Could Cuba's government fall under Trump? | The Global Story
The US and Cuba have for decades had a troubled relationship, with the former imposing sanctions and travel restrictions on its close Caribbean neighbour. Now, in its attack on Venezuela, and the capture of president Nicolas Maduro, the US has dealt Cuba a blow so significant that President Trump has warned the socialist state is, “ready to fall”. BBC Central America and Cuba correspondent Will Grant speaks to Asma Khalid. He explains the deeply intertwined relationship between Venezuela and Cuba, and how Havana’s government plans to stand up to Trump. New episodes of The Global Story are released daily. If you’re in the UK, listen on BBC Sounds. If you live outside the UK, listen on BBC.com or wherever you get your podcasts. LINK: https://app.magellan.ai/listen_links/the-global-story-ytl Subscribe here: http://bit.ly/1rbfUog For more news, analysis and features visit: www.bbc.com/news #bbcnews #cuba #trump Chapters: 00:00 Introduction 01:05 Why does Trump have a problem with Cuba? 02:28 Cuba’s connections to Venezuela 07:54 How much oil does Cuba get from Venezuela? 11:54 When Obama went to Cuba 14:00 Mark Rubio’s involvement 17:00 What is Trump’s goal with Cuba? 20:00 What do people in Cuba think?
अमेरिकी संसद में H-1B वीजा खत्म करने वाला बिल पेश:2027 तक बंद करने का टारगेट; भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर होगा
अमेरिकी संसद में H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह खत्म करने के लिए एक बिल लाया गया है। फ्लोरिडा से रिपब्लिकन सांसद ग्रेग स्ट्यूबे ने इसे स्थानीय समयानुसार सोमवार को पेश किया। इस बिल को ‘एंडिंग एक्सप्लॉइटेटिव इम्पोर्टेड लेबर एग्जेम्प्शंस एक्ट’ यानी EXILE एक्ट नाम दिया गया है। इसके जरिए इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट में संशोधन कर H-1B वीजा प्रोग्राम को 2027 तक समाप्त करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह बिल ऐसे समय में लाया गया है, जब अमेरिका पहले से ही H-1B और H-4 वीजा को लेकर जांच और सख्ती बढ़ा चुका है। अगर बिल पास हुआ तो इसका सबसे ज्यादा असर अमेरिका जाने वाले भारतीयों पर पड़ेगा। सांसद का आरोप- H1-B वीजा से अमेरिकी लोगों को नुकसान सांसद ग्रेग स्ट्यूबे ने H-1B वीजा का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को नुकसान पहुंचा है। सांसद ने कहा कि H-1B वीजा प्रोग्राम के कारण अमेरिकी कामगार और युवा लगातार विस्थापित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, यह प्रोग्राम कॉर्पोरेट कंपनियों और विदेशी प्रतिस्पर्धियों को फायदा पहुंचाता है, जबकि घरेलू वर्कफोर्स को नुकसान होता है। बिल के समर्थन में कहा गया है कि H-1B वीजा की वजह से कई अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी गंवानी पड़ी। दावा किया गया कि 2025 में 9 हजार से ज्यादा H-1B वीजा मंजूर होने के बाद माइक्रोसॉफ्ट के 16 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को हटाया गया। बिल पास हुआ तो भारतीय प्रोफेशनल्स पर सीधा असर H-1B वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय प्रोफेशनल्स अमेरिका में काम और रहने के लिए करते हैं। आधिकारिक दावे के मुताबिक, H-1B वीजा पाने वालों में 70% से ज्यादा भारतीय हैं और इनमें बड़ी संख्या युवा कर्मचारियों की है। इस वजह से संसद में पेश इस बिल का असर सीधे तौर पर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है। बिल को पास होने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा H-1B वीजा खत्म करने से जुड़ा यह बिल फिलहाल अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है। अभी इस पर न तो बहस हुई है और न ही वोटिंग की कोई समयसीमा तय की गई है। बिल को अब संबंधित हाउस कमेटी के पास भेजा जाएगा। कमेटी यह फैसला करेगी कि इस पर औपचारिक सुनवाई होगी या नहीं। अगर कमेटी से बिल को मंजूरी मिलती है, तो इसे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में चर्चा के लिए लाया जाएगा। चर्चा के बाद सदन में इस पर वोटिंग होगी। हाउस से पास होने के बाद बिल अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में जाएगा। वहां भी इसी तरह चर्चा और वोटिंग की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद ही यह बिल राष्ट्रपति के पास जाएगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद ही यह प्रस्ताव कानून का रूप ले सकेगा। अमेरिकी संसदीय प्रक्रिया के जानकारों के मुताबिक, किसी भी बिल को कानून बनने में कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। अमेरिकी सरकार ने H-1B वीजा फीस बढ़ाई ट्रम्प सरकार ने पिछले साल 21 सितंबर से H-1B वीजा फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर (करीब 88 लाख रुपए) कर दी है। व्हाइट हाउस के मुताबिक यह बढ़ी हुई फीस सिर्फ वन टाइम है, जो एप्लिकेशन देते समय चुकानी होगी। H-1B वीजा के लिए पहले 5.5 से 6.7 लाख रुपए लगते थे। यह 3 साल के लिए मान्य होता था। इसे दोबारा फीस देकर अगले 3 साल के लिए रिन्यू किया जा सकता था। यानी अमेरिका में 6 साल रहने के लिए H-1B वीजा का कुल खर्च 11 से 13 लाख रुपए के करीब बैठता था। H-1B और H-4 वीजा पर जांच पहले से सख्त अमेरिकी विदेश विभाग ने 15 दिसंबर से H-1B और उससे जुड़े H-4 वीजा पर अतिरिक्त जांच शुरू कर दी है। इसके तहत वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया प्रोफाइल की भी जांच की जा रही है। इस गाइडलाइन के बाद भारत में H-1B वीजा इंटरव्यू टल गए हैं। कई इंटरव्यू महीनों आगे बढ़ा दिए गए, जिससे वीजा स्टैंपिंग के लिए भारत आए कई लोग फंस गए हैं।
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