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मुस्लिम बहुल अजरबैजान के स्कूलों में हिजाब बैन पर विवाद:96% आबादी मुस्लिम, फिर भी सरकार ने बदला ड्रेस कोड; छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया

मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। देश की करीब 96% आबादी मुस्लिम है, लेकिन सरकार ने सरकारी स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। इसके बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोक दिया गया। फैसले के विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सरकार ने ड्रेस कोड में क्या बदलाव किया 96% आबादी मुस्लिम, फिर भी धर्मनिरपेक्ष देश अजरबैजान की करीब 96% आबादी खुद को मुस्लिम मानती है। इनमें ज्यादातर शिया मुस्लिम हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम भी बड़ी संख्या में हैं। इसके बावजूद अजरबैजान का संविधान देश को धर्मनिरपेक्ष बताता है। इसका मतलब है कि सरकार किसी एक धर्म के आधार पर काम नहीं करती। संविधान लोगों को अपने धर्म को मानने की आजादी भी देता है। यही वजह है कि स्कूलों में हिजाब को लेकर विवाद बढ़ गया है। सरकार ड्रेस कोड को सभी छात्रों पर समान रूप से लागू करना चाहती है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना किसी की निजी पसंद और धार्मिक आस्था का मामला है। छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया नए नियमों के खिलाफ अजरबैजान में विरोध शुरू हो गया है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, कम से कम दो स्कूलों में छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें स्कूल में प्रवेश से रोके जाने पर छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती और रोती दिखाई दे रही हैं। शिक्षिका जहरा हसानोवा ने अल जजीरा को बताया कि उन्हें स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं होने की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि हिजाब पहनना निजी फैसला है और इसे पहनना या उतारना व्यक्ति की अपनी पसंद होनी चाहिए। जेल में बंद पत्रकार ने विरोध में भूख हड़ताल शुरू की अजरबैजान की जेल में बंद पत्रकार पोलाद असलानोव ने भी नए नियमों के खिलाफ भूख हड़ताल शुरू की है। उन्हें 2020 में देशद्रोह के मामले में दोषी ठहराया गया था और वह 113 साल की सजा काट रहे हैं। उनकी पत्नी गुलमिरा असलानोवा के फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किए गए संदेश में असलानोव ने कहा कि वह जेल में रहते हुए भी लोगों के संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। देश में इंटरनेट बंद किए जाने की खबरें भी सामने आईं, लेकिन इंटरनेट पर नजर रखने वाले संगठनों ने इनकी पुष्टि नहीं की है। फैसले के खिलाफ पड़ोसी देश तुर्किये में भी प्रदर्शन अजरबैजान के फैसले का विरोध पड़ोसी देश तुर्किये तक पहुंच गया है। पिछले हफ्ते इस्तांबुल में अजरबैजान के वाणिज्य दूतावास के बाहर लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की। तुर्किये में कुछ लोगों ने इसकी तुलना 1997 के उस दौर से की है, जब वहां हिजाब पहनने वाली महिलाओं को विश्वविद्यालयों में जाने से रोका गया था। उस समय सरकारी नौकरियों में काम करने वाली कुछ महिलाओं को भी हिजाब के कारण नौकरी छोड़नी पड़ी थी। अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने अपनी पार्टी की बैठक में कहा कि किसी को भी उनके देश की जीवनशैली में दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर तुर्किये का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को वहां हो रहे प्रदर्शनों से जोड़कर देखा गया। ----------------- ये खबर भी पढ़ें…. सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं हरा पा रहा:अमेरिकी इंटेलिजेंस और एडवांस हथियार भी बेअसर; अब तेल-गैस की कमाई में हिस्सा मांग रहे विद्रोही सऊदी अरब के पास दुनिया के सबसे आधुनिक हथियारों में शामिल लड़ाकू विमान और मिसाइलें हैं। अमेरिका भी उसे हथियार और खुफिया जानकारी देकर मदद करता रहा है। इसके बावजूद सऊदी अरब यमन के हूती विद्रोहियों को हरा नहीं पाया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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ट्रम्प बोले- रूस से डीजल खरीदने में अमेरिका का फायदा:EU ने भी 250 अरब डॉलर की एनर्जी खरीदी, अमेरिकी मीडिया इसे नजरअंदाज कर रहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह सौदा अमेरिका के हित में है। ट्रम्प ने दावा किया कि यूरोपीय संघ (EU) ने भी रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया इस मुद्दे को नजरअंदाज कर रहा है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि EU ने रूस को ऊर्जा के लिए 250 अरब डॉलर दिए, लेकिन फेक न्यूज मीडिया इस खबर पर बात नहीं करना चाहता। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अमेरिकी लोगों के हित में फैसले लिए हैं और उनकी नीति ‘अमेरिका फर्स्ट’ है। रूस अमेरिका को लाखों टन डीजल भेजेगा ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा था कि रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल अमेरिका भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल भेजने की बात कही गई। ट्रम्प के मुताबिक, रूस की रिफाइनरियों की स्थिति के आधार पर कुछ समय बाद 30 लाख टन डीजल और भेजा जा सकता है। ट्रम्प ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इस समझौते के लिए धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे बड़ा सौदा बताते हुए कहा कि अमेरिका को बड़ी मात्रा में डीजल मिलेगा। पुतिन ने भी कहा कि रूस अमेरिका और दुनिया के दूसरे बाजारों को तेल और पेट्रोलियम उत्पाद देने के लिए तैयार है। उनके मुताबिक, इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को फायदा होगा। EU ने 826 रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए ट्रम्प के रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करने के बीच यूरोपीय संघ ने रूस पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, नए प्रतिबंधों में 1,569 लोगों और संस्थाओं को शामिल किया गया है। इनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के तौर पर काम करने वाले 743 लोग शामिल हैं। इन प्रतिबंधों का मकसद रूस के सैन्य उद्योग को सामान और सेवाएं देने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ाना है। यूरोपीय परिषद के मुताबिक, इन कंपनियों का सालाना कारोबार कम से कम 20 अरब यूरो है और इनमें 2.5 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं। जेलेंस्की बोले- रूस को युद्ध के लिए ज्यादा पैसा मिलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोमवार को EU के नए प्रतिबंधों का स्वागत किया, लेकिन रूस से डीजल खरीदने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। उनका कहना है कि ऊर्जा बेचकर रूस की कमाई बढ़ेगी और वह इस पैसे का इस्तेमाल युद्ध जारी रखने के लिए कर सकता है। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिका की ओर से ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए संघर्षविराम की घोषणा के अगले ही दिन रूस ने यूक्रेन की 6 ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों में देशभर में 33 लोग घायल हुए। ट्रम्प ने रविवार को रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर की जानकारी दी ट्रम्प ने रविवार को बताया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। -------------------------

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  Sports

क्या क्रिकेट में बदलेंगे रिकॉर्ड दर्ज करने के नियम? Sunil Gavaskar ने T20I और रणजी आंकड़ों पर उठाए गंभीर सवाल

भारत के पूर्व महान कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में रिकॉर्ड्स दर्ज करने और उनके वर्गीकरण के मौजूदा तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गावस्कर ने क्रिकेट गवर्निंग बॉडी से मांग की है कि प्रतिद्वंद्वी टीम के स्तर (Standard of Competition) के आधार पर प्रदर्शन का अंतर स्पष्ट करने के लिए फुटबॉल जैसा 'डिवीजन-आधारित सिस्टम' लागू किया जाना चाहिए। गावस्कर का मानना है कि टी20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) में बड़ी टीमों (Full Members) और उभरती हुई टीमों (Associate Members) के बीच काफी अंतर होता है, इसलिए दोनों तरह के मुकाबलों में बने आंकड़ों को एक ही तराजू में तोलना बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने रणजी ट्रॉफी (विशेषकर प्लेट ग्रुप) के रिकॉर्ड्स पर भी इसी तरह पुनर्विचार करने की बात कही।

खास बात यह है कि गावस्कर की यह टिप्पणी तब आई जब पुरुषों के T20 वर्ल्ड कप सब-रीजनल एशिया क्वालीफायर A में थाईलैंड के खिलाफ 193 रनों का पीछा करते हुए मंगोलिया की टीम 13 रनों पर आउट हो गई। इसके बाद, गावस्कर ने सवाल उठाया कि क्या ऐसे मैचों को स्थापित अंतरराष्ट्रीय टीमों के बीच होने वाले मुकाबलों के बराबर आँकड़ों का महत्व दिया जाना चाहिए।

गावस्कर ने मिड-डे में अपने कॉलम में लिखा, "बेशक, यह इस प्रारूप में सबसे कम स्कोर नहीं है। यह शर्मनाक रिकॉर्ड आइवरी कोस्ट के नाम है, जो नाइजीरिया के खिलाफ सिर्फ 7 रनों पर आउट हो गई थी। 2024 में मंगोलिया ने एक और T20 अंतरराष्ट्रीय मैच में सिंगापुर के खिलाफ केवल 10 रन बनाए थे।"

इसे भी पढ़ें: Ranji Trophy में Tushar Deshpande ने ली हैट्रिक, Mumbai को मिली 351 रन की बढ़त

इस महान बल्लेबाज ने माना कि ये मैच अंतरराष्ट्रीय माने जाते हैं क्योंकि टीमें अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करती हैं। हालाँकि, उन्होंने तर्क दिया कि केवल आधिकारिक मान्यता खेल के स्तर में अंतर को ठीक से नहीं समझा सकती।

गावस्कर ने आगे कहा, "जब कोई टीम इतने कम स्कोर पर आउट हो जाती है, तो गेंदबाज के आँकड़े तभी बेहतर हो सकते हैं जब उभरते हुए ICC एसोसिएट सदस्य देश एक-दूसरे के खिलाफ खेलें। इसकी तुलना उन आँकड़ों से करना, जब पूर्ण सदस्य देशों की टीमें एक-दूसरे के खिलाफ खेलती हैं, बिल्कुल भी उचित नहीं है।"

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रिकॉर्ड्स बनाए रखने के लिए गावस्कर का प्रस्ताव

गावस्कर ने फुटबॉल लीग जैसा मॉडल अपनाने का प्रस्ताव दिया, जहाँ डिवीज़न टीमों को अलग करते हैं और प्रमोशन व डिमोशन से स्तरों के बीच आवाजाही तय होती है। 77 साल के गावस्कर ने लिखा, "फ़ुटबॉल लीग में अलग-अलग डिवीज़न होते हैं, जहाँ सीज़न के आखिर में प्रमोशन और रेलीगेशन होता है। इसलिए जो भी रिकॉर्ड बनते हैं, उन्हें उसी डिवीज़न के रिकॉर्ड के तौर पर देखा जाता है जिसमें वे बने हैं। शायद क्रिकेट में भी कुछ ऐसा ही सोचा जाना चाहिए, ताकि यह साफ़ हो सके कि देश किस डिवीज़न में खेल रहे हैं।"

गावस्कर ने नेपाल के बल्लेबाज़ दीपेंद्र सिंह ऐरी की नौ-बॉल में T20I हाफ़-सेंचुरी के संदर्भ पर भी सवाल उठाए। ऐरी ने 2007 T20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ युवराज सिंह की 12-बॉल वाली हाफ़-सेंचुरी का रिकॉर्ड तोड़ा था।

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उन्होंने नेपाल की तरक्की का ज़िक्र किया, जिसमें इस साल की शुरुआत में भारत में हुए T20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड को लगभग हराने की उनकी कोशिश भी शामिल थी, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एसोसिएट टीमों के ख़िलाफ़ किए गए प्रदर्शन को उसी तरह मापा जाना चाहिए।

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Tue, 13 Oct 2026 11:42:00 +0530

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