तिमाही नतीजों से TCS का शेयर 5% चढ़ा:₹13,884 करोड़ रहा मुनाफा, ₹12 डिविडेंड का ऐलान; मंदी के बीच मिले 90 हजार करोड़ रुपए के ऑर्डर
आईटी सर्विसेज कंपनी TCS के दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद आज शुक्रवार 9 अक्टूबर को इसके शेयरों में 5% से ज्यादा की तेजी है। ये आज 2170 रुपए पर कारोबार कर रहा है। कंपनी ने 12 रुपए प्रति शेयर का दूसरा अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है। दूसरी तिमाही में TCS का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 15% बढ़कर 13,884 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को 12,075 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था। रेवेन्यू 11% बढ़कर ₹73,188 करोड़ रहा कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 11% बढ़कर 73,188 करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि में 65,799 करोड़ रुपए था। वहीं, कॉन्स्टेंट करेंसी के आधार पर रेवेन्यू में पिछली तिमाही के मुकाबले 0.5% की मामूली बढ़त दर्ज की गई। 'कॉन्स्टेंट करेंसी' के आधार पर रेवेन्यू का मतलब है कि विदेशी मुद्रा जैसे डॉलर, पौंड, यूरो आदि के उतार-चढ़ाव के असर को हटाकर तुलना की गई है। चूंकि टीसीएस एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी है। यह अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे देशों से कमाई करती है। इसलिए, जब डॉलर या यूरो की कीमत रुपए के मुकाबले बदलती है, तो बिना कोई नया काम किए भी कंपनी की कमाई कम या ज्यादा दिखने लगती है। AI रेवेन्यू का कुल रेवेन्यू में 10% से ज्यादा हिस्सा TCS का एआई रेवेन्यू 3.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का 10% से अधिक हिस्सा बन चुका है। कंपनी ने पुणे में 'इंडस्ट्रियल ऑटोनॉमी एंड इंजीनियरिंग लैब' और बेंगलुरु में एनवीडिया से पावर्ड 'ऑटोनॉमस इंजीनियरिंग लैब' जैसी एआई-केंद्रित सुविधाएं भी शुरू की हैं। कंपनी की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और COO आरती सुब्रमण्यन के मुताबिक, AI की मांग तेजी से बढ़ रही है। कंपनियां अब नए AI टूल्स, बिजनेस को सुधारने, काम को ऑटोमेटिक बनाने और साइबर सिक्योरिटी जैसे कामों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल कर रही हैं। कमजोर माहौल में 90 हजार करोड़ रुपए के नए सौदे आईटी सेक्टर में सुस्त माहौल के बावजूद TCS को जुलाई से सितंबर तिमाही में 9.6 अरब डॉलर यानी करीब ₹90,000 करोड़ की बड़ी डील्स मिली हैं। कर्मचारियों की कुल संख्या 5.98 लाख; एट्रिशन रेट 13.3% पर स्थिर तिमाही के अंत तक TCS में कुल कर्मचारियों की संख्या 5.98 लाख रही। आईटी सर्विसेज में एट्रिशन रेट यानी कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर 12 महीनों में 13.3% पर स्थिर बनी हुई है। चीफ एचआर ऑफिसर सुदीप कुन्नूमल ने कहा कि कंपनी फ्यूचर-रेडी स्किल्स में निवेश कर रही है, जिससे कर्मचारियों के लर्निंग आवर्स तिमाही आधार पर 17% बढ़कर 1.71 करोड़ हो गए हैं।
साल की सबसे बड़ी सेल में 80% डिस्काउंट का खेल:'बाय नाउ' दबाने से पहले समझें ये बातें; एक्स्ट्रा डिस्काउंट पाने और फ्रॉड से बचने की चेकलिस्ट
त्योहारों का सीजन यानी खरीदारी का माहौल। आज से ई-कॉमर्स कंपनियों की फेस्टिव सेल शुरू हो चुकी है। विज्ञापनों में 80% तक डिस्काउंट के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन रुकिए! 'सेल' के इस शोर में अक्सर हम जल्दबाजी कर बैठते हैं। नतीजा? वो सामान भी खरीद लेते हैं जिसकी जरूरत ही नहीं थी या फिर नकली डिस्काउंट के फेर में पैसा गंवा बैठते हैं। अगर आप भी इस बार नया फोन, स्मार्ट टीवी, लैपटॉप या घर का कोई सामान खरीदने की सोच रहे हैं, तो 'बाय नाऊ' का बटन दबाने से पहले यह शॉपिंग गाइड समझ लीजिए: कहां से क्या खरीदें: ऑनलाइन vs ऑफलाइन हर सामान ऑनलाइन खरीदना अक्लमंदी नहीं है और न ही हर चीज के लिए बाजार के चक्कर काटना जरूरी है। अपनी शॉपिंग लिस्ट को इन दो हिस्सों में बांट लें: 1. ऑनलाइन खरीदारी इन्हें ऑनलाइन खरीदने की वजह 2. ऑफलाइन खरीदारी इन्हें ऑफलाइन खरीदने की वजह: मैक्सिमम डिस्काउंट पाने की स्मार्ट ट्रिक्स अगर आप इस फेस्टिव सीजन में ज्यादा से ज्यादा बचत करना चाहते हैं, तो सिर्फ 'बाय नाउ' का बटन दबाने के बजाय इन स्मार्ट शॉपिंग ट्रिक्स का इस्तेमाल करें: ऑनलाइन शॉपिंग की जरूरी चेकलिस्ट 1. डार्क पैटर्न और फेक डिस्काउंट सेल के दिनों में दिखने वाले '80% ऑफ' के पोस्टर हमेशा सच नहीं होते। 2. कार्ड, कैशबैक्स और नो-कॉस्ट EMI 3. 'इम्पल्स बाइंग' यानी बिना जरूरत की खरीदारी 'सेल खत्म होने में 10 मिनट बाकी' या 'केवल 2 पीस बचे हैं' जैसे मैसेज सिर्फ आपको डराकर जल्दबाजी में खरीदारी कराने के लिए बनाए जाते हैं। खरीदारी से पहले पेन-पेपर लेकर अपनी 'जरूरत' और विशलिस्ट अलग-अलग लिखें। बजट सिर्फ जरूरत की चीजों पर खर्च करें। 4. वारंटी, रिटर्न और हिडन चार्जेस चेकआउट पेज पर जल्दबाजी में 'पेमेंट' बटन न दबाएं… 5. फेक रिव्यूज और सेलर की रेटिंग पहचानें ऑनलाइन सामान बेच रहे हर सेलर पर आंख मूंदकर भरोसा न करें: 6. ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर सेफ्टी त्यौहारों के मौसम में हैकर्स और ठग भी काफी एक्टिव हो जाते हैं:
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