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म्यूचुअल फंड एसआईपी इनफ्लो जनवरी में 31,000 करोड़ रुपए रहा, 74 लाख नए खाते खुले

मुंबई, 10 फरवरी (आईएएनएस)। म्यूचुअल फंड एसआईपी इनफ्लो जनवरी में 31,000 करोड़ रुपए रहा है। यह लगातार दूसरा महीना है, जब एसआईपी इनफ्लो 31,000 रुपए या इससे अधिक रहा है। दिसंबर में यह 31,002 करोड़ रुपए पर था।

सालाना आधार पर मासिक सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) इनफ्लो 17 प्रतिशत बढ़ा है, यह जनवरी 2025 में 26,400 करोड़ रुपए पर था।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) डेटा के मुताबिक, जनवरी 2026 में 74 लाख नए एसआईपी खाते खुले थे। दूसरी तरफ इस दौरान 55 लाख एसआईपी खाते बंद हुए हैं।

इसके अलावा, देश में कुल एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 10.29 करोड़ हो गई है, जो कि दिसंबर में 10.11 करोड़ रुपए थी।

डेटा में आगे बताया गया कि जनवरी में एसआईपी एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) कम होकर 16.36 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो कि दिसंबर में 16.63 लाख करोड़ रुपए था। इसकी वजह बाजार में आई गिरावट को माना जा रहा है। पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एयूएम में एसआईपी की हिस्सेदारी 20.2 प्रतिशत हो गई है।

एम्फी के अनुसार, जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में निवेश दोगुना होकर 24,039.96 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो दिसंबर में 11,647 करोड़ रुपए था। यह दर्शाता है कि लोग शेयर बाजार के साथ-साथ सोने जैसे सुरक्षित निवेश को भी महत्व दे रहे हैं।

जनवरी महीने में एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश 24,029 करोड़ रुपए रहा, जो दिसंबर के 28,054 करोड़ रुपए से लगभग 14 प्रतिशत कम है। यानी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा।

नवंबर में इक्विटी फंड्स में 29,911 करोड़ रुपए, तो वहीं उससे पहले अक्टूबर में 24,690 करोड़ रुपए का इनफ्लो आया था। जुलाई 2025 में इक्विटी फंड्स में अब तक सबसे ज्यादा 42,702 करोड़ रुपए का इनफ्लो आया था।

हालांकि, कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए जनवरी एक अच्छा महीना साबित हुआ। इस दौरान कुल मिलाकर 1.56 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जबकि दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपए की निकासी हुई थी। इससे साफ है कि निवेशकों का रुझान अब फिर से म्यूचुअल फंड की ओर बढ़ रहा है।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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Explainer: बांग्लादेश चुनाव 2026 एक बड़े बदलाव का मौका या पुरानी राजनीति की वापसी?

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होंगे. ये चुनाव देश के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. दरअसल, यह चुनाव 2024 के अगस्त माह में हुए छात्र आंदोलन के बाद पहली बार होने जा रहे हैं. GEN Z के इस आंदोलन ने ही तत्तकालीन बांग्लादेश पीएम शेख हसीना की सरकार को उखाड़ फेंका था. जिसके बाद हसीना भारत भाग आ गईं थीं और उनकी पार्टी अवामी लीग पर चुनाव लड़ने से रोक लगा दी गई.

फिलहाल बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार है. यूनुस नोबेल पुरस्कार विजेता हैं और 2024 के बाद से सुधारों की कोशिश कर रहे हैं. बता दें चुनाव के साथ-साथ एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी होगा जिसमें 'जुलाई चार्टर' पर राय ली जाएगी. यह चार्टर संविधान में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखता है जैसे राजनीतिक शक्ति का बेहतर बंटवारा और संस्थागत सुधार आदि.

 

कुल 300 सीटों पर करीब 2000 उम्मीदवार मैदान में

जानकारी के अनुसार बांग्लादेश चुनाव 2026 में कुल 300 सीटों पर करीब 2000 उम्मीदवार मैदान में हैं. कुल वोटरों की संख्या लगभग 12.8 करोड़ है, जिसमें पुरुष और महिलाओं की संख्या लगभग बराबर है. इसके अलावा चुनाव के बाद पार्टियां प्रदर्शन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भरेंगी. बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस बार वोटरों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट, बेरोजगारी, सामाजिक ध्रुवीकरण और धार्मिक उग्रवाद है. 

Bangladesh Election 2026 में किन दलों में है मुख्य मुकाबला? 

GEN Z आंदोलन के बाद बांग्लादेश में इस बार अभी तक बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के बीच मुख्य मुकाबला नजर आ रहा है. BNP के तारिक रहमान जो 17 साल के निर्वासन से लौटे के नेतृत्व में उनकी पार्टी सबसे आगे दिख रही है. वहीं, जमात-ए-इस्लामी की बात करें तो वह इस्लामी विचारधारा वाली पार्टी है जो छात्र आंदोलन के कुछ हिस्सों के साथ गठबंधन में भी है. उधर, NCP युवा मुद्दों पर काम करने का वादा करते हुए अपने प्रत्याशियों का प्रचार कर ही है.

अगर BNP जीती तो पुरानी दो-दलीय व्यवस्था की होगी वापसी

बहरहाल, इस चुनाव में किसकी जीत होगी और कौन हारेगा ये तो 13 फरवरी को पता चल जाएगा. लेकिन एक बात है कि यह चुनाव सिर्फ बांग्लादेश के लिए नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया के लिए भी अहम है. अगर BNP जीती तो पुरानी दो-दलीय व्यवस्था (BNP vs अवामी लीग) की वापसी हो सकती है. जमात की मजबूत स्थिति से धार्मिक राजनीति का बढ़ना दिख सकता है. इसके अलावा युवा पार्टियों का अच्छा प्रदर्शन 2024 के आंदोलन की विरासत को मजबूत करेगा.

ये भी पढ़ें: Bangladesh Election 2026: हसीना बाहर, ये 3 पार्टियां मैदान में; बांग्लादेश में 12 फरवरी को कौन बनेगा नया ‘बादशाह’?

 

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