चुनाव हारे तो शुरू की सब्जियों की खेती! अब सालाना ₹12 लाख कमा रहे औरंगाबाद के राजेंद्र यादव
Success Story Of Rajendra Yadav Aurangabad: बिहार के औरंगाबाद जिले के अति नक्सल प्रभावित देव प्रखंड से सफलता की एक अनोखी कहानी सामने आई है. यहां दुलारे गांव के रहने वाले पूर्व पैक्स अध्यक्ष राजेंद्र यादव ने राजनीति से संन्यास लेकर आधुनिक खेती को अपनाया और आज वे क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं. राजेंद्र यादव दो बार पैक्स अध्यक्ष रह चुके हैं, लेकिन 2019 में चुनाव हारने के बाद उन्होंने राजनीति की बजाय मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया. उद्यान विभाग के एक प्रशिक्षण शिविर से प्रेरणा लेकर उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ सब्जियों की व्यावसायिक खेती शुरू की. वर्तमान में राजेंद्र यादव करीब 30 बीघा जमीन पर बड़े पैमाने पर मूली की खेती कर रहे हैं. प्रति एकड़ 150 क्विंटल की उपज के साथ वे रोजाना 10 क्विंटल से अधिक मूली औरंगाबाद और आसपास के जिलों में सप्लाई करते हैं. इस आधुनिक बदलाव की बदौलत वे अब सालाना 12 लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. राजेंद्र की यह कहानी साबित करती है कि अगर सही तकनीक और जज्बा हो, तो खेती किसी भी कॉर्पोरेट नौकरी या राजनीति से बेहतर भविष्य दे सकती है.
विरासत का स्वाद, इंजीनियरिंग दिमाग! कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ लिट्टी-चोखा को बनाया ब्रांड, महीने का 2 लाख इनकम
Chandan Kumar Aurangabad Success Story: बिहार के युवाओं के लिए रिवर्स माइग्रेशन की एक शानदार मिसाल पेश की है औरंगाबाद के चंदन कुमार ने. पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर चंदन दिल्ली में एक अच्छी नौकरी कर रहे थे, लेकिन आज वे अपने पुश्तैनी बिजनेस 'भोला जी लिट्टी चोखा' को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. 1990 में चंदन के पिता ने महज ₹2 प्रति प्लेट से इस दुकान की शुरुआत की थी. कोविड काल में पिता की तबीयत बिगड़ने और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण चंदन ने कॉर्पोरेट करियर छोड़ घर लौटने का फैसला किया. पिछले 4 वर्षों से वे पूरी तरह इस व्यवसाय को संभाल रहे हैं. बिना लहसुन-प्याज और शुद्ध घी के स्वाद के कारण आज यहां रोजाना 500 से अधिक ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है. इस लिट्टी के दम पर चंदन आज महीने का ₹2 लाख से अधिक मुनाफा कमा रहे हैं. वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि 10 अन्य लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. चंदन का कहना है कि वे अब अपनी पुरानी सैलरी से कहीं अधिक पैसा अपने स्टाफ को वेतन के रूप में दे देते हैं.
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