'लद्दाख हमारा अभिन्न और अटूट अंग'; आपके इनकार से हकीकत नहीं बदलने वाला: चीन को भारत की दो टूक
विदेश मंत्रालय (MEA) के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम फिर से दोहराते हैं कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का एक अभिन्न और अटूट हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह स्थापित तथ्य नहीं बदल सकता।
Kanya Pujan 2026: अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन के लिए सही नियमों का पालन जरूरी, जानें सही आयु और विधि
Kanya Pujan 2026: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत इस बार 11 अक्टूबर को हो चुकी है. इन 9 दिनों में दुर्गा मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों का पूजन किया जाता है. इस पूरे उत्सव के दौरान कंजक पूजन किया जाता है. इस कन्या पूजन का आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, दो साल से लेकर 10 साल तक की कन्याओं को दुर्गा मां का साक्षात रूप माना जाता है. साथ ही उनके साथ एक बालक यानी लांगूर को भी बिठाया जाता है.
उसे भैरव बाबा का स्वरूप माना जाता है, जिन्हें दुर्गा माता का रक्षक बताया जाता है. इसलिए, एक छोटे बालक को भैरव बाबा या लांगुर के रूप में बैठाना आवश्यक होता है. चलिए जानते हैं अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन का समय और जरूरी नियम.
सिर्फ अष्टमी-नवमी को ही कन्या पूजन क्यों होता है?
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का खास महत्व होता है क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि इन दोनों दिनों पर दुर्गा मां की शक्तिय के दो अंतिम स्वरूपों की पूजा होती है. नवरात्रि के आठवें दिन पर माता महागौरी की पूजा की जाती है. उन्हें शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता हैं. इस दिन कन्या पूजन करने से मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. महानवमी के दिन सिद्धिदात्री माता की पूजा होती है. उन्हें ज्ञान, यश और सभी प्रकार की सिद्धियों की देवी कहा जाता है.
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अष्टमी-नवमी कब है?
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अष्टमी पूजन 19 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा और 20 अक्टूबर 2026 को महानवमी की पूजा की जाएगी. इस दिन दशहरा भी मनाया जाएगा. बता दें कि इस साल नवरात्रि पूरे दस दिन के होने वाले हैं.
कंजक पूजन का महत्व
कन्या पूजन के लिए 2 से 10 साल की कन्याओं को बैठाना विशेष माना जाता है. क्योंकि हर उम्र की कन्या का अपना अलग महत्व होता है. 9 कन्याओं के साथ एक लांगुर को भी पूजा में बिठाना अत्यंत आवश्यक होता है. कंजक पूजन के लिए अष्टमी और नवमी तिथि पर सुबह सूर्योदय के बाद का समय सबसे सही माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, चौघड़िया मुहूर्त के मुताबिक, शुभ, लाभ और अमृत मुहूर्त में कन्या पूजन किया जाता है. कंजक पूजन करने से घर में खुशहाली और सुख-समृद्धि आती है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सुबह 06:30 बजे से लेकर 10:30 बजे तक के बीच का समय कन्या पूजन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. इन दोनों दिनों पर आप राहुकाल का समय छोड़कर सही समय पर कंजकों का पूजन कर सकते हैं.
कन्या पूजन की सही विधि क्या है?
कन्या पूजन की शुरुआत में सबसे पहले कन्याओं को बहुत सम्मान के साथ अपने घर पर बुलाएं. स्वच्छ जल व दूध से कन्याओं के चरणों को धोएं और उन्हें सम्मान के साथ आसन पर बिठाएं. इसके बाद उनके माथे पर कुमकुम, रोली और अक्षत का तिलक करें. हाथों में कलावा बांधे. दुर्गा मां के पावन प्रसाद के रूप में पूरी, हलवा और काले चने उन्हें प्रेम से परोसें. भोजन के बाद उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाएं और सामर्थ्य अनुसार फल तथा श्रृंगार की सामग्री दें. अंत में भक्ति भाव से उन्हें दक्षिणा दें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें और श्रद्धा के साथ विदा करें.
किस आयु की कन्या से कौन सी सिद्धि मिलती है?
- दो वर्ष की कन्या को कुमारी मानी जाता है.
- तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति कहा जाता है.
- चार वर्ष की आयु वाली कन्या को कल्याणी माना जाता है.
- पांच वर्ष की आयु की कन्या को रोहिणी कहा जाता है.
- छ: वर्ष की आयु वाली कन्याओं को कालिका माना जाता है.
- सात वर्ष की कन्याओं को चंडिका कहा जाता है.
- आठ वर्ष की कन्या को शांभवी कहते हैं.
- नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा माना जाता है.
- वहीं, दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा माना गया है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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