Responsive Scrollable Menu

अवमानना की कार्यवाही क्यों न हो? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र पर दागा सवाल, फिर CJI ने मान ली सरकार की बात

Supreme Court News: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की कथित अनदेखी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर गरमा गया है. 10 अक्टूबर को मेट्रो सेवाएं ठप करने और आवाजाही पर कड़ी पाबंदियां लगाने को लेकर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और डीएमआरसी चेयरपर्सन डी. थारा के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर अदालत में बहस हुई.

Continue reading on the app

Dopamine और Serotonin जैसे Hormones तय करते हैं इंसान का मूड और व्यवहार

हमारे आसपास जितने भी लोग होते हैं, उनमें अपने व्यक्तित्व की कोई न कोई खासियत मौजूद होती है, जो उनको दूसरों से अलग बनाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके पीछे क्या वजह हो सकती है। दरअसल, न्यूरोट्रांसमीटर्स और हार्मोन्स व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि न्यूरोट्रांसमीटर्स और हार्मोन्स व्यक्ति के व्यवहार को किस तरह से प्रभावित करते हैं।

जानिए कैसे काम करता है ब्रेन

इंसानी दिमाग किसी कंप्यूटर की तरह काम करता है। इसमें कुछ स्पेशल मैसेंजर्स होते हैं, जो किसी वायरिंग की तरह हमारे पूरे शरीर में मौजूद होते हैं, जिनको न्यूरोट्रांसमीटर्स कहा जाता है। इसकी मदद से हमारा दिमाग शरीर के सभी हिस्सों तक संदेश पहुंचाता है। आमतौर पर देखा जाता है कि अगर किसी गंभीर बीमारी, बढ़ती उम्र या फिर दवाओं के साइड इफेक्ट के कारण धीरे-धीरे दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स खत्म होने लगते हैं।

इसे भी पढ़ें: Muscle Pain Relief: मांसपेशियों के Muscle Pain से राहत पाने के लिए अपनाएं सिकाई और हल्दी दूध के नुस्खे

डोपामिन हार्मोन

डोपामिन हार्मोन एक ऐसा न्यूरोट्रांसमीटर है, जो व्यक्ति के फोकस, मेमोरी, सीखने और प्रॉब्लम सॉल्विंग कैपेसिटी को बढ़ाता है। इसकी एक्टिविटी के कारण व्यक्ति नए काम को करने के लिए मोटिवेट होता है। जब व्यक्ति किसी गोल की ओर बढ़ रहा होता है, तो यह हार्मोन तेजी से काम करता है। यह अच्छी नींद के लिए भी सहायक होता है। वहीं इस हार्मोन की कमी होने पर व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है। अल्कोहल या ड्रग्स के एडिक्शन के शिकार लोगों में इस हार्मोन की कमी पाई जाती है। व्यक्ति के अच्छे व्यवहार के लिए डोपामिन की क्वांटिटी बैलेंस्ड होनी चाहिए।

सेरोटोनिन हार्मोन

सेरोटोनिन पॉजिटिव हार्मोन है, जो व्यक्ति में भूख, नींद और सेक्स की इच्छा को तय करता है और उसको पॉजिटिव बनाता है। सेरोटोनिन का लेवल अगर अच्छा है, तो यह व्यक्ति को खुश और एक्टिव बनाने में मदद करता है। लेकिन इस हार्मोन की कमी से व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है। वहीं ज्यादा लेवल होने पर व्यक्ति ओवर एक्साइटेड हो जाता है और गुस्सा भी अधिक आता है। इस हार्मोन से पैदा होने वाले मूड को हाइपो-मेनिया कहा जाता है।

नॉरएड्रिनालिन हार्मोन

नॉरएड्रिनालिन हार्मोन की वजह से व्यक्ति जोश में भर जाता है। खेल और युद्ध के मैदान में खिलाड़ियों और सैनिकों के दिमाग में इसका सीक्रेशन बढ़ जाता है। यह बीपी और हार्टबीट को कंट्रोल करता है और इसका बैलेंस्ड लेवल इंसान को फिट और खुश बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से थकावट फील होती है और इसकी अधिक मात्रा के कारण व्यक्ति को हाई बीपी की समस्या हो सकती है।

ऑक्सिटोसिन हार्मोन

ऑक्सिटोसिन हार्मोन उम्मीद, प्यार, देखभाल और विश्वास करने की भावना से जुड़ा होता है। ऑक्सिटोसिन हार्मोन इंसान के अलावा दूध पिलाने वाले सभी जीवों में भी पाया जाता है। महिलाओं में डिलीवरी के दौरान ब्रेन से इसी हार्मोन का रिसाव होता है। यह महिलाओं की डिलीवरी को आसान बनाने में सहायता करता है, वहीं मां के शरीर में दूध बनाने के प्रोसेस में भी इस हार्मोन की बड़ी भूमिका रहती है। बच्चे के जन्म के बाद मां का उसके साथ जो गहरा भावनात्मक जुड़ाव और प्यार महसूस होता है। वह इसी हार्मोन के कारण होता है। शरीर में इसकी कमी होने पर महिलाओं में निराशा और उदासी जैसे लक्षण दिख सकते हैं। लेकिन पॉजिटिव सोच रखने और खुध रहने से इस हार्मोन का लेवल अपने आप बढ़ जाता है।

एंडोर्फिंस हार्मोन

ब्रेन की पिट्यूटरी ग्लैंड से 20 प्रकार के एंडोर्फिंस हार्मोन का सीक्रेसन होता है। जोकि शरीर के लिए कई तरह से काम करते हैं। हर व्यक्ति के शरीर में यह हार्मोन प्राकृतिक रूप से अलग-अलग लेवल पर होता है। हमारे शरीर के लिए यह हार्मोन पेन किलर के रूप में काम करता है। जब भी शरीर के किसी हिस्से में दर्द का एहसास होता है, तो हमारा ब्रेन ज्यादा क्वांटिटी में एंडोर्फिन रिलीज करने लगता है। जिससे व्यक्ति को दर्द सहने की ताकत मिलती है। वहीं इमरजेंसी सिचुएशन में प्राकृतिक रूप से इसका सीक्रेशन बढ़ जाता है। वहीं जब महिलाओं में लेबर पेन होता है, तो इसका लेवल बढ़ जाता है, इसी कारण से वह मुश्किल दर्द बर्दाश्त कर पाती हैं।

कॉर्टिसोल हार्मोन

कई बार ऐसा होता है कि जब व्यक्ति के शरीर में आराम और खुशी का एहसास कराने वाले डोपामिन, सेरोटोनिन और नॉरएड्रिनालिन जैसे हैप्पी हार्मोन्स का लेवल काफी कम हो जाता है। ऐसी कंडीशन में कॉर्टिसोल हार्मोन अपना काम शुरूकर देता है। जिसकी एक्टिविटी के कारण व्यक्ति थोड़ी देर में टेंशन में आ जाता है, लेकिन इस समस्या का समाधान ढूंढने में उसकी मदद करता है।

ये हैं फर्टिलिटी से जुड़े हार्मोन्स

टीनेज में लड़कियों के शरीर में फीमेल फर्टिलिटी हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का सीक्रेशन शुरू हो जाता है। जो लड़कियों की फिजिकल डेवलपमेंट में मददगार होता है। जिस कारण से उनमें आर्टिस्टिक नेचर, केयर और पेशेंस जैसे फीमेल ट्रेड्स पाए जाते हैं। वहीं लड़कों में  मेल हार्मोन टेस्टोस्टेरोन पाया जाता है, जिस कारण उनमें लीडरशिप, निडरता और जोश जैसे मेल ट्रेड्स का डेवलपमेंट होता है। पुरुष और महिला दोनों के शरीर में अपोजिट जेंडर के लिए हार्मोन्स लिमिटेड क्वांटिटी में एक्टिव होते हैं। यह महिला और पुरुषों की पर्सनालिटी को बैलेंस करने का काम करता है। इस कारण महिलाओं में केयरिंग नेचर और पुरुषों में हिम्मत आदि की क्वालिटी नजर आती है।

थायरॉयड और मूड

गले में मौजूद थायरॉयड ग्लैंड से T3 और T4 हार्मोन का सीक्रेशन भी होता है। पुरुषों के शरीर में भी यह हार्मोन मौजूद होता है। जिस कारण उनको डिप्रेशन, वेट लॉस, सुस्ती और कब्ज जैसी समस्या हो सकती है। इसका लेवल ज्यादा होने से उनमें गुस्सा, घबराहट, वेट गेन, अनिद्रा और लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है। हालांकि अधिकतर महिलाओं में हाइपोथायरॉइडिज्म यानी इस हार्मोन की कमी से जुड़ी समस्या देखने को मिलती है।

यह न भूलें

रोजाना एक्सरसाइज और मॉर्निंग वॉक करना चाहिए। इससे शरीर में एंडोर्फिंस हार्मोन लेवल बढ़ता है और व्यक्ति स्ट्रेस फ्री फील करता है।

वहीं अच्छी मेमोरी के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।

पहेलियां, सुडोकू और चेस जैसे गेम्स खेलने से दिमाग की अच्छी एक्सरसाइज होती है।

मेंटल स्ट्रेस की कंडीशन में अगर चटपटी और चॉकलेट जैसी चीजें खाई जाती हैं, तो दिमाग में एंडोर्फिन हार्मोन तेजी से रिलीज होता है, जोकि स्ट्रेस लेवल को कम करने में मदद करता है।

स्मोकिंग की आदत और पॉल्यूशन से बचने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि धुंए में मौजूद जहरीले एलिमेंट्स से दिमाग की काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।

Continue reading on the app

  Sports

Video: न्यूजीलैंड जाने वाली वनडे टीम के ऐलान में देरी क्यों, क्या अंतिम दो मैच के लिए होगी अलग टीम?

न्यूज़ीलैंड में भारत का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है, इसलिए टीम को विदेशी परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन और डब्ल्यूटीसी के लिए टेस्ट मैच जीतना जरूरी है। कुल मिलाकर, टीम चयन में प्रदर्शन, फिटनेस और युवा खिलाड़ियों को मौका देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि टीम इंडिया न्यूज़ीलैंड दौरे पर बेहतर प्रदर्शन कर सके। Tue, 13 Oct 2026 16:59:14 +0530

  Videos
See all

Breaking News : Sunetra Pawar की लीडरशिप में पहली सफलता, Someshwar Sugar Factory Election जीत #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-13T11:43:13+00:00

AAJTAK 2 | LUCKNOW SHIVA SHARMA MURDER CASE | SHRADDHA DUBEY को लेकर कई बड़े खुलासे! | AT2 LIVE #tmktech #vivo #v29pro
2026-10-13T11:40:24+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers