गोल्ड ETF में निवेश 1 साल में 540% बढ़ा:नेट AUM ₹1.84 लाख करोड़ पहुंचा; जानें क्यों बढ़ रहा लोगों का गोल्ड ETF की तरफ रुझान?
पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी के बीच भारतीय निवेशकों का रुझान डिजिटल गोल्ड की तरफ तेजी से बढ़ा है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 31 जनवरी 2026 तक गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) का नेट एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना से भी ज्यादा हो गया है। सिर्फ जनवरी महीने में ही गोल्ड ETF में ₹24,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया है। AMFI के लेटेस्ट डेटा के अनुसार, जनवरी 2026 के दौरान गोल्ड ETF में 24,039.96 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। अगर इसकी तुलना एक साल पहले यानी जनवरी 2025 से करें, तो तब यह आंकड़ा सिर्फ 3,751.42 करोड़ रुपए था। यानी एक साल में मंथली इनफ्लो में 540.82% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दिसंबर 2025 (₹11,646 करोड़) के मुकाबले भी निवेश में 106% की बढ़त दर्ज की गई है। गोल्ड ETF का नेट AUM ₹1.84 लाख करोड़ पहुंचा निवेशकों के बढ़ते भरोसे के कारण गोल्ड ईटीएफ में नेट एसेट अंडर मैनेजमेंट (गोल्ड ETF नेट AUM) भी तेजी से बढ़ा है। 31 जनवरी 2026 को यह आंकड़ा 1,84,276.96 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। एक साल पहले 31 जनवरी 2025 को नेट AUM ₹51,839 करोड़ था, यानी तब के मुकाबले इसमें 255% की ग्रोथ हुई है। वहीं एक महीने पहले 31 दिसंबर 2025 को यह ₹1,27,896 करोड़ था, यानी 44% की ग्रोथ हुई। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि लोग अब फिजिकल सोने के बजाय पेपर गोल्ड या डिजिटल तरीके से सोने में निवेश करना सुरक्षित और आसान मान रहे हैं। फिजिकल गोल्ड की कीमतों में 100% तक की तेजी मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि गोल्ड ETF में इस बढ़ते निवेश की सबसे बड़ी वजह फिजिकल गोल्ड की कीमतें हैं। पिछले एक साल में सोने के दाम 90% से 100% तक बढ़ चुके हैं। 29 जनवरी 2026 को 24 कैरेट गोल्ड ने 1,76,121 रुपए प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था। जब कीमतें इतनी तेजी से बढ़ती हैं, तो निवेशक रिटर्न की उम्मीद में गोल्ड फंड्स की ओर रुख करते हैं। एवरेज नेट AUM में भी 213% का उछाल महीने भर के दौरान फंड के एवरेज नेट AUM में भी बढ़त देखी गई है। जनवरी 2026 में यह ₹1,50,380.66 करोड़ रहा। पिछले साल जनवरी 2025 में यह महज ₹47,940.63 करोड़ था। यानी इसमें साल-दर-साल के आधार पर 213.68% की बढ़त हुई है। क्यों बढ़ रहा है गोल्ड ETF की तरफ रुझान? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिजिकल गोल्ड के मुकाबले गोल्ड ETF के कई फायदे हैं… सुरक्षा: इसमें चोरी का डर नहीं होता क्योंकि यह डीमैट फॉर्म में रहता है। शुद्धता: शुद्धता की चिंता नहीं रहती, क्योंकि यह इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के गोल्ड पर बेस्ड होता है। लिक्विडिटी: इसे शेयर बाजार के समय कभी भी खरीदा या बेचा जा सकता है। मेकिंग चार्ज नहीं: फिजिकल ज्वेलरी की तरह इसमें मेकिंग चार्ज या लॉकर का खर्च नहीं देना पड़ता। क्या होता है गोल्ड ETF? एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। एक गोल्ड ETF यूनिट का मतलब है कि 1 ग्राम सोना। वह भी पूरी तरह से प्योर। गोल्ड ETFs की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। गोल्ड ETF में निवेश करने के 5 फायदे इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? गोल्ड ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध गोल्ड ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद गोल्ड ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही गोल्ड ETF को बेचा जाता है। सोने में सीमित निवेश फायदेमंद एक्सपर्ट के अनुसार, भले ही आपको सोने में निवेश करना पसंद हो तब भी आपको इसमें सीमित निवेश ही करना चाहिए। कुल पोर्टफोलियो का सिर्फ 10 से 15% ही सोने में निवेश करना चाहिए। किसी संकट के दौर में सोने में निवेश आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता दे सकता है, लेकिन लंबी अवधि में यह आपके पोर्टफोलियो के रिटर्न को कम कर सकता है। ये खबर भी पढ़ें… EPFO मार्च-अप्रैल में नया मोबाइल एप लॉन्च करेगी: इसके जरिए UPI से PF का पैसा निकाल सकेंगे, अभी एप का ट्रायल चल रहा एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) के मेंबर्स अब जल्द ही नए मोबाइल एप के जरिए UPI से PF का पैसा निकाल सकेंगे। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, EPFO यह एप मार्च-अप्रैल 2026 में लॉन्च कर सकती है। अभी इसका ट्रायल चल रहा है और टेक्निकल गड़बड़ियां दूर की जा रही हैं। नया EPFO एप, UMANG एप से अलग होगा। यह एप सब्सक्राइबर के बैंक अकाउंट से लिंक रहेगा। इसके अलावा यह BHIM एप और दूसरे UPI एप्स से भी लिंक होगा। जिससे मेंबर्स को PF का पैसा UPI के जरिए सीधे बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी जांच एजेंसी से बात कर रही अडाणी एंटरप्राइजेज:घूसखोरी की जांच में अमेरिकी सरकार ने जानकारी मांगी; ₹2,029 करोड़ की रिश्वत देने का आरोप
अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज ने मंगलवार को बताया कि वह अमेरिकी जांच एजेंसी 'ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स' (OFAC) के साथ बातचीत कर रही है। यह मामला पिछले साल जून में 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) में छपी एक रिपोर्ट से जुड़ा है। जिसमें दावा किया गया था कि अरबपति गौतम अडाणी अपने ऊपर लगे घूसखोरी के आरोपों को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन से संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। दरअसल अडाणी ग्रुप पर अमेरिका में 2,029 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप है। अमेरिका में धोखाधड़ी के आरोप पिछले साल अमेरिका में अडाणी समेत 8 लोगों पर अरबों रुपए की धोखाधड़ी के आरोप लगे थे।अटॉर्नी ऑफिस आरोप पत्र के मुताबिक, अडाणी की कंपनी ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के प्रोजेक्ट गलत तरीके से हासिल किए थे। इसके लिए सरकारी अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर यानी करीब 2,029 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप अडाणी पर लगाया गया था।आरोपियों ने अमेरिकी इन्वेस्टर्स और बैंकों से झूठ बोलकर पैसा इकट्ठा किया। यह पूरा मामला अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य फर्म से जुड़ा हुआ था। 24 अक्टूबर 2024 को न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट में यह केस दर्ज हुआ था। अमेरिकी एजेंसी ने 4 फरवरी को मांगी जानकारी अडाणी एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसे 4 फरवरी को अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स से एक 'रिक्वेस्ट फॉर इंफॉर्मेशन' (RFI) यानी जानकारी मांगने का पत्र मिला है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी के साथ उनकी बातचीत चल रही है। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि अब तक की बातचीत या पत्रों में उनके खिलाफ किसी भी तरह की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की बात सामने नहीं आई है। रिश्वतखोरी के आरोपों को हटवाने की कोशिश इस विवाद की जड़ पिछले साल जून में छपी वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि गौतम अडाणी अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर उन रिश्वतखोरी के आरोपों को हटवाने की कोशिश कर रहे हैं, जो अमेरिका में उनके खिलाफ दर्ज हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ग्रुप की कोशिश थी कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन इन आरोपों को खारिज करने में मदद करे। अब अमेरिकी एजेंसियां इसी सिलसिले में कंपनी से डेटा और जानकारी इकट्ठा कर रही हैं। कंपनी का पक्ष- कोई गलती नहीं पाई गई अडाणी एंटरप्राइजेज ने BSE को बताया कि अमेरिकी एजेंसी के साथ उनका कम्युनिकेशन सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। कंपनी ने बयान में कहा, जांच एजेंसी की ओर से जो पत्र मिला है, उसमें अब तक किसी भी तरह के नियमों के उल्लंघन या किसी गलत काम की पुष्टि नहीं हुई है। कंपनी का कहना है कि वे अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और पारदर्शिता बरत रहे हैं। जैसे ही कंपनी ने अमेरिकी एजेंसी के साथ हो रही इस बातचीत का खुलासा किया, बाजार में अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान 3.5% तक गिर गए।
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