Surya Grahan 2026: सावन अमावस्या पर लगेगा दुर्लभ सूर्य ग्रहण, फिर कैसे होगा स्नान, दान और तर्पण? क्या कहते हैं नियम, पंचांग से जानें मुहूर्त
Surya Grahan 2026 Sawan Amavasya Date: सावन अमावस्या के दिन साल 2026 का दुर्लभ सूर्य ग्रहण लगने वाला है. अमावस्या के दिन स्नान और दान करते हैं, जिससे पाप मिटते हैं. लेकिन इस बार सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लगने से स्नान, दान और पितरों का तर्पण कैसे होगा? आइए जानते हैं नियम और मुहूर्त.
22 घंटे एक ही आसन पर साधना: सावन में स्वामी कैलाशानंद गिरी जी के दर्शन के लिए उमड़ रहे देश-विदेश से श्रद्धालु
हरिद्वार। सावन मास के पावन अवसर पर हरिद्वार स्थित दक्षिण काली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और शिवभक्ति का प्रमुख केंद्र बन गया है। सावन के प्रथम सोमवार से ही देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज की कठोर तपस्या और भगवान शिव की अखंड आराधना के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। वहीं, भारत के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले श्रद्धालु भी ऑनलाइन माध्यम से रुद्राभिषेक, पूजा-अर्चना और साधना से जुड़कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज सावन मास में प्रतिदिन लगभग 22 घंटे तक एक ही आसन पर विराजमान होकर भगवान शिव का जप, ध्यान, रुद्राभिषेक और विशेष साधना करते हैं। उनकी यह कठिन तपस्या श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का विषय बनी हुई है।
लंबे समय तक एक ही आसन पर रहकर निरंतर साधना करने की उनकी अनुशासित दिनचर्या को देखने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दक्षिण काली मंदिर पहुंच रहे हैं।
श्रद्धालुओं का मानना है कि महाराज श्री की साधना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और शिवभक्ति का जीवंत संदेश है। उनकी तपस्या से प्रेरित होकर अनेक श्रद्धालु सावन में रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और शिव आराधना का संकल्प भी ले रहे हैं। मंदिर परिसर में पूरे माह भक्तिमय वातावरण बना हुआ है, जहां 'हर-हर महादेव' और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर रही है।
दक्षिण काली मंदिर प्रबंधन के अनुसार, इस वर्ष सावन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों में रहने वाले भक्त भी डिजिटल माध्यम से पूजा एवं रुद्राभिषेक में सहभागिता कर रहे हैं। इससे मंदिर की आध्यात्मिक गतिविधियां वैश्विक स्तर पर भी लोगों तक पहुंच रही हैं।
सावन के इस पावन पर्व में हरिद्वार का दक्षिण काली मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तप, साधना, अनुशासन और शिवभक्ति का ऐसा आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां श्रद्धालु दुर्लभ साधना के साक्षी बनने के साथ-साथ आत्मिक शांति और आध्यात्मिक प्रेरणा का अनुभव भी कर रहे हैं।
लेखक:
शान्तनु शुक्ल
धार्मिक मामलों के विशेषज्ञ एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज
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