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भास्कर अपडेट्स:इंडियन आर्मी ने डिफेंस फोर्सेज के लिए भारत राइस लॉन्च किया, सैनिकों के मिले फीडबैक के बाद तैयार हुआ

इंडियन आर्मी ने सोमवार को डिफेंस फोर्सेज़ के लिए भारत राइस लॉन्च किया। यह एक बढ़िया क्वालिटी का चावल है, जिसका मकसद राशन की क्वालिटी को बेहतर बनाना है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सप्लाईज एंड ट्रांसपोर्ट की अगुवाई में, यह पहल सैनिकों से लगातार मिल रहे फीडबैक पर आधारित है। चावल को तय डिफेंस स्पेसिफिकेशन्स के हिसाब से मिल किया जाएगा और फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के दौरान NAFED के जरिए सप्लाई किया जाएगा। डिफेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि इसकी जरूरी क्वालिटी-कंट्रोल चेकिंग की जाएगी और यह बाहरी चीजों और गंदगी से मुक्त होगा, साथ ही इसमें कम से कम टूटे, खराब और रंगहीन दाने होंगे। आज की बाकी बड़ी खबरें… IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने स्वदेशी तेजस में आखिरी बार उड़ान भरी IAF चीफ एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह, जो इस महीने के आखिर में रिटायर होने वाले हैं, ने स्वदेशी तेजस में अपनी आखिरी फाइटर जेट सॉर्टी भरी। देर रात X पर किए गए एक पोस्ट में, भारतीय वायु सेना ने कहा कि जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर 'एक्सरसाइज तरंग शक्ति' के दौरान भरी गई यह सॉर्टी एक ऐसे फाइटर पायलट की भावना को दिखाती है, जिसने हमेशा आगे रहकर नेतृत्व करने में विश्वास किया है। वायु सेना ने उनकी सॉर्टी का एक वीडियो और एक्सरसाइज के दौरान मित्र देशों के विमानों और सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के साथ उड़ान भरते हुए उनकी तस्वीरें भी शेयर कीं। सिंह 31 अक्टूबर को रिटायर हो रहे हैं।

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फिजिकल हेल्थ- दुनिया भर में बढ़ रहे ‘गाउट’ के केस:पुरुषों को रिस्क ज्यादा, डॉक्टर से जानें इस बीमारी को कैसे पहचानें, कैसे बचें

पहले के समय में गाउट को ‘राजाओं की बीमारी’ कहा जाता था, क्योंकि इसे अमीर लोगों की डाइट और शराब पीने से जुड़ी बीमारी माना जाता था। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक, गाउट सिर्फ खानपान से होने वाली बीमारी नहीं है। यह एक तरह का इंफ्लेमेटरी अर्थराइटिस है, जिसमें ब्लड में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ने पर उसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो जाते हैं। इससे अचानक तेज दर्द के साथ गाउट का अटैक हो सकता है। ‘द लैंसेट रेह्यूमेटोलॉजी’ में पब्लिश ‘ग्लोबल बर्डन डिजीज 2021’ के मुताबिक, साल 2020 में दुनिया में 5.58 करोड़ लोग गाउट से प्रभावित थे। 1990 के मुकाबले मामलों की संख्या 150.6% बढ़ी है। 2050 तक दुनिया में गाउट के मामलों की संख्या 9.58 करोड़ पहुंचने का अनुमान है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में गाउट के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. मुजाहिद सलीम, सीनियर कंसल्टेंट, ऑर्थोपेडिक एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर सवाल- गाउट क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- गाउट और सामान्य गठिया में क्या अंतर है? जवाब- गाउट और गठिया दोनों में जोड़ों में दर्द हो सकता है। लेकिन दोनों की वजह और दर्द का पैटर्न अलग होता है। ग्राफिक में इनके बीच का अंतर देखिए- सवाल- गाउट क्यों होता है? जवाब- इसकी मूल वजह शरीर में यूरिक एसिड का संतुलन बिगड़ना है। ऐसा दो कारणों से हो सकता है। शरीर जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनाने लगे या किडनी उसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए। ग्राफिक में गाउट के सभी कारण देखिए- सवाल- जिसका भी यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, क्या उसे गाउट होता ही है? जवाब- नहीं, जिसका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, उसे गाउट हो ही जाए, यह जरूरी नहीं है। कई लोगों का यूरिक एसिड सालों तक सामान्य से ज्यादा रह सकता है। लेकिन उनमें कभी गाउट के लक्षण नहीं दिखते। इसे ‘असिम्प्टोमैटिक हाइपरयूरिसीमिया’ कहते हैं। सवाल- यूरिक एसिड क्या है, इसका शरीर में क्या काम है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- बढ़े हुए यूरिक एसिड लेवल से गाउट कैसे होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या गाउट एक गंभीर बीमारी है? जवाब- हां, लंबे समय तक यूरिक एसिड का स्तर बढ़ा रहने पर जोड़ों में स्थायी नुकसान, गांठें (टोफी) और किडनी से जुड़े कॉप्लिकेशंस हो सकते हैं। सवाल- गाउट के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- गाउट का शुरुआती अटैक अक्सर अचानक शुरू होता है और ज्यादातर रात में दिखाई देता है। ग्राफिक में गाउट के सभी लक्षण देखिए- सवाल- शरीर के कौन से अंग या जॉइंट्स इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं? जवाब- पैर के अंगूठे का जोड़ गाउट अटैक की सबसे कॉमन जगह है। समय के साथ बीमारी बढ़ने पर टखने, घुटने, पैर की उंगलियों के साथ हाथों की उंगलियां, कलाई और कोहनी भी प्रभावित हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- हमारी डेली लाइफ की कौन-सी आदतें गाउट का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- कम फिजिकल एक्टिविटी, खराब खानपान और ज्यादा वजन जैसी चीजें धीरे-धीरे यूरिक एसिड के लेवल को प्रभावित करती हैं। इससे गाउट का रिस्क बढ़ता है। ग्राफिक में गाउट का रिस्क बढ़ाने वाली सभी आदतें देखिए- सवाल- किन लोगों में गाउट का रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- यह महिलाओं की तुलना में पुरुषों में लगभग तीन गुना ज्यादा देखा जाता है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। इसलिए मेनोपॉज से पहले उनमें गाउट अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि मेनोपॉज के बाद इसका रिस्क बढ़ जाता है। किन्हें ज्यादा रिस्क है, ग्राफिक में देखिए- सवाल- कौन-से फूड आइटम्स यूरिक एसिड बढ़ा सकते हैं? जवाब- जिन फूड आइटम्स में प्यूरीन की मात्रा ज्यादा होती है, उनसे यूरिक एसिड बढ़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं- सवाल- अगर किसी को गाउट है तो उसकी डाइट कैसी होनी चाहिए ? जवाब- गाउट की डाइट का मकसद यूरिक एसिड को कंट्रोल रखना है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखें- सवाल- गाउट का इलाज क्या है? जवाब- इसके इलाज में दवाएं, खानपान में बदलाव और लाइफस्टाइल में सुधार शामिल हैं। सवाल- क्या हेल्दी लाइफस्टाइल से गाउट को ठीक किया जा सकता है? जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल गाउट को मैनेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन केवल इसके सहारे गाउट ठीक हो जाए, जरूरी नहीं है। बैलेंस्ड डाइट और वेट मैनेजमेंट से यूरिक एसिड का स्तर कम करने में मदद मिलती है। सवाल- गाउट से कैसे बचें? जवाब- इसे पॉइंटर्स में देखिए- गाउट से जुड़े कॉमन मिथ-फैक्ट्स मिथ- गाउट सिर्फ बुजुर्गों को होता है। फैक्ट- नहीं। गाउट कम उम्र में भी हो सकता है। मिथ- नींबू पानी पीने से गाउट ठीक हो जाता है। फैक्ट- नहीं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। मिथ- गाउट सिर्फ नॉनवेज खाने वालों को होता है। फैक्ट- नहीं। यह बात साइंटिफिक रूप से साबित नहीं हुई है। मिथ- यूरिक एसिड बढ़ने पर दाल खाना बंद कर देना चाहिए। फैक्ट- नहीं, संतुलित मात्रा में दालें खाई जा सकती हैं। ……………………….. ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- कार्डिएक अरेस्ट से नाना पाटेकर की मृत्यु:इतना ही खतरनाक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’, जानें इसके लक्षण, बचाव व सावधानियां हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इससे ब्रेन और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

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  Sports

अन्ना 24 घंटे चौकन्ना... मोहम्मद शमी की क्या करके होगी टीम इंडिया में वापसी, लो पता चस गया

Mohammed Shami Ravi Ashwin: रविचंद्रन अश्विन ने भुवनेश्वर कुमार की चार साल बाद टीम इंडिया में वापसी का बड़ा क्रेडिट इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (आरसीबी) के लिए लगातार अच्छा प्रदर्शन करने को दिया है. भुवनेश्वर की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के अंतरराष्ट्रीय करियर को लेकर भी अटकलें लगने लगी हैं. अश्विन ने कहा कि अगर कोई लगातार कोशिश करें तो वापसी बिलकुल संभव है. Tue, 13 Oct 2026 17:33:07 +0530

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CJP Protest: सड़कों पर उतरकर हंगामा क्यों #CJPProtestNews #CJPExposed #tmktech #vivo #v29pro
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