अमेरिका में पहली बार टीवी पर सजा-ए-मौत लाइव:16 साल पहले जहां 13 लोगों की जान ली, दोषी को वहीं गोली मारी जाएगी
अमेरिका में पहली बार मौत की सजा को लाइव टीवी पर दिखाया जाएगा। पूर्व आर्मी मेजर निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी। हसन ने 2009 में टेक्सास के सैन्य अड्डे पर धार्मिक नारा लगाते हुए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 सैनिकों की मौत हो गई थी। अब 3 दिसंबर को यहीं हसन को गोली मारी जाएगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि इस सजा का लाइव टेलिकास्ट किया जाएगा, ताकि आम लोग इसे देख सकें। BBC के मुताबिक, 100 साल में यह अमेरिका में पहली सार्वजनिक तौर पर दी गई मौत की सजा होगी। हमले के बाद माना था- जिहाद के लिए किया 5 नवंबर 2009 को सेना के मनोचिकित्सक मेजर निदाल हसन निजी पिस्तौल लेकर फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पहुंचा और सैनिकों व अन्य लोगों पर अचानक गोलीबारी कर दी। यह अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी थी। उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में युद्ध लड़ रहा था। हसन ने बाद में कहा कि वह इन युद्धों को गैरकानूनी और अनैतिक मानता था और जिहाद के लिए हमला किया था। गोलीबारी में हसन भी घायल हुआ और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। सैन्य अदालत में उसने हत्याओं की बात स्वीकार की। 2013 में उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या की कोशिश के कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया गया। हसन ने हमले पर कोई पछतावा नहीं जताया। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा कि वह चाहता था कि हमले में उसकी भी मौत हो जाती, ताकि वह शहीद बन सके। उसका यह तक कहा कि मौत की सजा मिलने पर भी वह खुद को शहीद मानेगा। 65 साल बाद सैनिक को मौत की सजा का पहला मामला 1961 के बाद अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत मौत की सजा पाने वाला निदाल हसन पहला व्यक्ति होगा। सैन्य व्यवस्था में आखिरी बार प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को मौत की सजा दी गई थी। हेगसेथ ने एक इंटरव्यू में कहा कि हसन को सैनिकों की एक टुकड़ी गोली मारकर मौत की सजा देगी। हेगसेथ ने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करेंगे कि लोग इसे देख सकें और यह सार्वजनिक हो। लोगों को समझना चाहिए कि इस तरह के कामों के गंभीर नतीजे होते हैं।’ अदालत में अपील करने से सजा अब भी टल सकती है अमेरिकी सैन्य कानून के तहत किसी कैदी को मौत की सजा देने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है। इसके बाद भी कानूनी अपील के चलते सजा रुक सकती है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने 2 अक्टूबर को हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने की मंजूरी दी थी। हालांकि, हसन के पास दोषी ठहराए जाने और सजा के खिलाफ अपील करने का विकल्प है। इससे सजा पर रोक लग सकती है। पहले किन देशों में मौत की सजा का प्रसारण हुआ? 1. चीन मार्च 2013 में सरकारी टीवी चैनल चार विदेशी ड्रग तस्करों को मौत की सजा दिए जाने से पहले के पलों का लाइव प्रसारण किया था। ये चारों 2011 में मेकांग नदी पर 13 चीनी नाविकों की हत्या के मामले में दोषी थे। हालांकि, उन्हें जहरीला इंजेक्शन दिए जाने का दृश्य प्रसारण में नहीं दिखाया गया था। 2. ईरान सितंबर 2017 में ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर की वेबसाइट पर इस्माइल जाफरजादेह को फांसी दिए जाने का वीडियो साझा किया गया था। उसे 7 साल की बच्ची के रेप और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उसे पारसाबाद शहर के एक चौराहे पर लोगों के सामने फांसी दी गई थी। 3. अफगानिस्तान यहां भी सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी जाती है। 22 फरवरी 2024 को तालिबान ने गजनी शहर के एक स्टेडियम में दो दोषियों को गोली मारकर मौत की सजा दी। दोनों को हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था। इस दौरान हजारों लोग स्टेडियम में मौजूद थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक, 2025 में अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से 6 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… ओबामा के करीबी थे, अब ट्रम्प के खास बने जुकरबर्ग:राष्ट्रपति ने जेल भेजने की धमकी दी थी, अब साथ मिलकर AI के नियम बना रहे मेटा चीफ मार्क जुकरबर्ग कभी अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के करीबी थे। 2021 में फेसबुक और इंस्टाग्राम ने ट्रम्प का अकाउंट बंद कर दिए, तो उन्होंने जुकरबर्ग को जेल भेजने की धमकी दी थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान के 19 जहाज श्रीलंका के पास फंसे:खाना-पानी और ईंधन की कमी, अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से मदद करने से बच रही सरकार
श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान के 19 जहाज फंसे हुए हैं। इन जहाजों पर खाने-पीने के सामान, पानी और ईंधन की कमी हो गई है। इसके बावजूद श्रीलंका सरकार फिलहाल उनकी मदद करने से बच रही है। सरकार को डर है कि ईरानी जहाजों को सहायता देने से अमेरिकी प्रतिबंधों का जोखिम पैदा हो सकता है। श्रीलंका का कहना है कि वह किसी भी फैसले से पहले अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा। श्रीलंका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता थुषारा रोड्रिगो के मुताबिक, ये जहाज देश के तट से करीब 24 समुद्री मील दूर खड़े हैं। हालांकि, श्रीलंका को अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक चेतावनी नहीं मिली है कि ईरानी जहाजों की मदद करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के बाद से फंसे जहाज श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संडे टाइम्स को बताया कि ये ईरान के तेल टैंकर हैं। उनके मुताबिक, होर्मुज में अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से दर्जनों ईरानी जहाज फंसे हुए हैं और अपने देश नहीं लौट पा रहे हैं। होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से होने वाली सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। अमेरिका ने श्रीलंका के पास ईरानी जहाज डुबोया था इस साल मार्च में जंग के दौरान अमेरिका ने श्रीलंका के तट के पास ईरान का युद्धपोत IRIS देना डूब गया था। इसमें 100 से ज्यादा सैनिक मारे गए थे। यह घटना श्रीलंका के तट के पास हुई थी। रॉयटर्स के मुताबिक, ईरानी फ्रिगेट श्रीलंका के गाले शहर से करीब 19 नॉटिकल मील दूर डूबा था। यह इलाका श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी EEZ में आता है। श्रीलंका के अमेरिका और ईरान, दोनों से कारोबारी रिश्ते श्रीलंका के लिए यह फैसला आसान नहीं है। देश अभी आर्थिक संकट से उबरने की कोशिश कर रहा है और अमेरिका व ईरान दोनों उसके कारोबारी साझेदार हैं। श्रीलंका को आर्थिक संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज दिलाने में अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई थी। अमेरिका की मदद से कृषि क्षेत्र को खाद्य संकट से उबारने के प्रयास भी किए गए थे। श्रीलंका के अधिकारियों के मुताबिक, जहाजों को सामान और दूसरी सेवाएं देने वाली कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित खतरे को लेकर सतर्क हैं। ऐसे में सरकार को मानवीय जरूरतों और अमेरिका के साथ अपने रिश्तों के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है। पहले भी ईरानी जहाज को मदद दे चुका है श्रीलंका करीब सात महीने पहले अमेरिकी टॉरपीडो हमले में ईरान का नौसैनिक जहाज IRIS Dena डूब गया था। इस घटना में 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत हुई थी। यह जहाज भारत के निमंत्रण पर आयोजित नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था। इसके बाद एक दूसरे ईरानी जहाज को तकनीकी खराबी के कारण श्रीलंका के बंदरगाह पर लाया गया था। उसके घायल नाविकों का श्रीलंकाई अस्पतालों में इलाज किया गया। जहाज से बचाए गए लोगों और घायल नाविकों को बाद में सुरक्षित ईरान भेज दिया गया था। एक्सपर्ट बोले- हमला होने पर मदद देना नैतिक जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार दयान जयतिलके ने कहा कि श्रीलंका मुश्किल स्थिति में है और उसकी मदद करने की भी व्यावहारिक सीमाएं हैं। उनके मुताबिक, दुनिया को यह समझना चाहिए कि श्रीलंका जानबूझकर सहायता से इनकार नहीं कर रहा, बल्कि उसे सावधानी से फैसला लेना पड़ रहा है। जयतिलके ने कहा कि ये युद्धपोत नहीं, बल्कि मालवाहक जहाज हैं, जो ईरान से चीन तक तेल ले जाते थे। अगर इन जहाजों पर हमला होता है और वे मदद के लिए श्रीलंका के जलक्षेत्र में आते हैं, तो उन्हें तुरंत सहायता देना देश की नैतिक जिम्मेदारी होगी। -------------------- ये खबर भी पढ़ें…. ईरान ने अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर किया:हमलों के डर से ब्रिटेन से 12 बमवर्षक हटे; अमेरिकी सैनिक होटलों में रहने को मजबूर ईरान पर हमला करके अमेरिका अपनी सैन्य ताकत दिखाना चाहता था, लेकिन अब यही युद्ध उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ईरानी हमलों के बाद अमेरिका को मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य तैनाती बदलनी पड़ी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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