पत्रकारिता के लिए PIB एक्रेडिटेशन अनिवार्य शर्त नहीं, CPI सांसद ने Amit Shah से की दखल की मांग
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (CPI) के राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने सोमवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह स्वतंत्र रिपोर्टिंग में बाधा डालकर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ "पुलिस की ज्यादतियों" को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शनों की कवरेज कर रहे पत्रकारों को परेशान करने और हिरासत में लेने की कथित कार्रवाई को रोकने की अपील की है। गृह मंत्री शाह को लिखे पत्र में CPI सांसद ने कहा, "मैं दिल्ली भर में CEC ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों को बड़े पैमाने पर परेशान किए जाने, हिरासत में लिए जाने और नज़रबंद किए जाने के ख़िलाफ़ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराने के लिए यह पत्र लिख रहा हूँ। राजधानी के कई हिस्सों से मिली रिपोर्टों से साफ़ पता चलता है कि पत्रकारों को बल प्रयोग करके उनके पेशेवर कर्तव्यों का पालन करने से रोका जा रहा है।
इसे भी पढ़ें: बेकाबू होती जा रही है महंगाई, CPI बढ़कर 5.54% हुई, प्याज हुआ 108% महंगा!
यह आरोप लगाते हुए कि स्वतंत्र पत्रकारों को अपना काम करने से रोका गया, उन्होंने कहा स्वतंत्र रिपोर्टिंग में बाधा डालकर, अधिकारी जनता की इस सोच को और मज़बूत करते हैं कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस की ज्यादतियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मीडिया हाउस के पत्रकारों को रिपोर्टिंग करने से रोका गया। उन्होंने दावा किया कि एक न्यूज़ पोर्टल की महिला संवाददाता को बेरहमी से घसीटा गया और हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा, प्रदर्शनों को कवर करने के लिए पत्रकारों के पास PIB एक्रेडिटेशन (मान्यता) होना ज़रूरी है। पुलिस की यह बार-बार की ज़िद बेतुकी और तर्कहीन है। मौजूदा एक्रेडिटेशन गाइडलाइंस बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रही हैं। 15-20 साल के अनुभव की ज़रूरतें भरोसेमंद डिजिटल न्यूज़ संगठनों के उदय को जगह नहीं दे सकतीं। उन्होंने लिखा PIB एक्रेडिटेशन को पत्रकारिता के लिए ज़रूरी शर्त या सार्वजनिक जगहों से रिपोर्ट करने का लाइसेंस नहीं माना जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि ऐसी पाबंदियां प्रेस की आज़ादी और जनता के सूचना के अधिकार को कमज़ोर करती हैं।
इसे भी पढ़ें: खाने-पीने की चीज़ें महंगी होने से सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% हुई
उन्होंने कहा कि इस मामले में कल सुप्रीम कोर्ट के दखल और संयुक्त राष्ट्र में जताई गई चिंताओं से इन तौर-तरीकों को खत्म करने की ज़रूरत और भी साफ़ हो गई है। लोकतंत्र में ऐसी मनमानी के लिए कोई जगह नहीं है। संतोष कुमार ने मांग की कि शाह तुरंत दिल्ली पुलिस को पत्रकारों को परेशान करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और उनके काम में रुकावट डालने से रोकने का निर्देश दें। साथ ही, यह सुनिश्चित करें कि वे उन इलाकों में जा सकें जहां वे कानूनी तौर पर अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, और सिर्फ़ PIB एक्रेडिटेशन न होने के आधार पर उनके साथ भेदभाव न किया जाए।
Supreme Court की ओर बढ़ रहे INDIA गठबंधन नेताओं को दिल्ली पुलिस ने रोका
‘वोट चोरी’ रोकने, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर रोक लगाने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च कर रहे विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं को सोमवार को पुलिस ने भगवान दास रोड पर रोक दिया। पुलिस ने भगवान दास रोड पर दो जगह अवरोधक लगा रखे थे। पहले अवरोधक को कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों के कार्यकर्ताओं ने हटा दिया।
इसके बाद उच्चतम न्यायालय के निकट लगाए गए दूसरे अवरोधक पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोक दिया गया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और ‘इंडिया’ गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेता एक एक ट्रक पर सवार होकर बाराखंबा रोड से उच्चतम न्यायालय के लिए रवाना हुए थे। कई नेता और कार्यकर्ता पैदल ही उच्चतम न्यायालय की तरफ रवाना हुए।
कई नेता बसों में सवार थे। इससे पहले विपक्षी दलों के नेता कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों में सवार होकर बाराखंबा रोड पहुंचे थे और वहां एकत्र होने के बाद उन्होंने उच्चतम न्यायालय की ओर मार्च शुरू किया। ‘इंडिया’ गठबंधन के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था।
कांग्रेस ने इस विरोध प्रदर्शन को ‘‘चलो दिल्ली—लोकतंत्र के लिए मार्च’’ नाम दिया है। इस मार्च में शामिल कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, ज्ञानेश कुमार और भाजपा के खिलाफ पुरजोर नारेबाजी की। राहुल गांधी ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा था कि वह और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य नेता उच्चतम न्यायालय जाएंगे तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करेंगे।
उन्होंने कहा था, ‘‘आज हम और इंडिया गठबंधन के नेता उच्चतम न्यायालय जाएंगे और याचिका दायर करेंगे। जो प्रतिरोध चल रहा है, वह एक दिन की बात नहीं है। हम लगातार यह कर रहे हैं।’’ गांधी ने केंद्र सरकार पर लोगों को दिल्ली पहुंचने से रोकने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी को ‘‘पूरी तरह से किले में तब्दील’’ कर दिया गया है और बड़ी संख्या में पुलिस तथा सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है।
विपक्ष की मांग है कि ‘‘वोट चोरी’’ पर रोक लगाई जाए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया रोकी जाए। इससे पहले, खरगे और गांधी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उनके समक्ष कथित ‘‘वोट चोरी’’ का मुद्दा उठाया जा सके और एक ज्ञापन सौंपा जा सके। प्रधान न्यायाधीश ने मुलाकात से इनकार करते हुए कहा था कि इससे जुड़े मुद्दे पहले से उच्चतम न्यायालय के समक्ष विचाराधीन हैं।
इसके बाद विपक्षी दलों ने उच्चतम न्यायालय का रुख कर याचिका दायर करने और अपना प्रस्तावित मार्च जारी रखने का फैसला किया। विपक्षी दल पिछले मंगलवार से चुनावों में ‘‘धांधली’’ और ‘‘वोट चोरी’’ को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
prabhasakshi








