यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान, बोले- सरकार जो कहती है वो कर दिखाती है, नहीं होगा बाबरी का पुनर्निर्माण
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि सरकार जो वादा करती है उसे पूरा जरूर करती है. सीएम योगी ने बाबरी मस्जिद को लेकर भी अहम बात कही. उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण नहीं होगा. कयामत के दिन तक दोबारा मस्जिद नहीं बनेगी. बता दें कि सीएम योगी ने ये बात बारबंकी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश के हालात ऐसे थे कि हर चौथे दिन शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ता था.
कोई भी पर्व हो या फिर त्योहार उसे शांति से नहीं मनाया जा सकता था, लेकिन 2017 के बाद हालात बदले और अब प्रदेश में अराजकता खत्म हो चुकी है. प्रदेश विकास की ओर बढ़ रहा है.
1 करोड़ 16 लाख परिवारों को सालाना दी जा रही पेंशन
सीएम योगी ने अपने संबोधन में सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी गिनाया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में एक करोड़ 16 लाख परिवारों को सालाना पेंशन दी जा रही है. यही नहीं 16 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन भी मिल रहा है. इसके अलावा 5 करोड़ 46 लाख लोगों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराए गए हैं.
Barabanki: Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath says, "Some opportunists remember Lord Ram when they face crises and forget Him later. So, Lord Ram has also forgotten them. They will not succeed now. They will never go forward now. There is no place for these 'Ramdrohis' now; there… pic.twitter.com/4CzaEcduQ2
— ANI (@ANI) February 10, 2026
बाराबंकी भी विकासपथ पर बढ़ रहा
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ बाराबंकी भी तेजी से विकासपथ पर आगे बढ़ रहा है. कार्यक्रम में बाराबंकी के साथ-साथ अयोध्या के संत-महंत, बीजेपी के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. बता दें कि इस कार्यक्रम में 79 जोड़ों का सामूहिक विवाह भी संपन्न कराया गया.
'रामद्रोहियों' के लिए कोई जगह नहीं
सीएम आदित्यनाथ ने कहा, 'कुछ अवसरवादी संकट के समय भगवान राम को याद करते हैं और बाद में उन्हें भूल जाते हैं. ऐसे में अब भगवान राम भी उन्हें भूल चुके हैं. अब वे सफल नहीं होंगे. अब वे कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे. अब इन 'रामद्रोहियों' के लिए कोई जगह नहीं है; 'राम भक्तों' पर गोलियां चलाने वालों के लिए भी कोई जगह नहीं है.
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श्रीलंका में 25 जिलों के 300 छात्रों को दी गई महात्मा गांधी स्कॉलरशिप
कोलंबो, 10 फरवरी (आईएएनएस)। श्रीलंका के सभी 25 जिलों के 300 विद्यार्थियों को महात्मा गांधी छात्रवृत्ति दी गई। इस मौके पर श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या, शिक्षा और उच्च शिक्षा उप मंत्री मधुरा सेनेविरत्ना और भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सत्यंजल पांडे मौजूद थे। कोलंबो स्थित शिक्षा मंत्रालय में हुए इस खास समारोह में मेधावी छात्रों को स्कॉलरशिप थमाई गई।
भारतीय उच्चायोग के मुताबिक, छात्रों को मेरिट-कम-मीन्स स्कॉलरशिप के तहत हर महीने 2,500 एलकेआर (श्रीलंकाई मुद्रा) दिया जाता है। इसके लिए हर जिले के शीर्ष छह छात्रों का चुनाव किया जाता है। इस साल का समारोह 2021 से 2024 तक के समय के बीच एक साथ दो बैच को स्कॉलरशिप देने के लिए खास रहा।
भारतीय उच्चायोग की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया, प्रधानमंत्री माननीय (डॉ.) हरिनी अमरसूर्या ने महात्मा गांधी स्कॉलरशिप देने और श्रीलंका में इसके कई दूसरे कामों के लिए भारत सरकार का शुक्रिया अदा किया। छात्रवृत्ति से सम्मानित छात्रों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के विचारों और आदर्शों को याद किया और छात्रों को उनकी विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान देने को कहा।
इसमें आगे कहा गया, छात्रों को उनकी कामयाबी पर बधाई देते हुए, कार्यवाहक उच्चायुक्त डॉ. सत्यंजल पांडे ने कहा कि महात्मा गांधी स्कॉलरशिप सिर्फ जरूरतमंद और काबिल छात्रों के लिए एक फाइनेंशियल अवॉर्ड नहीं है, बल्कि जिंदगी भर के लिए एक पहचान है। उन्होंने कहा कि सम्मानित छात्रों से शैक्षिक क्षेत्र में ही अच्छा करने की उम्मीद नहीं की जाती, बल्कि माना जाता है कि वे अपनी पूरी जिंदगी महान नेता के सद्विचारों को आगे बढ़ाते रहेंगे और उनका प्रसार भी करेंगे।
छात्रवृत्ति के अलावा, भारत सरकार इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्ट्स, साइंस और देसी मेडिसिन जैसे क्षेत्रों को तकरीबन 210 सालाना स्कॉलरशिप देती है। भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) योजना के तहत श्रीलंकाई सरकारी अधिकारियों के लिए 400 से अधिक पूरी तरह से वित्त पोषित अल्पकालिक प्रशिक्षण स्लॉट प्रदान किए हैं।
इसके अलावा, दिसंबर 2024 में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के आधिकारिक दौरे के दौरान, भारत में पांच साल के समय में 1500 श्रीलंकाई सिविल सर्वेंट्स को ट्रेनिंग देने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया था। वहीं, अप्रैल 2025 में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान, भारत ने श्रीलंकाई पेशेवरों के लिए हर साल 700 विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम में शामिल होने का ऑफर दिया था।
--आईएएनएस
केआर/
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