Kanpur में BJP नेता को फार्महाउस पर बंधक बनाकर 15 लाख की डकैती
कानपुर स्थित सेन-पश्चिम पारा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) मोर्चा के एक पदाधिकारी को दो नकाबपोश बदमाशों ने उनके फार्महाउस पर बंधक बना लिया और 15 लाख रुपये व सोने की दो चेन लूट लीं। पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि लूट के संबंध में मामला दर्ज कर लिया गया है।
पूछताछ के लिए चार सुरक्षाकर्मी, चार अंगरक्षक, चालक और नौकर सहित करीब 14 कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया है। लाल ने बताया कि पूर्व ब्लॉक प्रमुख यादव सोमवार रात लखनऊ से लौटने के बाद अपने फार्महाउस में ठहरे थे, तभी दो नकाबपोश व्यक्ति वहां दाखिल हुए और उन्हें बंधक बनाने के उपरांत नकदी और गले में पहनी सोने की दो चेन लूटकर फरार हो गए। यादव किसी तरह खुद को मुक्त कराने में सफल रहे और उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना दी।
सूचना मिलने पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा और पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) दीपेंद्र नाथ चौधरी सहित पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भाजपा नेता के फार्महाउस पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस इस मामले में जान-पहचान वाले लोगों की मिलीभगत की आशंका की भी जांच कर रही है। संदेह है कि आरोपियों को फार्महाउस में रखी नकदी के बारे में पहले से जानकारी रही होगी।
पुलिस आयुक्त ने कहा, “हमें घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज मिल गई है, लेकिन उसमें किसी संदिग्ध चेहरा साफ नजर नहीं आ रहा है। हम सुराग तलाशने के लिए चारदीवारी के पास हुई कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रहे हैं।” मामले को सुलझाने के लिए पुलिस उपायुक्त (दक्षिण) दीपेंद्र नाथ चौधरी, अपर पुलिस आयुक्त अरीबा नोमान और अपर पुलिस आयुक्त कृष्णकांत यादव के नेतृत्व में करीब छह पुलिस दल गठित किए गए हैं। लाल ने कहा कि पुलिस आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और लूटी गई नकदी तथा कीमती सामान बरामद करने के प्रयास कर रही है।
चुनावी टिकट बिक्री के दावों पर CBI जांच से Supreme Court का इनकार
उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा कथित तौर पर चुनावी टिकट बेचे जाने से संबंधित ‘स्टिंग ऑपरेशन’ की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इनकार कर दिया। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता स्वराज वाहिनी एसोसिएशन को इस मामले में निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित अपने प्रतिवेदन और स्मरण पत्र को दोबारा आगे बढ़ाने की छूट दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में याचिकाकर्ता संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
याचिका में कुछ राजनीतिक दलों के कामकाज और कथित तौर पर चुनावी टिकट बेचे जाने से संबंधित स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र किया गया था। ये स्टिंग ऑपरेशन किए गए थे और इन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया गया था। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को निर्वाचन आयोग के पास जाने को कहा।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग शिकायतों का निवारण करने का प्रयास करेगा, हमें इस बात पर कोई संदेह नहीं है।’’ निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के अलावा, याचिका में मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा उत्तर प्रदेश की निषाद पार्टी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल सोनेलाल और जन जनवादी पार्टी सोशलिस्ट को भी पक्षकार बनाया गया था। इससे पहले, सात सितंबर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों के कामकाज से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित एक स्टिंग ऑपरेशन की सीबीआई या किसी अन्य जांच एजेंसी से जांच कराने के अनुरोध वाली जनहित याचिका खारिज कर दी थी। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि अदालत से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह जनहित के नाम पर पेश किए जाने वाले हर स्टिंग ऑपरेशन या सोशल मीडिया रिपोर्ट की जांच के निर्देश दे।
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