Fatty Liver: हर 4 में से 1 भारतीय को है फैटी लिवर! Lancet रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता, लाइफस्टाइल है सबसे बड़ा कारण
Fatty Liver: भारत में फैटी लिवर की बीमारी एक साइलेंट डिजीज की तरह तेजी से फैलने लगी है. यह एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. अगर समय रहते इसकी रोकथाम नहीं की गई तो बड़ी मुसीबत हो सकती है. हाल ही में लांसेट की स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. अध्ययन के मुताबिक, Fatty Liver की बीमारी का कारण शराब नहीं बल्कि लोगों की बिगड़ी लाइफस्टाइल है. जी हां, लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी इतनी खराब हो गई है कि इससे लोगों का मेटाबॉलिज्म कमजोर रहने लगा है.
क्या कहती है रिसर्च?
इस रिसर्च में पाया गया है कि 40% भारतीयों में फैटी लिवर की समस्या है, वो भी बिना शराब पीए. यह खुलासा द लैंसेट के एक अध्ययन फेनोम इंडिया-सीएसआईआर हेल्थ कोहोर्ट पर बेस्ड है में हुआ था. अध्ययन के लिए भारत के 27 शहरों को चुना गया था, जहां के कुल 7,700 लोगों का हेल्थ डेटा का विशलेषण किया गया था. इसके बाद रिसर्चर्स का मानना है कि भारत के लिए फैटी लिवर एक साइलेंट एपिडेमिक बन गया है.
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NAFLD नहीं फैटी लिवर की बीमारी अब MASLD
दरअसल, ऐसा कहने के पीछे कारण यह माना जा रहा है कि फैटी लिवर को पहले NAFLD यानी नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज कहा जाता था. मगर अब यह मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर रोग यानी MASLD हो गया है. मेडिकल साइंस ने इसका नाम बदल दिया है. इसका मतलब होता है कि बीमारी का कारण शराब नहीं बल्कि शुगर, अधिक तेल, अधिक मसाले और पेट के आस-पास चर्बी का जमा होना है.
सबसे गंभीर तथ्य ये रहे
स्टडी के मुताबिक, कुल आबादी में 1.7% लोगों में लिवर फाइब्रोसिस था यानी लोगों का लिवर सख्त था. वहीं, जिन लोगों को फैटी लिवर पहले से था, उनमें यह आंकड़ा 6.3% तक पहुंच गया है. मोटापा और शुगर के मरीजों का जोखिम 8-9% तक था.
क्यों खतरनाक है Fatty Liver?
इस बीमारी को अक्सर साइलेंट डिजीज कहते हैं क्योंकि इसमें शुरुआती स्टेज में कोई लक्षण नहीं दिखते हैं. सामान्यतौर पर ब्लड टेस्ट भी कई बार नॉर्मल आते हैं. इसलिए, मरीज को तब पता चलता है, जब बीमारी काफी फैल चुकी होती है. समय से इलाज न किया जाए तो फैटी लिवर से लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस, लिवर फेलियर और लिवर का कैंसर भी हो सकता है.
न ज्यादा आराम, न ज्यादा भागदौड़! यूनानी चिकित्सा से जानें स्वस्थ जीवन का मंत्र
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। यूनानी चिकित्सा में सेहत को बनाए रखने का सबसे बड़ा मंत्र है हरकत-ओ-सुकून बदनी (शरीर की सही गति और आराम का संतुलन)। इसका मतलब शरीर को हिलना-डुलना भी चाहिए और समय पर आराम भी करना चाहिए। सही संतुलन बनाए रखने से हमारी सेहत, ताकत और मन दोनों मजबूत रहते हैं।
जब हम हल्की या मध्यम शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो शरीर के अंदर जमा गंदगी और अवशेष बाहर निकलते हैं। यूनानी चिकित्सा इसे तनकिया कहती है। यह सफाई हमारी त्वचा, अंग और पूरे शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करती है। वहीं जब हम आराम करते हैं, तो हमारी आंतरिक शक्ति पचाने और मरम्मत करने में पूरी तरह सक्रिय होती है। इस समय शरीर को अपनी ऊर्जा जमा करने और रोगों से लड़ने का मौका मिलता है।
लेकिन ध्यान रहे कि जेंडर के अलावा, हर व्यक्ति की उम्र, शरीर की बनावट और स्वभाव अलग होता है। इसलिए व्यायाम और आराम का तरीका भी अलग होना चाहिए। उदाहरण के लिए, गर्म मिजाज वाले लोग गर्मियों में हल्की गतिविधियां करें और सर्दियों में थोड़ी ज्यादा सक्रिय रहें। वहीं ठंडे मिजाज वाले लोग सर्दियों में हल्की एक्टिविटी और गर्मियों में नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि अपनाएं। यही कारण है कि यूनानी चिकित्सा हर किसी के लिए एक ही तरीका नहीं देती, बल्कि शरीर के अनुसार संतुलन बनाए रखने की सलाह देती है।
यूनानी चिकित्सा में कुछ आसान लेकिन असरदार बातें बताई गई हैं। सबसे पहले, रोज हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि करें। सुबह या शाम टहलना, हल्का दौड़ना, योग या स्ट्रेचिंग शरीर की सफाई और ताकत दोनों बढ़ाते हैं। दूसरा, आलस्य से बचें। लगातार बैठे रहने से शरीर सुस्त और कमजोर हो जाता है। थोड़ी-थोड़ी देर में उठें, स्ट्रेच करें या हल्की एक्टिविटी करें। तीसरा, व्यायाम अपने शरीर के अनुसार चुनें। ज्यादा थकावट या जोर देने से बचें ताकि शरीर की ऊर्जा खत्म न हो। चौथा, पर्याप्त आराम करें। नींद पूरी लें और दिन के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेकर शरीर को रिकवर होने दें और आखिर में, अत्यधिक मेहनत से बचें क्योंकि जरूरत से ज्यादा व्यायाम या काम शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।
--आईएएनएस
पीआईएम/एएस
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