आयुष मंत्रालय ने त्वचा रोगों के लिए जारी किए नए मानक दिशानिर्देश, चार पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को किया शामिल
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। आयुष मंत्रालय ने त्वचा संबंधी विकारों के उपचार के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी में त्वचा रोगों के प्रबंधन के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश (एसटीजी) जारी किए हैं, जिसमें योग को भी शामिल किया गया है।
ये दिशानिर्देश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के आयुष विभाग द्वारा तैयार किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आयुष प्रणालियों में नैदानिक देखभाल में अधिक एकरूपता, गुणवत्ता और साक्ष्य आधारित उपचार लाना है। नए दिशानिर्देश सोरायसिस, विटिलिगो, डर्मेटाइटिस और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए आयुष देखभाल को मानकीकृत करेंगे।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये दिशानिर्देश आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचे के साथ और अधिक एकीकृत करने में सहायक होंगे। उन्होंने कहा, ये दिशानिर्देश सामान्य त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित, प्रभावी और समग्र देखभाल को बढ़ावा देने हेतु प्रणाली-विशिष्ट नैदानिक दृष्टिकोणों को समकालीन वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ जोड़ते हैं। मानकीकृत और साक्ष्य आधारित नैदानिक अभ्यास को बढ़ावा देकर ये रोगी देखभाल में सुधार लाने में मदद करेंगे।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा, त्वचा संबंधी विकारों के लिए मानक उपचार दिशानिर्देश आयुष प्रणालियों में मानकीकरण और साक्ष्य आधारित अभ्यास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये प्रत्येक प्रणाली के मूल सिद्धांतों को संरक्षित करते हुए रोकथाम, निदान, उपचार और फॉलो-अप के लिए व्यावहारिक सुझाव देते हैं।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा ने बहुविषयक सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ये दिशानिर्देश आयुष चिकित्सकों को सुरक्षित, प्रभावी और रोगी-केंद्रित देखभाल प्रदान करने में मदद करेंगे।
ये दिशानिर्देश 11वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर सार्वजनिक किए गए। इनमें सोरायसिस, डर्मेटाइटिस, विटिलिगो, पित्ती और डर्मेटोफाइटोसिस जैसी सामान्य त्वचा स्थितियों की रोकथाम, निदान, उपचार और पुनर्वास के बारे में विशिष्ट सिफारिशें दी गई हैं।
इन दिशानिर्देशों को आयुष अनुसंधान परिषदों, वरिष्ठ अकादमिक विशेषज्ञों, योग विशेषज्ञों और आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है। साथ ही दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ साझेदारी में प्राथमिक और माध्यमिक स्वास्थ्य सेवा में कार्यरत चिकित्सा अधिकारियों के साथ इनका क्षेत्र-स्तरीय सत्यापन भी किया गया, ताकि इनकी व्यावहारिक उपयोगिता को परखा जा सके।
--आईएएनएस
एससीएच/डीकेपी
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वापस लौटी 'दादा' और 'युवी' की जोड़ी, दिल्ली कैपिटल्स के कोच बने युवराज सिंह, खिताबी सूखे को खत्म करने के लिए DC का मास्टरस्ट्रोक
IPL 2027: आईपीएल 2027 के सीजन से पहले दिल्ली कैपिटल्स ने सबसे बड़ा दांव खेल दिया है. भारतीय टीम के पूर्व महान ऑलराउंडर और 'सिक्सर किंग' युवराज सिंह को दिल्ली कैपिटल्स का नया असिस्टेंट और बैटिंग कोच नियुक्त किया गया है. युवराज के शानदार और ऐतिहासिक करियर में यह पहला मौका है जब वह किसी टीम के साथ एक आधिकारिक कोचिंग भूमिका में नजर आएंगे. इस बड़े फैसले की सबसे खास बात यह है कि युवराज सिंह अब मैदान के डगआउट में अपने पुराने कप्तान यानी दिल्ली कैपिटल्स के हेड कोच सौरव गांगुली के साथ रणनीतियां बनाते दिखेंगे. 'दादा' और उनकी पुरानी पलटन के एक साथ वापसी ने दिल्ली कैपिटल्स के फैंस को आईपीएल के पहले खिताब की नई उम्मीद दे दी है.
कोचिंग की दुनिया में युवराज सिंह का 'ऑफिशियल डेब्यू'
साल 2019 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने के बाद, युवराज सिंह ने कई युवा भारतीय खिलाड़ियों के करियर को संवारने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और प्रभसिमरन सिंह जैसे स्टार बल्लेबाजों को व्यक्तिगत रूप से मेंटर किया है. हालांकि, यह पहली बार होगा जब वह आईपीएल में किसी टीम के मुख्य कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनेंगे. दिल्ली कैपिटल्स के सह-मालिक पार्थ जिंदल ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि युवी का विनिंग माइंडसेट और युवाओं के साथ जुड़ने की क्षमता टीम के लिए अमूल्य साबित होगी.
Yuvraj Singh joins Sourav Ganguly's backroom staff at Delhi Capitals, in what will be his first formal coaching role
— Cricinfo (@cricinfo) October 13, 2026
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दिल्ली दिल्ली के साथ युवी का पुराना और खास रिश्ता
युवराज सिंह के लिए दिल्ली की टीम में लौटना एक बेहद इमोशनल और खास पल है. खिलाड़ी के तौर पर वह साल 2015 में दिल्ली फ्रेंचाइज के लिए खेल चुके हैं. उस दौरान नीलामी में दिल्ली ने उन्हें 16 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कीमत पर खरीदा था, जो उस समय आईपीएल इतिहास की सबसे बड़ी बोली थी. अब 12 साल बाद वह खिलाड़ी के रूप में नहीं, बल्कि टीम के बल्लेबाजों को निखारने और उन्हें आक्रामक क्रिकेट सिखाने के लिए नए अवतार में वापस आए हैं.
'दादा और युवी' की जोड़ी: पुरानी यादें और नए गौरव की तलाश
दिल्ली कैपिटल्स के इस नए कोचिंग स्टाफ ने क्रिकेट फैंस को पुराने सुनहरे दिनों की याद दिला दी है. सौरव गांगुली ही वह कप्तान थे, जिन्होंने साल 2000 में युवराज सिंह को भारतीय टीम में डेब्यू करने का मौका दिया था. इन दोनों दिग्गजों ने भारत को कई ऐतिहासिक मैच जिताए हैं और अब वे कोच के रूप में दिल्ली कैपिटल्स को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं. आईपीएल के पिछले 19 सीजन में दिल्ली की टीम एक बार भी ट्रॉफी नहीं जीत सकी है. ऐसे में गांगुली की कप्तानी और युवराज के आक्रामक अंदाज का यह संगम दिल्ली के खिताबी सूखे को खत्म करने का एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है.
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