Gujarat Civic Election Results: गांधीनगर में BJP का दबदबा, 28 में से 23 सीटें जीतीं; कांग्रेस को 5
Gujarat Civic Election Results: गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों और उपचुनावों की मतगणना में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गांधीनगर नगर निगम में मजबूत बढ़त हासिल की है. मंगलवार सुबह 9 बजे से शुरू हुई मतगणना के शुरुआती नतीजों में बीजेपी ने कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया है. वहीं अन्य राजनीतिक दलों ने 12 बजे तक खाता भी नहीं खोला.
गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिकाओं में भी मतगणना जारी है. इन नतीजों पर राजनीतिक दलों की नजर इसलिए भी है, क्योंकि स्थानीय निकायों में प्रदर्शन को शहरी और क्षेत्रीय स्तर पर उनके जनाधार के संकेत के तौर पर देखा जाता है.
गांधीनगर में घोषित 28 सीटों के नतीजों के मुताबिक बीजेपी ने 23 सीटें जीत ली थीं, जबिक कांग्रेस को 5 सीटों पर सफलता मिली. बाकी सीटों पर काउंटिंग जारी थी. बीजेपी ने उन चार सीटों पर दोबारा गिनती की मांग की है जहां कांग्रेस प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी. ऐसे में अंतिम परिणामो के लिए शेष मतगणना और पुनर्गणना से जुड़ी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी है.
गांधीनगर नगर निगम में क्या है चुनावी स्थिति?
गांधीनगर नगर निगम में कुल 44 सीटें हैं. यहां 11 वार्डों की सभी सीटों के लिए चुनाव कराया गया था. शुरुआती परिणामों में बीजेपी ने स्पष्ट बढ़त बनाई और कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही. आम आदमी पार्टी को शुरुआती नतीजों में कोई सीट नहीं मिली थी.
गांधीनगर गुजरात की राजधानी है. इसलिए यहां के नगर निगम चुनाव को केवल स्थानीय प्रशासन के चुनाव के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि इसे राजनीतिक दलों की संगठनात्मक ताकत और मतदाताओं के रुझान के आकलन का एक अवसर माना जाता है.
इस बार बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच मुकाबला था. बीजेपी पिछले पांच वर्षों से नगर निगम की सत्ता में थी. ऐसे में पार्टी के सामने अपना पुरानना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती थी, जबकि कांग्रेस और AAP की कोशिश निगम में अपनी स्थिति मजबूत करने की थी.
हालांकि, शुरुआती परिणामों के आधार पर पूरे गुजरात के राजनीतिक रुझान के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी.
2021 के चुनाव में बीजेपी ने जीती थीं 41 सीटें
गांधीनगर नगर निगम में पिछली बार अक्टूबर 2021 में चुनाव हुए थे. उस चुनाव में बीजेपी ने 44 में 41 सीट पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस सिर्प दो सीटों पर सिमट गई थी. जबकि आम आदमी पार्टी ने एक सीट पर कब्जा जमाया था.
इस बार के चुनाव में भी बीजेपी शुरुआती नतीजों में आगे दिखाई दी. घोषित 28 सीटों में से 23 पर जीत हासिल करना पार्टी के लिए अहम बढ़त रहा. हालांकि, अंतिम परिणामों की पुष्टि के बाद ही यह साफ होगा कि बीजेपी ने 2021 के अपने प्रदर्शन के मुकाबले कितनी सीटें हासिल कीं.
पिछले चुनाव में बीजेपी के भारी बहुमत के कारण निगम में उसका दबदबा रहा था. इस बार भी पार्टी अपनी स्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रही है. दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए सीटों की संख्या बढा़ना और आप के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराना अहम चुनौती रहेगा.
गांधीनगर में कितने उम्मीदवार और कितने मतदाता?
गांधीनगर नगर निगम की सभी 44 सीटों के लिए कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे. नगर निगम क्षेत्र में लगभग 2.59 लाख मतदाता हैं. सभी 11 वार्डों में मतदान के बाद ईवीएम के जरिए मतगणना की गई.
राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, गांधीनगर में 59.25 प्रतिशत मतदान हुआ. यानी मतदाताओं के एक हिस्से ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जबकि बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचे.
मतदान प्रतिशत चुनावी विश्लेषण का एक महत्वपूर्ण पहलू होता है, लेकिन केवल इसके आधार पर किसी पार्टी की जीत या हार का कारण तय नहीं किया जा सकता. इसके लिए वार्डवार नतीजों, पिछले चुनावों के आंकड़ों, उम्मीदवारों और स्थानीय मुद्दों का विश्लेषण भी जरूरी है.
ओखा नगरपालिका में क्या है मुकाबला?
देवभूमि द्वारका जिले की ओखा नगरपालिका में भी मतगणना जारी है. यहां नौ वार्डों की कुल 32 सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया हुई थी. इनमें से चार सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे. शेष सीटों के लिए 75 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे.
ओखा में 63.27 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. यह गांधीनगर के 59.25 प्रतिशत मतदान से अधिक है, लेकिन थारा की तुलना में कम है.
ओखा नगरपालिका के परिणाम स्थानीय स्तर पर राजनीतिक दलों की स्थिति को समझने में मदद करेंगे. यहां वार्डों में जीत का अंतर, उम्मीदवारों का प्रदर्शन और स्थानीय मुद्दों की भूमिका चुनावी नतीजों को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगी.
निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी सीटों पर मतगणना पूरी होने के बाद ही नगरपालिका की राजनीतिक तस्वीर स्पष्ट होगी.
थारा नगरपालिका में सबसे ज्यादा मतदान
बनासकांठा जिले की थारा नगरपालिका में छह वार्डों की 24 सीटों के लिए चुनाव हुआ था. यहां 59 उम्मीदवार मैदान में थे. राज्य चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, थारा में 81.18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
तीनों प्रमुख निकायों में थारा का मतदान प्रतिशत सबसे अधिक रहा. इसकी तुलना में गांधीनगर में 59.25 प्रतिशत और ओखा में 63.27 प्रतिशत मतदान हुआ.
हालांकि, अधिक मतदान का मतलब अपने आप किसी खास पार्टी के पक्ष में लहर होना नहीं है. ज्यादा मतदान के पीछे स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, मतदाताओं की भागीदारी और चुनावी प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारण हो सकते हैं.
थारा के अंतिम नतीजों से पता चलेगा कि छह वार्डों में किस पार्टी ने कितनी सीटें हासिल कीं और वहां स्थानीय राजनीतिक समीकरण किस दिशा में गए.
अन्य नगरपालिकाओं और पंचायतों में भी उपचुनाव
गुजरात में चुनावी गतिविधियां केवल गांधीनगर, ओखा और थारा तक सीमित नहीं थीं. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जिला पंचायतों और तालुका पंचायतों की विभिन्न सीटों पर भी चुनाव हुए.
इसके अलावा खेरालु, छोटा उदेपुर और बायड नगरपालिकाओं में एक-एक सीट के लिए उपचुनाव कराया गया. इन सीटों पर भी मतगणना जारी थी.
स्थानीय निकायों के उपचुनाव आमतौर पर किसी सीट के रिक्त होने के बाद कराए जाते हैं. इनके नतीजे संबंधित क्षेत्र में राजनीतिक दलों की स्थिति और स्थानीय नेतृत्व की लोकप्रियता का संकेत दे सकते हैं. हालांकि, एक या कुछ सीटों के परिणामों को पूरे राज्य के जनमत का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा.
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव क्यों हैं महत्वपूर्ण?
स्थानीय निकाय सीधे नागरिकों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े होते हैं. नगर निगम और नगरपालिकाएं सड़क, सफाई, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन और शहरी सुविधाओं जैसे विषयों पर काम करती हैं. इसलिए इन चुनावों में स्थानीय समस्याएं और प्रशासनिक प्रदर्शन अहम भूमिका निभा सकते हैं.
राजनीतिक दलों के लिए भी ऐसे चुनाव महत्वपूर्ण होते हैं. इनके जरिए उन्हें अपने संगठन की सक्रियता, स्थानीय नेताओं की स्वीकार्यता और मतदाताओं के साथ जुड़ाव का आकलन करने का मौका मिलता है.
गांधीनगर जैसे महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र में बीजेपी की शुरुआती बढ़त पार्टी के लिए उत्साहजनक संकेत थी. वहीं, कांग्रेस की पांच सीटों पर जीत यह दिखाती है कि शुरुआती नतीजों में उसे भी प्रतिनिधित्व मिला. AAP के लिए शुरुआती परिणाम चुनौतीपूर्ण रहे.
लेकिन इन परिणामों को राज्यव्यापी राजनीतिक बदलाव का प्रमाण मानने से पहले अंतिम नतीजों और दूसरे क्षेत्रों के प्रदर्शन को देखना जरूरी होगा.
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एआई ने बढ़ाई लागत, जोहो कर्मचारियों को इस वर्ष सामान्य वेतन वृद्धि देना संभव नहीं: श्रीधर वेम्बू
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो के मुख्य वैज्ञानिक और सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने मंगलवार को कहा कि कंपनी ने बढ़ती लागत और अनिश्चित कारोबारी परिस्थितियों के कारण इस वर्ष कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि (पे-हाइक) नहीं करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि कंपनी ने अपने मार्केटिंग बजट में भी कटौती की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में वेम्बु ने कहा कि सॉफ्टवेयर उद्योग का कारोबारी परिदृश्य अनिश्चित बना हुआ है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग ने लागत में भारी वृद्धि कर दी है।
उन्होंने बताया कि डेटा सेंटरों के लिए आवश्यक सर्वर की कीमतों में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। साथ ही एआई का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे परिचालन खर्च में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी कारोबार के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
वेम्बु ने कहा, हमने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। हमने कर्मचारियों को भी बताया है कि इस वर्ष सामान्य वेतन वृद्धि देना संभव नहीं होगा। मैं इसे टाल नहीं पाने के लिए उनसे माफी मांगता हूं।
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी, लेकिन सॉफ्टवेयर उद्योग में रोजगार का दृष्टिकोण फिलहाल चुनौतीपूर्ण दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि जोहो ने पिछले 18 महीनों से कर्मचारी संख्या में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की है।
वेम्बु ने बताया कि अधिकांश कर्मचारी मौजूदा परिस्थितियों को समझते हैं और इसके लिए उन्होंने उनका आभार भी व्यक्त किया।
उन्होंने कहा, हम खुद को नए सिरे से तैयार करने की प्रक्रिया में हैं। अगले 3 से 5 वर्ष तय करेंगे कि हमारा यह बदलाव कितना सफल रहा।
गौरतलब है कि इसी वर्ष मई में श्रीधर वेम्बु ने एआई को लेकर तकनीकी कंपनियों के बढ़ते वैल्यूएशन पर भी चिंता जताई थी। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर निवेशकों का उत्साह कई बड़ी टेक कंपनियों के मूल्यांकन को ऐसे स्तर तक ले गया है, जिसमें डॉट-कॉम बुलबुले जैसी स्थितियां दिखाई देती हैं।
उन्होंने उस समय एनवीडिया, एप्पल, अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा प्लेटफॉर्म्स और माइक्रोन टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियों का उल्लेख करते हुए कहा था कि इनमें से कई कंपनियां अपने वार्षिक राजस्व की तुलना में बहुत ऊंचे मूल्यांकन पर कारोबार कर रही हैं।
वेम्बु ने डॉट-कॉम दौर के बाद दिए गए स्कॉट मैकनीली के एक बयान का भी हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि यदि निवेशक किसी कंपनी के वार्षिक राजस्व के दस गुना मूल्य पर निवेश करते हैं, तो उस मूल्यांकन को उचित साबित करने के लिए कंपनी को लंबे समय तक असाधारण प्रदर्शन करना होगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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