Punjab Salary कर्मचारियों को केंद्र से अधिक वेतन, सरकार ने दी जानकारी
चंडीगढ़, चार अगस्त पंजाब सरकार के कर्मचारियों को ऐतिहासिक रूप से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक वेतन मिलता रहा है। राज्य की वेतन संरचना के तहत कई संवर्गों के कर्मचारियों का वेतन केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक अधिक है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के अनुसार, पंजाब सरकार महंगाई भत्ता (डीए) 42 प्रतिशत की दर से दे रही है, जबकि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 60 प्रतिशत डीए देती है। इसके बावजूद, राज्य के उच्च वेतनमान के कारण कई श्रेणियों में पंजाब सरकार के कर्मचारियों का कुल मासिक वेतन केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में अब भी अधिक है। यह बयान पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद आया है जिसमें अदालत ने सोमवार को राज्य सरकार को कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया डीए का भुगतान दो सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया था।
बयान में कहा गया है कि पंजाब सरकार लगातार यह रुख अपनाती रही है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार है कि किसी भी कर्मचारी को केंद्र सरकार के वेतनमान और केंद्र सरकार की महंगाई भत्ता (डीए) दर के आधार पर देय कुल वेतन-भत्तों से कम भुगतान न हो। हालांकि, राज्य सरकार का यह भी कहना है कि पंजाब के पहले से ही अधिक वेतनमान पर केंद्र सरकार की अधिक महंगाई भत्ता (डीए) दर लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों वेतन संरचनाओं को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता। बयान के अनुसार, पंजाब सरकार ने यह भी कहा है कि महंगाई भत्ते की दर तय करना राज्य सरकार का नीतिगत और संप्रभु अधिकार है।
बयान में कहा गया, ‘‘देश के प्रमुख राज्यों में पंजाब पहले से ही वेतन और पेंशन का सबसे अधिक वित्तीय बोझ उठा रहा है।
RSS नेता Atul Limaye का बयान, CJP का आंदोलन राष्ट्र-विरोधी और भटका हुआ
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता अतुल लिमये ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों को 'असंवैधानिक' और 'राष्ट्र-विरोधी' करार दिया है। उन्होंने दक्षिणपंथी सहयोगियों से इस आंदोलन का एक केस स्टडी के रूप में विश्लेषण करने को कहा, ताकि यह समझा जा सके कि कैसे एक नेक इरादे से शुरू हुआ आंदोलन बाद में भटक गया। लिमये ने कहा कि शुरुआत में छात्रों की चिंताओं को जायज और स्वाभाविक बताया, लेकिन बाद में यह एक बड़े राजनीतिक लक्ष्य के साथ एक सुनियोजित आंदोलन में बदल गया। उन्होंने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन ने वामपंथियों की वैकल्पिक राजनीति की अवधारणा का सफलतापूर्वक परीक्षण किया।
आंदोलन के भटकने पर जताई चिंता
अतुल लिमये अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के छत्रपति संभाजी नगर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बीआर अंबेडकर के 'ग्रामर ऑफ एनार्की' भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि अंबेडकर ने बहुत पहले अराजकतावादियों के खिलाफ चेतावनी दी थी। लिमये ने कहा, “पेपर लीक से शुरू हुए छात्रों के विरोध का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में गलतियों को सुधारना था... लेकिन यह गलत हाथों में पड़ गया, हालांकि छात्र स्वाभाविक रूप से राष्ट्र-निर्माण की ओर झुके हुए हैं। एबीवीपी को यह सुनिश्चित करने के लिए काम करना चाहिए कि छात्र ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण के लक्ष्य की ओर मोड़ा जाए।”
आंदोलन का विश्लेषण जरूरी: लिमये
लिमये ने CJP विरोध का उचित विश्लेषण करने का आह्वान किया, यह दावा करते हुए कि आंदोलन को डिकोड किया जाना चाहिए, और इसके कालक्रम, कार्यप्रणाली, समर्थन प्रणालियों और प्रेरणाओं का सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “20 जून के बाद, आंदोलन का विस्तार हुआ और उसे भारी समर्थन मिला। दीप्के के आने के बाद क्या हुआ? किन प्रणालियों ने विरोध में भाग लिया? इसका खुलासा होना चाहिए। आंदोलन का समर्थन करने वाले संगठन बड़े पैमाने पर वामपंथी झुकाव वाले हैं जो 'भारत तेरे टुकड़े होंगे' के दृष्टिकोण को अपनाते हैं,” उन्होंने कहा, कि आंदोलन एक नेक इरादे से शुरू हुआ था, लेकिन वामपंथी तत्वों के शामिल होने के बाद यह अपने रास्ते से भटक गया।
लोकतांत्रिक माध्यमों से लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास
लिमये ने तर्क दिया कि अंततः इस विरोध प्रदर्शन में कई नागरिक समाज, श्रमिक और राजनीतिक समूहों ने लोकतांत्रिक माध्यमों का उपयोग करके लोकतंत्र को कमजोर करने के विचार को आगे बढ़ाने के लिए भाग लिया।
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