World Mental Health Day पर Screen Time घटाएं, दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें
हर साल 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। गौरतलब है कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का जरुरी हिस्सा बन चुका है। जब हम सभी सुबह उठते हैं, तो सबसे पहले फोन चेक करना, दिनभर स्क्रीन पर काम करना और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया चलाना हमारी आदत बन गई है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन को घंटों तक इस्तेमाल करना, नींद न पूरी होना और हर समय ऑनलाइन रहने का प्रभाव हमारे दिमाग पर असर जरुर डालता है।
हम आपको वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे 2026 के मौके पर डिजिटल दुनिया का इस्तेमाल करते हुए अपने दिमाग की सेहत को कैसे बचाएं और कौन-सी आदतें आपकी मदद कर सकते हैं, जानें।
डिजिटल दौर में दिमाग को हेल्दी कैसे रखें?
अगर आप डिजिटल दुनिया से पूरी तरह से दूर रहना चाहते हैं, तो लेकिन फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल किस तरह करते हैं, इस पर ध्यान देना जरुरी है। लगातार नोटिफिकेशन चेक करना, देर रात तक रील्स देखने और काम के बीच आराम न करना हमारी नींद और ध्यान लगाने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है।
असल में मेंटल हेल्थ का संबंध केवल दिमाग से नहीं बल्कि दिल, खून की नसों, नींद और हमारी रोजाना की आदतों से भी है। इसलिए दिमाग को हेल्दी रखने के लिए स्क्रीन टाइम के साथ-साथ अपनी पूरी दिन की रुटीन पर भी ध्यान देना चाहिए।
ऑनलाइन रहने का दबाव दिमाग को कैसे प्रभावित करता है?
खासकर ऑफिस के मैसेज, सोशल मीडिया की लगातार अपडेट और घर की जिम्मेदारियों के बीच कई लोग तनाव से घिर जाते हैं। ऐसे में तनाव लंबे समय तक बना रहता है। काम के बीच आराम करना, अच्छी नींद लेना और तनाव को कम करना भी काफी जरुरी है।
मेंटल हेल्थ के लिए इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आप डिजिटल स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो आपके आंखों में थकान, गर्दन में दर्द और सिरदर्द हो सकता है, लेकिन हर परेशानी की वजह स्क्रीन ही हो, यह जरुरी नहीं है।
लगातार बढ़ता सिरदर्द
अचानक चक्कर आना,
धुंधला दिखाई देना
याददाश्त से जुड़ी परेशानी होना
हाथ-पैर में कमजोरी होना
बोलने में दिक्कत महसूस होना
अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकना
यदि आपको ये सभी लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर को जरुर दिखाएं। ये स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं।
डिजिटल युग में दिमाग को हेल्दी रखने के तरीके
- रात में मोबाइल चलाने का समय कम करें और सोने-जागने का समय फिक्स कर लें।
- हर घंटे कुछ देर के लिए स्क्रीन से नजर हटाएं और थोड़ा दूर चलें।
- रोजना पैदल चलें, अपने क्षमता के अनुसार करीब 30 मिनट टहलने की कोशिश करें।
- वर्क और आराम के बीच बैलेंस बनाए रखें। जरुरत पड़ने पर किसी भी एक्सपर्ट से बात जरुर करें।
- इनका बढ़ा हुआ लेवल दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- हर समय ऑनलाइन रहने से बचना जरुरी है। अपने फोन के नोटिफिकेशन की सीमित करें और दिन में कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताएं।
Sunset Awe Effect: Sunset Awe बढ़ाता है एकाग्रता और Memory, अनिद्रा की समस्या से मिलेगी राहत
शाम को ढलते सूरज को देखना सिर्फ प्रकृति का एक सुंदर दृश्य नहीं बल्कि यह हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए एक कुदरती थेरेपी है। विज्ञान की भाषा में इसको 'सनसेट ऑ' प्रभाव कहा जाता है। कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि सूर्यास्त के दौरान मन में कई हैरान कर देने वाली सुंदर भावनाएं चिंता, डिप्रेशन और तनाव को दूर करने में बेहतर असर दिखाती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सनसेट ऑ क्या है और साथ ही यह भी जानेंगे कि इसका हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है।
'सनसेट ऑ' का प्रभाव
जब भी हम प्रकृति को देखते हैं, तो हमारे मन में एक विशेष तरह का विस्मय पैदा होता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जब इंसान आसमान में ढलते सूरज के रंगों को देखता है, तो व्यक्ति को यह एहसास होता है कि इस अनंत ब्रह्मांड के सामने उनकी चिंताएं और परेशानियां बहुत छोटी हैं। इस नजरिए के साथ व्यक्ति निगेटिव सोच से बाहर निकलता है।
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मानसिक और शारीरिक सेहत पर पॉजिटव प्रभाव
सूर्यास्त का नजारा इतना गहरा होता है कि यह इंसान को पूरी तरह से वर्तमान के समय में ले आता है और इसके अन्य वैज्ञानिक फायदे भी हैं।
तनाव और डिप्रेशन से मिल सकती है मुक्ति
अगर आप नियमित रूप से सूर्यास्त देखते हैं, तो इससे दिमाग में सकारात्मक तरंगे पैदा होती हैं। जो लोग कुदरत के इस रूप को निहारते हैं, वह मानसिक तनाव और अवसाद से आसानी से उबर जाते हैं।
नींद होगी बेहतर
सनसेट के समय प्राकृतिक रोशनी कम होती है, जोकि हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक को संकेत देता है कि दिन अब खत्म हो रहा है। इससे शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है।
याददाश्त और एकाग्रता में होगी वृद्धि
बता दें कि कुदरत के ऐसे दृश्य देखने से एकाग्रता में वृद्धि होती है, साथ ही इससे ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त में भी सुधार होता है।
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