश की रणनीतिक सुरक्षा भी मजबूत होगी.
4. रोजगार के नए अवसर बनेंगे
समुद्र में ड्रिलिंग, इंजीनियरिंग, जहाज निर्माण, लॉजिस्टिक्स, पाइपलाइन, उपकरण निर्माण और तकनीकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार पैदा हो सकते हैं.
5. मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा
तेल और गैस उद्योग में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का निर्माण भारत में बढ़ेगा. इससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को फायदा मिलेगा.
क्या इस योजना के सामने चुनौतियां भी हैं?
यह योजना जितनी महत्वाकांक्षी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है. समुद्र में तेल और गैस निकालना आसान नहीं है.
मुख्य चुनौतियां हैं—
- बहुत अधिक लागत
- खोज में कई वर्षों का समय लगना
- अत्याधुनिक विदेशी तकनीक पर निर्भरता
- समुद्री जैव विविधता पर संभावित असर
- तेल रिसाव का खतरा
- पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन
इसलिए सरकार को आर्थिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना होगा.
क्या इससे पेट्रोल और डीजल सस्ते हो जाएंगे?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. इसका जवाब फिलहाल सीधा 'हां' या 'नहीं' नहीं है. अगर भविष्य में भारत में बड़े पैमाने पर तेल और गैस का उत्पादन शुरू हो जाता है और आयात काफी घट जाता है, तो ऊर्जा लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है. लेकिन भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के उत्पादन पर निर्भर नहीं करतीं.
इनकी कीमत तय करने में कई अन्य कारक भी शामिल होते हैं, जैसे—
- अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत
- केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स
- रिफाइनिंग की लागत
- परिवहन खर्च
- मार्केटिंग और वितरण लागत
इसलिए केवल घरेलू उत्पादन बढ़ने से पेट्रोल-डीजल तुरंत सस्ते हो जाएंगे, ऐसा मानना सही नहीं होगा.
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क्या यह भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 20 से 30 वर्षों तक दुनिया पूरी तरह अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) पर निर्भर नहीं हो पाएगी. इस दौरान तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरत बनी रहेगी.
अगर समुद्र मंथन योजना के तहत बड़े तेल और गैस भंडार मिलते हैं और उनका व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाता है, तो भारत ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकता है. इससे देश न केवल अपनी आयात निर्भरता कम करेगा, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक रूप से भी अधिक मजबूत बनेगा.
समुद्र मंथन योजना केवल समुद्र की गहराइयों में तेल और गैस खोजने की परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक दीर्घकालिक रणनीतिक पहल है. 84,084 करोड़ रुपये के इस निवेश का उद्देश्य भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना, आयात पर निर्भरता घटाना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और घरेलू उद्योगों को मजबूत बनाना है. हालांकि इस योजना के सामने तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियां भी हैं, लेकिन यदि यह सफल होती है तो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती के लिए यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है.
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वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में जिस गेंदबाज ने भारत के लिए चटकाए सबसे ज्यादा विकेट, आज वही टीम में जगह पाने को मोहताज
Most Wickets For India in ODI World Cup : वनडे वर्ल्ड कप का इतिहास काफी पुराना है. पहली बार वनडे वर्ल्ड कप इंग्लैंड में 1975 में आयोजित हुआ था. भारतीय क्रिकेट टीम ने पहला वनडे वर्ल्ड कप 1983 में जीता था. कपिल देव की कप्तानी में भारत ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप की ट्रॉफी उठाई थी. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि वेस्टइंडीज, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी मजबूत टीमों को पीछे छोड़कर भारत वर्ल्ड कप जीत पाएगा. इसके बाद भारत को 2011 में महेंद्र सिंह धोनी ने वनडे वर्ल्ड कप का खिलाब दूसरी बार दिलाया. भारतीय क्रिकेट टीम अब साल 2027 में एक बार फिर वनडे वर्ल्ड कप खेलने वाली है.
तब से अब तक तमाम गेंदबाजों में वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में भारत के लिए शानदार प्रदर्शन किया है. इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के अलग-अलग समय पर खेले स्पिनर्स और तेज गेंदबाज मौजूद हैं. इस दौरान कई गेंदबाजों ने वनडे वर्ल्ड कप में यादगार प्रदर्शन किया. इस दौरान 2 गेंदबाजों ने वनडे वर्ल्ड कप में भारत के लिए लगातार 3 बॉल पर 3 विकेट हासिल कर हैट्रिक भी पूरी की है. आज हम आपको एक ऐसे गेंदबाज के बारे में बताने वाले हैं, जिसने भारत के लिए वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट हासिल किए हैं. लेकिन फिर भी वो टीम इंडिया में जगह पाने के लिए मोहताज है.
ये गेंदबाज कोई और नहीं बल्कि मोहम्मद शमी है. शमी भारत के लिए वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं. वो अभी भी क्रिकेट खेले रहे हैं. शमी को टीम इंडिया से बाहर कर दिया गया है लेकिन उन्होंने टीम में जगह पाने की उम्मीद नहीं छोड़ी है. वो लगातार घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन कर अपनी दावेदार पेश करे रहे हैं. उनको टीम इंडिया में वनडे वर्ल्ड कप 2027 के लिए जगह मिलने की उम्मीद है, जो साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की मेजबानी में 4 अक्टूबर से 21 नवंबर 2027 तक खेला जाने वाला है.
मोहम्मद शमी का वनडे वर्ल्ड कप के इतिहास में प्रदर्शन
मोहम्मद शमी ने अब तक भारत के लिए कुल तीन वनडे वर्ल्ड कप खेले हैं. उन्होंने 2015 में 7 मुकाबले खेले थे. वहीं उनको 2019 में कुल 4 मैच खेले के लिए मिले थे. शमी ने 2023 में 7 मैच खेले थे. उन्होंने अपने पहले वनडे वर्ल्ड कप में कुल 17 विकेट चटकाए थे. इसके बाद उन्होंने अपने दूसरे वनडे वर्ल्ड कप में कुल 14 विकेट लिए और उन्होंने अपने तीसरे वनडे वर्ल्ड कप में कुल 24 विकेट हासिल किए. शमी अब तक कुल 18 मुकाबलों में 55 विकेट हासिल कर चुके हैं.
???? Mohammad shami statement on his selection????
— Indian Cricket Team (@criclover451807) August 4, 2026
"Whenever I am given a chance, I will continue to perform and give my 100%"
Mohammed Shami in ODI World Cups:
-2015 – 17 wickets in 7 matches
-2019 – 14 wickets in 4 matches
-2023 – 24 wickets in 7 matches
Total: 55 wickets in… pic.twitter.com/AjjHdqj0Vf
शानदार प्रदर्शन के बाद भी टीम में जगह पाने को मोहताज
इस शानदार प्रदर्शन के बाद भी मोहम्मद शमी वनडे वर्ल्ड कप 2027 की टीम में जगह बनाने के लिए मोहताज है. वो कई हाल के इंटरव्यू में कह चुके हैं कि, वो घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. वो पूरी तरह फिट हैं और क्रिकेट खेलने के लिए तैयार है. चयनकर्ताओं और बीसीसीआई की ओर से उनको कोई भी सटीक और साफ जवाब नहीं मिला रहा है. हाल ही के दिनों में शमी को टीम इंडिया में 2027 वनडे वर्ल्ड कप में जगह मिलने को लेकर तमाम बातें सामने आ रही हैं. क्योंकि टीम इंडिया के युवा गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन लगातार नहीं कर पा रहे हैं. वहीं साउथ अफ्रीका में टीम इंडिया को अनुभवी गेंदबाजों की जरूरत होगी, जो शमी पूरी कर सकते हैं. उनके साथ के खिलाड़ी रोहित शर्मा, विराट कोहली और रविंद्र जडेजा भी लगातार टीम इंडिया के लिए खेले रहे हैं, सिर्फ उनको ही बाहर कर दिया गया है.
वनडे वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टॉप 10 भारतीय गेंदबाज
| रैंक | खिलाड़ी | मैच | विकेट | सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी |
|---|---|---|---|---|
| 1 | मोहम्मद शमी | 18 | 55 | 7/57 |
| 2 | जहीर खान | 23 | 44 | 4/42 |
| 3 | जवागल श्रीनाथ | 34 | 44 | 4/30 |
| 4 | जसप्रीत बुमराह | 20 | 38 | 4/39 |
| 5 | अनिल कुंबले | 18 | 31 | 4/32 |
| 6 | कपिल देव | 26 | 28 | 5/43 |
| 7 | रविंद्र जडेजा | 21 | 27 | 5/33 |
| 8 | मनोज प्रभाकर | 19 | 24 | 4/19 |
| 9 | कुलदीप यादव | 18 | 21 | 2/7 |
| 10 | रविचंद्रन अश्विन | 11 | 18 | 4/25 |
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