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Jharkhand News: त्योहारी सीजन में रांची में सब्जियों के दाम बेकाबू, बिगाड़ा रसोई का बजट

Jharkhand News: राजधानी रांची में त्योहारों का मौसम शुरू होते ही महंगाई ने आम जनता की कमर तोड़ दी है. दुर्गा पूजा और नवरात्र के आगमन के साथ ही बाजार में सब्जियों की कीमतें आसमान छूने लगी हैं. आलू को छोड़ दिया जाए तो लगभग हर सब्जी के भाव में भारी उछाल आया है. जो हरी सब्जियां आम दिनों में रसोई की शान हुआ करती थीं, अब वे आम आदमी की पहुंच से दूर होती दिख रही हैं. मंडी में हालत यह है कि ज्यादातर सब्जियां 40 रुपये से लेकर 100 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही हैं. अचानक आई इस तेजी ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के घरेलू बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. लोग अब थैला भरकर सब्जी खरीदने के बजाय केवल जरूरत भर का सामान लेकर लौट रहे हैं.

मंडी में कीमतों का नया गणित

रांची की थोक और खुदरा सब्जी मंडियों का जायजा लेने पर साफ दिखता है कि दाम किस कदर बढ़ चुके हैं. खुदरा बाजार में प्याज की अलग-अलग किस्में 50 रुपये से लेकर 60 रुपये प्रति किलो तक बिक रही हैं. टमाटर के तेवर भी तीखे हैं और यह 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच चुका है. हरी सब्जियों की बात करें तो फूलगोभी 70 से 80 रुपये किलो बिक रही है. नेनुआ, झींगी और भिंडी जैसी आम सब्जियां भी 50 से 60 रुपये से नीचे मिलने का नाम नहीं ले रही हैं. कुछ दिन पहले तक 10 से 20 रुपये में मिलने वाली भिंडी अब सीधे 80 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंची है. मंडी में 40 रुपये से कम भाव वाली कोई भी हरी सब्जी ढूंढना मुश्किल हो गया है.

बाहरी मंडियों में मांग बढ़ने से घटी आवक

सब्जी के खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि यह तेजी पिछले तीन-चार दिनों में बहुत तेजी से आई है. नवरात्र शुरू होने के बाद बाहर की बड़ी मंडियों, खासतौर पर कोलकाता में सब्जियों की मांग अचानक बढ़ गई है. बाहर के बड़े व्यापारी यहां आकर माल ऊंचे दामों पर खरीद लेते हैं. बड़े पैमाने पर सब्जियों की खेप बाहर भेजे जाने से स्थानीय बाजार में आवक काफी कम हो गई है. जब मंडी में माल कम पहुंचता है और स्थानीय मांग बनी रहती है, तो कीमतें अपने आप बढ़ जाती हैं. दुकानदारों का भी यही मानना है कि थोक मंडी से ही महंगा माल मिलने के कारण वे इसे ऊंचे भाव पर बेचने के लिए मजबूर हैं.

यह भी पढ़ें: झारखंड सरकार की पहल से फुटपाथ दुकानदारों को मिलेगा पक्का ठिकाना, रांची के 53 वार्डों में बनाए जाएंगे वेंडर मार्केट

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आयुष मंत्रालय ने त्वचा रोगों के लिए जारी किए नए मानक दिशानिर्देश, चार पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को किया शामिल

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय ने त्वचा संबंधी विकारों के उपचार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी में त्वचा रोगों के प्रबंधन के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) जारी किए हैं, जिसमें योग को भी शामिल किया गया है।

ये दिशानिर्देश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आयुष विभाग द्वारा तैयार किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आयुष प्रणालियों में नैदानिक देखभाल में अधिक एकरूपता, गुणवत्ता और साक्ष्य आधारित उपचार लाना है। नए दिशानिर्देश सोरायसिस, विटिलिगो, डर्मेटाइटिस और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए आयुष देखभाल को मानकीकृत करेंगे।

आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये दिशानिर्देश आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचे के साथ और अधिक एकीकृत करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा, ये दिशानिर्देश सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और समग्र देखभाल को बढ़ावा देने हेतु प्रणाली-विशिष्ट नैदानिक दृष्टिकोणों को समकालीन वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हैं। मानकीकृत और साक्ष्य आधारित नैदानिक अभ्यास को बढ़ावा देकर ये रोगी देखभाल में सुधार लाने में मदद करेंगे।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, त्वचा संबंधी विकारों के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश आयुष प्रणालियों में मानकीकरण और साक्ष्य आधारित अभ्यास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये प्रत्येक प्रणाली के मूल सिद्धांतों को संरक्षित करते हुए रोकथाम, निदान, उपचार और फॉलो-अप के लिए व्यावहारिक सुझाव देते हैं।

स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने बहुविषयक सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये दिशानिर्देश आयुष चिकित्सकों को सुरक्षित, प्रभावी और रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में मदद करेंगे।

ये दिशानिर्देश 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किए गए। इनमें सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस जैसी सामान्य त्वचा स्थितियों की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास के बारे में विशिष्ट सिफारिशें दी गई हैं।

इन दिशानिर्देशों को आयुष अनुसंधान परिषदों, वरिष्ठ अकादमिक विशेषज्ञों, योग विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है। साथ ही दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ साझेदारी में प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ इनका क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन भी किया गया, ताकि इनकी व्यावहारिक उपयोगिता को परखा जा सके।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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  Sports

London में Prince William ने Sourav Ganguly और Ajinkya Rahane संग खेला Cricket

लंदन की मशहूर सड़क द मॉल पर मंगलवार को नजारा कुछ अलग देखने को मिला। आमतौर पर शाही जुलूस और बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होने वाली इस सड़क पर ब्रिटेन के प्रिंस विलियम ने क्रिकेट का मैदान सजा दिया। इस अनौपचारिक मुकाबले में कई मौजूदा और पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर शामिल हुए। खास बात यह रही कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और हाल ही में क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे भी इस आयोजन का हिस्सा बने।

बकिंघम पैलेस की बैकड्राप में हुए इस खेल में वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर ब्रायन लारा, इंग्लैंड के जो रूट और हैरी ब्रूक भी मौजूद रहे। यह आयोजन ब्रिटिश शाही परिवार से जुड़े एक सम्मान समारोह से पहले किया गया था। इसमें खिलाड़ियों ने टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला और खेल के मैदान से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं।

प्रिंस विलियम ने भी हाथ में बल्ला थामा और सौरव गांगुली की गेंदों का सामना किया। शर्ट और स्वेटर पहने प्रिंस ने कुछ शॉट लगाए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। जब गांगुली से प्रिंस विलियम की बल्लेबाजी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने ठीक-ठाक बल्लेबाजी की।

गौरतलब है कि द मॉल लंदन के बीचोंबीच स्थित एक प्रमुख सड़क है, जो बकिंघम पैलेस की ओर जाती है। यहां आमतौर पर शाही समारोह, परेड और राष्ट्रीय उत्सव आयोजित होते हैं। ऐसे स्थान पर क्रिकेट का आयोजन अपने आप में खास रहा, क्योंकि इसने खेल को शाही परंपराओं से जुड़े एक अलग माहौल में पेश किया।

अजिंक्य रहाणे ने बुधवार को लिंक्डइन पर अपनी इस मुलाकात का अनुभव साझा किया। उन्होंने लिखा कि दुनिया के कई शानदार मैदानों पर क्रिकेट खेलने का मौका मिला है, लेकिन बकिंघम पैलेस के सामने द मॉल पर टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलना लंबे समय तक याद रहने वाला अनुभव रहेगा।

रहाणे ने प्रिंस विलियम के साथ समय बिताने और सौरव गांगुली, ब्रायन लारा, जो रूट, हैरी ब्रूक तथा दूसरे खिलाड़ियों से मिलने को भी खास बताया। उनके मुताबिक, इस दौरान क्रिकेट की उस ताकत पर चर्चा हुई, जो अलग-अलग देशों और लोगों को एक साथ जोड़ती है। खिलाड़ियों ने इंग्लैंड और भारत में खेलने के अपने अनुभवों के साथ खेल के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी पर भी बात की।

बता दें कि क्रिकेट केवल मैदान पर जीत और हार तक सीमित नहीं है। यह अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों और प्रशंसकों को जोड़ने का माध्यम भी है। भारत, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के दिग्गजों का एक साथ आना इसी भावना को दिखाता है। प्रिंस विलियम की इस पहल ने क्रिकेट को शाही समारोह से पहले एक अनौपचारिक और दोस्ताना रंग दिया है, जिसे खिलाड़ी लंबे समय तक याद रखने वाले हैं।

Wed, 14 Oct 2026 21:08:00 +0530

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