48 घंटे के बाद फिर बदलेगा मध्य प्रदेश का मौसम, 15-16 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में रात में ठंडक
दशहरे से पहले एक बार फिर मध्य प्रदेश के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवातीय परिसंचरण के असर से 15 और 16 अक्टूबर ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग के 9 जिलों में बादल छाने के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है। इन 9 जिलों में ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर शामिल है।
फिलहाल 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहेगा, हालांकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई शहरों में दिन में धूप और रात में ठंडक बनी रहेगी। 20-25 अक्टूबर से तापमान में गिरावट के साथ रात में ठंड और बढ़ने की संभावना है। अक्टूबर अंत से प्रदेश में ठंड की दस्तक होने का अनुमान है।
मौसम विभाग की मानें तो 13 अक्टूबर के आसपास दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है, इससे मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा। हालांकि मानसून के बाद होने वाली बारिश बोनस मानी जाएगी। इस बार मानसून 24 जून से 3 अक्टूबर 2026 यानि 100 दिन सक्रिय रहा। इस दौरान 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच (95.9%) बारिश दर्ज हुई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिलीमीटर ) होनी चाहिए थी।
मानसूनी सीजन में इस बार प्रदेश में करीब 4% या 1.5 इंच बारिश कम हुई। हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश में 4% ज्यादा पानी गिरा, लेकिन पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से 12% कम बारिश हुई।आलीराजपुर बारिश के मामले में सबसे पीछे रहा। निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश दर्ज हुई। भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
इसके अलावा जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में आंकड़ा 4% ज्यादा रहा लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में भी औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई ।
Maa Chandraghanta ki Aarti Lyrics: तीसरे नवरात्रि पर आज पढ़ें चंद्रघंटा माता की आरती
Shardiya Navratri Third Day: आज यानी 13 अक्टूबर 2026 को मंगलवार के दिन आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है. इस दिन शारदीय नवरात्रि 2026 का तृतीया उपवास भी है. तीसरा नवरात्र मां चंद्रघंटा को समर्पित होता है. आपको आज दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप की उपासना करनी है. चंद्रघंटा माता का पूजन करने से भक्त को शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत मिलती है. दुर्गा मां का यह स्वरूप शिव-पार्वती विवाह के बाद वाला स्वरूप है. माता चंद्रघंटा 10 भुजाओं वाली माता है, जिनके हाथ में त्रिशूल, गदा, धनुष, बाण, तलवार, कमल, घंटा, रुद्राक्ष माला और कमंडल रहता है. कहते हैं कि उनकी पूजा करते समय हमें आरती का पाठ अवश्य करना चाहिए. चलिए यहां पढ़ते हैं लिरिक्स.
चंद्रघंटा माता की पूजन विधि (Maa Chandraghanta Pujan Vidhi)
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने का विधान बताया जाता है. सुबह उठने के पश्चात स्नान आदि करें और लाल वस्त्र धारण करें. इसके बाद पूजा स्थान की सफाई करें. मां चंद्रघंटा को लाल और पीले फूल अर्पित करें. उसके बाद रोली और अक्षत से तिलक करें. देवी मां की प्रतिमा के सामने दीया और धूप जलाएं. फल और मिठाई का प्रसाद चढ़ाएं. मां चंद्रघंटा को भोग लगाने के साथ ही पूजा के दौरान मंत्रों का भी जाप करें. पूजा संपन्न होने के बाद अंत में माता चंद्रघंटा की आरती करें.
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मां चंद्रघंटा का पूजा मंत्र
मंत्र
ऊं देवी चंद्रघंटायै नम:
चंद्रघंटा माता की स्तुति
पिंडज प्रवरारूढा, चंडकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं, चंद्रघंटेति विश्रुता।।
चंद्रघंटा माता की आरती (Chandraghanta Mata Ki Aarti)
जय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम। पूर्ण कीजो मेरे काम॥
चन्द्र समाज तू शीतल दाती। चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
मन की मालक मन भाती हो। चन्द्रघण्टा तुम वर दाती हो॥
सुन्दर भाव को लाने वाली। हर संकट में बचाने वाली॥
हर बुधवार जो तुझे ध्याये। श्रद्धा सहित जो विनय सुनाये॥
मूर्ति चन्द्र आकार बनाये। सन्मुख घी की ज्योत जलाये॥
शीश झुका कहे मन की बाता। पूर्ण आस करो जगत दाता॥
कांचीपुर स्थान तुम्हारा। कर्नाटिका में मान तुम्हारा॥
नाम तेरा रटू महारानी। भक्त की रक्षा करो भवानी॥
चंद्रघंटा माता का प्रिय भोग
माता चंद्रघंटा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रसन्न करना जरूरी होता है. उन्हें मिठाइयों और फलों का भोग लगा सकते हैं. उन्हें दूध से बनी मिठाइयों का प्रसाद चढ़ाएं. मखाने की खीर का भोग चंद्रघंटा माता को अतिप्रयि होता है.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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