Sunset Awe Effect: Sunset Awe बढ़ाता है एकाग्रता और Memory, अनिद्रा की समस्या से मिलेगी राहत
शाम को ढलते सूरज को देखना सिर्फ प्रकृति का एक सुंदर दृश्य नहीं बल्कि यह हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ के लिए एक कुदरती थेरेपी है। विज्ञान की भाषा में इसको 'सनसेट ऑ' प्रभाव कहा जाता है। कई अध्ययनों से यह पता चलता है कि सूर्यास्त के दौरान मन में कई हैरान कर देने वाली सुंदर भावनाएं चिंता, डिप्रेशन और तनाव को दूर करने में बेहतर असर दिखाती हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि सनसेट ऑ क्या है और साथ ही यह भी जानेंगे कि इसका हमारी फिजिकल और मेंटल हेल्थ पर क्या असर होता है।
'सनसेट ऑ' का प्रभाव
जब भी हम प्रकृति को देखते हैं, तो हमारे मन में एक विशेष तरह का विस्मय पैदा होता है। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक जब इंसान आसमान में ढलते सूरज के रंगों को देखता है, तो व्यक्ति को यह एहसास होता है कि इस अनंत ब्रह्मांड के सामने उनकी चिंताएं और परेशानियां बहुत छोटी हैं। इस नजरिए के साथ व्यक्ति निगेटिव सोच से बाहर निकलता है।
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मानसिक और शारीरिक सेहत पर पॉजिटव प्रभाव
सूर्यास्त का नजारा इतना गहरा होता है कि यह इंसान को पूरी तरह से वर्तमान के समय में ले आता है और इसके अन्य वैज्ञानिक फायदे भी हैं।
तनाव और डिप्रेशन से मिल सकती है मुक्ति
अगर आप नियमित रूप से सूर्यास्त देखते हैं, तो इससे दिमाग में सकारात्मक तरंगे पैदा होती हैं। जो लोग कुदरत के इस रूप को निहारते हैं, वह मानसिक तनाव और अवसाद से आसानी से उबर जाते हैं।
नींद होगी बेहतर
सनसेट के समय प्राकृतिक रोशनी कम होती है, जोकि हमारी बायोलॉजिकल क्लॉक को संकेत देता है कि दिन अब खत्म हो रहा है। इससे शरीर में नींद लाने वाले हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे अनिद्रा की समस्या भी दूर होती है।
याददाश्त और एकाग्रता में होगी वृद्धि
बता दें कि कुदरत के ऐसे दृश्य देखने से एकाग्रता में वृद्धि होती है, साथ ही इससे ध्यान लगाने की क्षमता और याददाश्त में भी सुधार होता है।
Health Tips: प्रेग्नेंसी में क्यों होता है Mommy Brain, रिसर्च में Estrogen हार्मोन को पाया गया जिम्मेदार
प्रेग्नेंसी के दौरान अक्सर महिलाओं को चीजें भूलने या फिर याददाश्त कमजोर होने की शिकायत होती है। इसको आम भाषा में 'मॉम्नेसिया' या 'मॉमी ब्रेन' कहा जाता है। अब वैज्ञानिकों ने इसके पीछे का कारण पता लगाया है। लंबे समय से प्रेग्नेंट महिलाओं का यह मानना है कि वह प्रेग्नेंसी के दौरान छोटी-छोटी बातों को भूल जाती हैं, जैसे कमरे में आकर यह भूल जाना कि वह किस काम के लिए वहां आई थीं, या जरूरी चीजों को रखकर भूल जाना। लेकिन हाल ही में हुए एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि इसके पीछे दिमाग का एक खास न्यूरल सर्किट और हार्मोन्स जिम्मेदार होता है।
जाने 'मॉमी ब्रेन' और हार्मोन्स का कनेक्शन
महिलाओं के शरीर में प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल काफी बढ़ जाता है। यह हार्मोन गर्भ में पलने वाले बच्चे के विकास के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। वहीं प्रेग्नेंसी के थर्ड ट्राइमेस्टर में इसका लेवल अपने चरम पर पहुंच जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह बढ़ा हुआ एस्ट्रोजन हार्मोन दिमाग के उस सर्किट को प्रभावित करता है, जोकि हाइपोथैलेमस को हिम्पोकैम्पस से भी जोड़ता है।
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हिम्पोकैम्पस दिमाग का वह हिस्सा होता है, जोकि हमारी याददाश्त और चीजों को याद रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब एस्ट्रोजन का लेवल लंबे समय तक काफी ज्यादा रहता है, तो यह अस्थाई रूप से दिमाग के तालमेल को बाधित कर देता है, जिस कारण याददाश्त से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं।
जानिए कैसे हुई यह रिसर्च
वैज्ञानिकों ने पाया कि हाइपोथैलेमस के न्यूरॉन्स ज्यादा एस्ट्रोजन की वजह से हिप्पोकैम्पस की एक्टिविटी को स्लो कर देते हैं, जिससे याद करने की क्षमता पर असर पड़ता है।
चूहों पर किए गए परीक्षण में यह साबित हुआ कि बढ़े हुए एस्ट्रोजन लेवल से उनमें याददाश्त की कमी पाई गई। लेकिन इससे चूहे के मूड पर कोई निगेटिव असर नहीं पड़ा।
वहीं जब वैज्ञानिकों ने चूहों के दिमाग से उस खास न्यूरल लिंक को इन-एक्टिव किया गया तो, उनमें भी याददाश्त की समस्या ठीक हो गई।
वहीं इस शोध के दौरान 70 प्रेग्नेंट महिलाओं और गैर प्रेग्नेंट महिलाओं पर भी परीक्षण किया गया। जिससे यह साफ हो गया कि प्रेग्नेंसी के लास्ट महीनों में याददाश्त पर असर बढ़ते हार्मोन्स से जुड़ा है।
प्रेग्नेंसी के दौरान 'मॉमी ब्रेन' की वजह से होने वाली भूलने की समस्या अब सिर्फ मिथक नहीं, बल्कि इसके पीछे हार्मोनल वजह है। हालांकि यह स्थिति महिलाओं के रोजमर्रा के कामकाज और जीवन को थोड़ा प्रभावित कर सकता है। लेकिन यह पूरी तरह से अस्थायी होता है और डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे ठीक हो जाता है। वैज्ञानिकों के इस रिसर्च से यह साफ हुआ कि यह शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों का एक सामान्य हिस्सा है, जिससे परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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