निज़ाम की शिकारगाह से वाइल्डलाइफ स्वर्ग तक: पोचारम के जंगलों में दक्कन की शाही विरासत और रोमांच की गूंज
Nizam royal hunting Story : दक्कन के इतिहास में आसफ जाही राजवंश की शाही जिंदगी, ठाठ-बाट और शिकार के किस्से आज भी लोगों की जिज्ञासा जगाते हैं. इन्हीं कहानियों का एक अहम अध्याय तेलंगाना के मेडक जिले में बसे पोचारम के जंगलों से जुड़ा है, जहां कभी हैदराबाद के छठे निज़ाम मीर महबूब अली खान की पसंदीदा शिकारगाह हुआ करती थी. महलों की चकाचौंध से दूर यह इलाका सत्ता, रोमांच और शाही जुनून की अनोखी दास्तां समेटे हुए है. इतिहासकारों के मुताबिक निज़ाम अपनी सटीक निशानेबाजी के लिए मशहूर थे और पोचारम के घने जंगल उनके लंबे शिकार अभियानों के गवाह रहे हैं. आज वही क्षेत्र समय के साथ बदलकर एक संरक्षित वन और इको-टूरिज्म स्थल बन चुका है, जहां खंडहर होते शाही रेस्ट हाउस, शांत झील और वन्यजीवों की हलचल बीते दौर की परछाइयों को जीवित रखती है. पोचारम अब केवल जंगल नहीं, बल्कि इतिहास और प्रकृति का जीवंत संगम बन चुका है.
Explainer: कैसे 40 देशों से तेल मंगाता है भारत, 75 दिनों का रिजर्व कहां होता है स्टोर
भारत के पेट्रोलियम और गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश 75 दिनों के इस्तेमाल के लायक तेल अपने रिजर्व में स्टोर रखता है. जानते हैं ये कैसे किया जाता है. कहां इसके भंडारण होते हैं. ये काम कौन करता है. कच्चा तेल तो भारत बाहर से मंगा लेता है लेकिन सबसे बड़ा काम रिफाइन का होता है, वो कहां और कैसे होता है. जानिए सबकुछ.
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