Meta ने पेश किया नया Muse Wonder AI मॉडल OpenAI से बेहतर होने का दावा
एआई की दौड़ में कुछ समय तक पीछे रहने के बाद मेटा के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने एक बार फिर अपनी कंपनी की ताकत दिखाने का दावा किया है। मेटा ने म्यूज वंडर नाम से एआई के नए मॉडल पेश किए हैं। जुकरबर्ग के मुताबिक, ये मॉडल कंपनी को इस तकनीक के सबसे एडवांस स्तर पर पहुंचाने में मदद करेंगे। कंपनी का लक्ष्य ओपनएआई और एंथ्रोपिक जैसी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को कड़ी टक्कर देना है।
मार्क जुकरबर्ग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर नए मॉडल की जानकारी देते हुए बताया कि म्यूज वंडर, कंपनी के पहले म्यूज स्पार्क मॉडल की तुलना में कहीं अधिक बड़ा और एडवांस है। उन्होंने कहा कि इसे तैयार करने के लिए बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग क्षमता, भारी निवेश और लंबे समय तक वैज्ञानिक रिसर्च की जरूरत पड़ी है। फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में जुकरबर्ग ने कहा कि नया मॉडल ऐसे जटिल काम करने में सक्षम होगा, जो एआई के क्षेत्र में सबसे एडवांस माने जाते हैं।
मेटा के अनुसार, कंपनी के आंतरिक परीक्षणों और आर्टिफिशियल एनालिसिस के आंकड़ों में म्यूज वंडर ने कुछ कामों में एंथ्रोपिक के ओपस 5.5 और ओपनएआई के जीपीटी-6 एस्ट्रा जैसे मॉडलों से बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि, यह कंपनी के बताए परीक्षणों पर आधारित दावा है और इससे हर तरह के काम में बेहतर होने की पुष्टि नहीं होती।
मेटा ने पिछले एक साल में एआई के क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया है। जून 2025 में कंपनी ने स्केल एआई में 14 अरब डॉलर का निवेश किया था और उसके सह-संस्थापक अलेक्जेंडर वांग को अपनी एआई योजनाओं की जिम्मेदारी दी थी। वांग अब मेटा की सुपरइंटेलिजेंस लैब्स का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने म्यूज वंडर की शुरुआत को कंपनी के लिए बड़ा मौका बताया और कहा कि उन्हें भरोसा है कि इसके मॉडल बाजार में उपलब्ध सबसे अच्छे मॉडलों को टक्कर दे सकते हैं।
कंपनी ने म्यूज वंडर के 2 संस्करण पेश किए हैं। इनमें सामान्य म्यूज वंडर और अधिक शक्तिशाली म्यूज वंडर फुल शामिल हैं। मेटा का निजी एआई सहायक म्यूज, जिसका भुगतान वाला संस्करण पिछले महीने शुरू किया गया था, अब इस नए मॉडल का इस्तेमाल करेगा। यह सहायक सामान मंगाने और यात्रा की बुकिंग जैसे कामों में मदद कर सकता है। कंपनी का दावा है कि अमेरिका में इसका ऐप एप्पल और एंड्रॉयड के ऐप स्टोर पर सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले ऐप में शामिल रहा है।
अलेक्जेंडर वांग के मुताबिक, मेटा ने कोड लिखने वाले सहायक बनाने पर ज्यादा ध्यान देने के बजाय आम लोगों और पेशेवरों के लिए काम करने वाले निजी डिजिटल सहायकों को बेहतर बनाने की कोशिश की है। म्यूज वंडर में सक्रिय मेमोरी की सुविधा भी है, जो जरूरी जानकारी को कई दिनों, हफ्तों या महीनों तक याद रखने और किसी काम में परेशानी आने पर दूसरा तरीका आजमाने में मदद कर सकती है।
नए मॉडल को मेटा मॉडल एपीआई और म्यूज कोड के जरिए उपलब्ध कराया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 10 लाख टोकन के इस्तेमाल के लिए 0.20 डॉलर, यानी करीब 19 रुपये है, जबकि म्यूज वंडर फुल की कीमत 200 डॉलर, यानी लगभग 19,000 रुपये प्रति माह रखी गई है। शुरुआत के दौरान कोड सदस्यता में इस्तेमाल की सीमा गिनने से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी भी सामने आई। वांग ने बताया कि कंपनी कई समस्याओं को ठीक करने में जुटी है।
गौरतलब है कि म्यूज वंडर के साथ मेटा ने अपने पुराने ओपन सोर्स वाले मॉडल से अलग रास्ता चुना है। नया मॉडल बंद व्यवस्था के तहत पेश किया गया है और इसके सबसे एडवांस संस्करण कारोबारों को बेचे जाएंगे। दूसरी ओर, कंपनी ने मई में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। कर्मचारियों की गतिविधियों से एआई को प्रशिक्षित करने की योजना का भी विरोध हुआ था। इसके अलावा, बच्चों की सुरक्षा और सोशल मीडिया की लत से जुड़े मामले में अमेरिकी राज्यों के साथ कानूनी विवाद खत्म करने के लिए मेटा ने अगस्त में 18 अरब डॉलर के भुगतान पर सहमति दी थी। अब कंपनी की नई चुनौती अपने महंगे तकनीकी निवेश को सफल कारोबार में बदलने की है।
60 की उम्र में 1 गलत फैसले से तबाह हो गया करियर, 2 साल से अमेरिका में भटक रहे हैं IIT कानपुर से पढ़े गौतम
Gautam Dev LinkedIn Story: आईआईटी कानपुर और स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से पढ़े 61 वर्षीय गौतम देव के पास 20 साल का आईटी अनुभव था. वह अमेरिका में नौकरी कर रहे थे. 2 साल पहले नौकरी जाने के बाद उन्हें काफी भटकना पड़ा. उन्हें क्राउडफंडिंग तक का सहारा लेना पड़ा. जानिए उनके लिंक्डइन बायो और अमेरिका में रहने के संघर्ष की पूरी कहानी.
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