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CJI के पद पर आसीन व्यक्ति को हर मिनट ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरना पड़ता है: NHRC के 33वें स्थापना दिवस पर न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम का संबोधन

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रामसुब्रमण्यम ने वर्तमान समय की न्याय व्यवस्था, वैश्विक चुनौतियों और डिजिटल युग के प्रभावों पर बेबाक विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत मंच पर उपस्थित थे। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) वी. रामसुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश के पद पर आसीन व्यक्ति को हर मिनट ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरना पड़ता है और ऐसा जरूरी नहीं कि हर बार परीक्षा लेने वाले सच्चे ही हों। यहां विज्ञान भवन में एनएचआरसी के 33वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) का पद देश का ‘‘सबसे महत्वपूर्ण, सबसे शक्तिशाली, सबसे सक्रिय और साथ ही सबसे संवेदनशील पद’’ बन गया है।

 उन्होंने ये टिप्पणियां उस समय कीं, जब कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत मंच पर मौजूद थे। उनकी ये टिप्पणियां दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं दायर किये जाने के बीच आई हैं। बाद में, आयोग ने अपने अध्यक्ष के संबोधन का मूलपाठ साझा किया, जिसमें उनके हवाले से कहा गया, ‘‘यहां मौजूद खास मेहमान शायद मेरी इस बात से सहमत होंगे कि आज सभी समाज मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं -- चाहे वह कुदरत के कहर की वजह से हो, या लोगों के आक्रोश के कारण।’’ 

उन्होंने अमेरिका स्थित एक अंतरराष्ट्रीय विचार समूह, कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस की एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जो समय-समय पर ग्लोबल प्रोटेस्ट ट्रैकर जारी करता है। उसके द्वारा 9 सितंबर 2026 को जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 महीनों में दुनिया भर में सरकार-विरोधी 107 प्रदर्शन हुए हैं और 57 से ज़्यादा देशों में व्यापक स्तर पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। इनमें से 17 प्रदर्शन ऐसे देशों में हुए हैं जो आजाद नहीं हैं। संबोधन के मूलपाठ के मुताबिक, इसका मतलब है कि ज़्यादातर विरोध-प्रदर्शन आज़ाद देशों में ही हुए हैं।

 एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘भारत के प्रधान न्यायाधीश का पद ऐसा है, जिस पर आसीन व्यक्ति को हर दिन, बल्कि हर मिनट ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरना पड़ता है। ऐसा जरूरी नहीं कि हर बार परीक्षा लेने वाले लोग सच्चे ही हों।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए विशेष रूप से ऐसे समय में जब प्रधान न्यायाधीश बहुत व्यस्त हैं तो मुख्य अतिथि बनने के हमारे आमंत्रण को उनका स्वीकार करना उल्लेखनीय है। मैं उनका बहुत आभारी हूं। धन्यवाद, प्रधान न्यायाधीश महोदय। मौका मिले तो शायद वह यहां रुकना भी पसंद करें।’’ हालांकि, उन्होंने अपनी इस टिप्पणी का विस्तार से कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। एनएचआरसी अध्यक्ष की इन टिप्पणियों पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों और प्रधान न्यायाधीश ने हल्के-फुल्के अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उल्लेख किया कि ठीक 33 साल पहले 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना हुई थी।

 उन्होंने कहा, ‘‘अपने अस्तित्व के पिछले 33 वर्षों में आयोग ने देश के लोगों के मानवाधिकारों को मजबूत करने और उनकी रक्षा करने में सराहनीय काम किया है।’’ एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि कुछ दशक पहले तक, मानवाधिकार के मुद्दों को देखने का नजरिया आम तौर पर ‘‘द्वि-आयामी’’ होता था। उन्होंने आगाह करते हुए कहा, ‘‘हम मानते थे कि यह मामला नागरिक बनाम ‘राज्य’ का है। लेकिन अब ऐसा नहीं है। सरकार द्वारा संचालित नहीं किये जाने वाले संस्थान भी अब बड़ी भूमिका निभाते हैं, खासकर डिजिटल क्रांति के बाद।’’

 उन्होंने रेखांकित किया कि डिजिटल जगत में हमारी राय को बदला जा सकता है, हमारी सोच को प्रभावित किया जा सकता है और हमारी शारीरिक व मानसिक गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। उन्होंने आगाह किया कि इस खतरनाक चलन को देखते हुए वह दिन दूर नहीं जब ‘‘मानव एक ऐसी मशीन बन जाएगा, जो खुद मशीन से भी ज़्यादा मशीनी होगा, और मशीन बिना मानवीय गुणों के मानव बन जाएगा।’’ आयोग के अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि आज की चुनौतियां एक सदी पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हैं। 

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि दुनिया भर के मानवाधिकार संस्थान ‘‘अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए खुद को नये परिवेश के अनुरूप तैयार करें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के 26 सबसे अमीर लोगों के पास उतनी संपत्ति है, जितनी कि विश्व के सबसे गरीब 3.8 अरब लोगों की कुल संपत्ति है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है कि जलवायु और संपत्ति इतनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, क्योंकि असल में इन दोनों की जड़ एक ही है: जीवाश्म ईंधन पर आधारित पूंजीवाद।

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अहमदाबाद में Cyber Crime Branch ने महिला उत्पीड़न मामले में 8 लोगों को किया गिरफ्तार

अहमदाबाद साइबर अपराध शाखा ने ऑनलाइन उत्पीड़न, सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाने, आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने और ब्लैकमेल करने के आरोपों में नौ प्राथमिकी दर्ज कर एक महिला समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है और तीन नाबालिगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। पुलिस ने सोमवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई ‘मिशन साइबर रक्षिका’ के तहत की गई।

इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को ऑनलाइन उत्पीड़न, पहचान की चोरी और ब्लैकमेल जैसे साइबर अपराधों से बचाना है। इसके तहत इंटरनेट पर महिलाओं को निशाना बनाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया मंचों से जुटाई गई जानकारी का तकनीकी विश्लेषण कर अलग-अलग टीमों ने आरोपियों का पता लगाया।

इसके बाद अहमदाबाद, गुजरात के अन्य इलाकों और महाराष्ट्र में कार्रवाई की गई। साइबर अपराध शाखा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया मंचों पर फर्जी अकाउंट के जरिए जिन महिलाओं को कथित तौर पर निशाना बनाया गया उनसे शिकायतें मिली थीं। पुलिस ने बताया कि निजी विवाद, रिश्तों में दरार, मतभेदों के बाद पैदा हुई नाराजगी और आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट कर सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स व लाइक्स बढ़ाने की कोशिश जैसे कारणों की वजह से ऐसे कृत्यों को अंजाम दिया गया।

पुलिस के अनुसार इसी तरह के एक मामले में, तीन नाबालिगों ने नवरात्रि के दौरान गरबा कर रही एक महिला के वीडियो कथित तौर पर एडिट किए और उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपने माता-पिता के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाए थे। इन वीडियो को प्रसारित कर वे अपने फॉलोअर्स और लाइक्स बढ़ाना चाहते थे।

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  Sports

SA vs AUS, Day-4: रन चेज में बिखरी दक्षिण अफ्रीका की टीम, ऑस्ट्रेलिया जीत से सिर्फ 6 विकेट दूर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में मेजबान दक्षिण अफ्रीका की हालत खराब हो गई है. खेल के चौथे दिन 421 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने 102 रन के स्कोर पर अपने 4 विकेट गंवा दिए हैं. ऐसे में अब मेहमान टीम को अंतिम दिन जीत के लिए 6 विकेट की जरूरत है, जबकि दक्षिण अफ्रीका को अगर मैच बचाना है तो उसे 319 रन और बनाने होंगे. Mon, 12 Oct 2026 22:58:19 +0530

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