सोना आज 1,784 रुपए महंगा, डेढ़ लाख पहुंचा:चांदी 4 हजार चढ़कर 2.21 लाख पहुंची; जानें अपने शहर के दाम
सोने-चांदी की कीमतों में आज 9 अक्टूबर को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,784 रुपए चढ़कर 1.50 लाख रुपए पहुंच गया है। इससे पहले 8 अक्टूबर को यह 1.48 लाख रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 4,003 रुपए चढ़कर 2.21 लाख रुपए पर हो गई है, जो गुरुवार को 2.17 लाख रुपए पर थी। अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें सोना इस साल ₹16,231 महंगा और चांदी ₹9,311 गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 16,231 रुपए महंगा हो चुका है। वहीं, चांदी 9,311 रुपए सस्ती हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए था, जो अब 1.50 लाख रुपए पहुंच गया है। वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो 2.21 लाख रुपए हो गई है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके -------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें... भारतीय घरों में देश की GDP से ज्यादा का सोना: 34,600 टन गोल्ड की कीमत ₹450 लाख करोड़, देश की GDP ₹370 लाख करोड़ भारतीय परिवारों के पास मौजूद कुल सोने की वैल्यू 5 ट्रिलियन डॉलर (₹450 लाख करोड़) के पार निकल गई है। यह आंकड़ा देश की कुल 4.1 ट्रिलियन डॉलर यानी, 370 लाख करोड़ रुपए की GDP से भी ज्यादा है। सोने की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के कारण ऐसा हुआ है। मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में लगभग 34,600 टन सोना जमा है। अभी सोने की वैल्यू 1.38 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब चल रही है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) के पार ट्रेड कर रहा है। रुपए में इसे बदलें तो इसकी वैल्यू 1.30 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब होती है। पूरी खबर पढ़ें…
कमल हासन बोले- मिस्टर मस्क, भारत किसी का गुलाम नहीं:कोई अरबपति देश की नीतियां तय नहीं कर सकता, भारत का भविष्य जनता तय करेगी
इलॉन मस्क ने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक को लाइसेंस नहीं मिलने पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने गुरुवार को X पर लिखा कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 से ज्यादा देशों में सेवा देने की मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी पिछले पांच साल से भारत सरकार के हर कानून और जरूरी शर्त का पालन कर रही है। इसके बावजूद उसे भारत में लाइसेंस क्यों नहीं मिला है? क्या अंबानी देश के रियल बॉस हैं? मस्क के सवाल पर कमल हासन ने जवाब देते हुए X पर लिखा- मिस्टर मस्क, यह बात तय है कि कोई भी अरबपति किसी देश की नीति तय नहीं कर सकता—चाहे वह भारतीय हो या अमेरिकी। हम एक लोकतांत्रिक देश हैं। भारत के लोग अपनी ताकतों और कमियों पर आपस में बहस करेंगे, सवाल उठाएंगे और उन्हें खुद सुधारेंगे। भारत एक आजाद लोकतंत्र है, किसी का गुलाम (कॉलोनी) नहीं। हम दुनिया के हर निवेशक और तकनीक का स्वागत करते हैं, लेकिन भारत का भविष्य केवल और केवल भारत की जनता तय करेगी। न कि पश्चिमी स्वार्थी तत्व, उनके दोहरे मापदंड या कोई भी अरबपति। राहुल बोले- वेलकम इलॉन, दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए इससे पहले मस्क के सवाल पर राहुल गांधी ने जवाब देते हुए X पर लिखा- भारत में आपका स्वागत है, इलॉन। दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए। राहुल गांधी के जवाब पर इलॉन ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा- धन्यवाद, राहुल। यह वाकई परेशान करने वाला है। राहुल गांधी का 'द अदर गाय' से इशारा उद्योगपति गौतम अडाणी की तरफ माना जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे अक्सर नरेंद्र मोदी सरकार, अडाणी और अंबानी पर सांठगांठ का आरोप लगाते रहते हैं। मस्क इससे पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी स्टारलिंक की एंट्री रोककर बाजार पर अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। 7 अक्टूबर: मस्क का उद्योगपतियों पर आरोप इलॉन मस्क ने बुधवार को आरोप लगाया कि भारत के कुछ बड़े बिजनेसमैन नहीं चाहते कि स्टारलिंक का सैटेलाइट इंटरनेट भारत आए, ताकि उनका एकछत्र राज बना रहे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं…'। यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है। 8 अक्टूबर: सरकार ने आरोप खारिज किए भारत सरकार ने मस्क के आरोपों को खारिज कर दिया है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए तय नियम सभी के लिए एक जैसे हैं। यह कहना बिल्कुल गलत है कि नियमों को किसी के साथ भेदभाव करने के लिए लागू किया जा रहा है। सरकार ने कहा कि फिलहाल इन तीनों के लिए सुरक्षा समीक्षा की प्रोसेस चल रही है। जैसे ही किसी कंपनी की सुरक्षा जांच पूरी हो जाएगी, वह अगली स्टेप यानी स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग करने के लिए आगे बढ़ सकती है। देशभर में 20 स्टेशन और सैकड़ों एंटीना तैनात स्टारलिंक ने देशभर में 20 गेटवे साइट्स बनाई हैं। ये गेटवे जमीन पर बने स्टेशन हैं, जो अंतरिक्ष में मौजूद स्टारलिंक के सैटेलाइट्स को जमीन के मुख्य इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ते हैं। इन जगहों पर सैकड़ों एंटीना लगाए गए हैं ताकि इंटरनेट सिग्नल बिना किसी रुकावट के ट्रांसफर हो सकें। जियो-एयरटेल से डील, 3 राज्यों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन स्टारलिंक भारत में बड़े पैमाने पर नेटवर्क पहुंचाने के लिए रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के साथ शुरुआती सहमति पत्र यानी MoU साइन कर चुकी है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर सेवाएं देने के लिए कंपनी ने महाराष्ट्र, गुजरात और मेघालय सरकार के साथ लेटर ऑफ इंटेंट साइन किए हैं। 5 सवाल-जवाब में स्टारलिंक से जुड़ी जरूरी बातें... सवाल 1: स्टारलिंक क्या है और ये खास क्यों है? जवाब: स्टारलिंक, स्पेसएक्स का प्रोजेक्ट है, जो सैटेलाइट्स के जरिए हाई-स्पीड इंटरनेट देता है। इसके सैटेलाइट्स पृथ्वी के करीब घूमते हैं, जिससे इंटरनेट तेज और स्मूथ चलता है। ये खासकर उन इलाकों के लिए फायदेमंद है, जैसे गांव या पहाड़, जहां आम इंटरनेट नहीं पहुंचता। सवाल 2: स्टारलिंक को लाइसेंस मिलने में इतना वक्त क्यों लग रहा है? जवाब: स्टारलिंक 2022 से कोशिश कर रही थी, लेकिन सिक्योरिटी चिंताओं की वजह से देरी हुई। भारत सरकार ने डेटा सिक्योरिटी और कॉल इंटरसेप्शन जैसी शर्तें रखी थीं। स्टारलिंक ने इन शर्तों को माना। अब सर्विसेज शुरू होने वाली है। सवाल 3: आम लोगों को क्या फायदा होगा? जवाब: स्टारलिंक से गांवों और दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचेगा, जिससे ऑनलाइन एजुकेशन, टेलीमेडिसिन, और बिजनेस को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, टेलीकॉम मार्केट में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सस्ते और बेहतर प्लान्स मिल सकते हैं। सवाल 4: भारत मस्क के लिए क्यों जरूरी है? जवाब: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इंटरनेट मार्केट है। मस्क के लिए ये लाइसेंस बड़ी कामयाबी है, खासकर जब अमेरिका में उनकी डोनाल्ड ट्रम्प के साथ तनातनी चल रही है। इससे स्पेसएक्स के कॉन्ट्रैक्ट्स खतरे में हैं। सवाल 5: सैटेलाइट्स से आप तक कैसे पहुंचेगा इंटरनेट? जवाब: सैटेलाइट धरती के किसी भी हिस्से से बीम इंटरनेट कवरेज को संभव बनाती है। सैटेलाइट के नेटवर्क से यूजर्स को हाई-स्पीड, लो-लेटेंसी इंटरनेट कवरेज मिलता है। लेटेंसी का मतलब उस समय से होता है जो डेटा को एक पॉइंट से दूसरे तक पहुंचाने में लगता है। स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखना होगा। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का ऐप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें… मस्क बोले- कुछ उद्योगपति स्टारलिंक को भारत में रोक रहे:मोनोपोली बनाए रखने का आरोप लगाया; कंपनी को आखिरी सरकारी मंजूरी का इंतजार दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क ने देश के बड़े उद्योगपतियों पर भारत में स्टारलिंक को रोकने का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़ें…
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