दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों से कैसे निपट रही BJP और मोदी सरकार?
दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच बीजेपी और केंद्र सरकार दोहरी रणनीति पर काम कर रही है. एक ओर पार्टी छात्रों और युवाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर दिल्ली में कथित अराजकता के मुद्दे पर कांग्रेस, राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी को घेरने की तैयारी में है.
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World Economic Outlook | सुस्ती के दौर में भी 'सुपरफ़ास्ट' भारतीय अर्थव्यवस्था! IMF ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने कमजोर वैश्विक आर्थिक स्थितियों के बीच वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत की ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। इससे पहले विश्व बैंक (World Bank) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी अपने अनुमानों में संशोधन करते हुए FY27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1% रहने की उम्मीद जताई थी। आईएमएफ के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर का शानदार प्रदर्शन भारतीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रहा है। हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर आईएमएफ ने चेताया है कि वैश्विक मजबूती अब कमजोर और असमान होती जा रही है।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने यह भी कहा कि ग्लोबल इकोनॉमी मज़बूत बनी हुई है, लेकिन यह मज़बूती अब कमज़ोर और असमान होती जा रही है।
IMF ने भारत की ग्रोथ का अनुमान क्यों बढ़ाया है?
IMF का मानना है कि भारत की आर्थिक संभावनाओं में सुधार हुआ है। इसके कई अहम कारण हैं:
मज़बूत घरेलू बाज़ार: देश में खपत और मांग आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे रहे हैं।
सर्विस सेक्टर में ग्रोथ: सर्विस से जुड़ी गतिविधियां ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रही हैं।
अनुकूल डेमोग्राफिक्स: भारत की युवा आबादी लंबे समय की आर्थिक ग्रोथ की संभावना को बढ़ाती है।
स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स: चल रहे आर्थिक सुधारों से ग्रोथ की संभावना मज़बूत होने की उम्मीद है।
IMF के अनुसार, भारत उन उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिनकी आर्थिक संभावनाओं में सुधार हुआ है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक: वैश्विक विकास दर के अनुमान का विश्लेषण
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के ताज़ा 'वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक' आंकड़ों के अनुसार, जहां दुनिया भर में आर्थिक सुस्ती का दौर देखा जा रहा है, वहीं भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
वैश्विक स्तर पर, विश्व उत्पादन (World Output) की विकास दर 2025 में 3.5% रहने के बाद 2026 में घटकर 3.1% और 2027 में थोड़ा सुधरकर 3.4% रहने का अनुमान जताया गया है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ रेट और भी धीमी रहने की संभावना है, जो 2025 में 2.0% से घटकर 2027 तक 1.8% पर आ सकती है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था इस दौरान लगातार 2.3% की स्थिर दर से आगे बढ़ेगी, जबकि चीन की आर्थिक वृद्धि दर में लगातार गिरावट का अनुमान है, जो 2025 के 5.0% से घटकर 2026 में 4.5% और 2027 में 4.0% पर आ जाएगी।
दूसरी ओर, भारत 2025 में 7.8% की शानदार ग्रोथ दर्ज करने के बाद, 2026 और 2027 दोनों वित्तीय वर्षों में लगातार 7.0% की मजबूत विकास दर बनाए रखेगा। यह आंकड़ा चीन सहित दुनिया की अन्य सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं जैसे ब्रिटेन (1.2%-1.3%), रूस (0.9%-1.0%) और ब्राजील (1.9%-2.3%) की तुलना में कहीं अधिक है, जो यह दर्शाता है कि कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में बनी हुई है।
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