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Bill Gates ने AI के खतरों पर जताई चिंता Sam Altman की सोच पर उठाए सवाल

एआई को लेकर दुनिया भर में बहस तेज हो रही है। कोई इसे इंसानों की जिंदगी आसान बनाने वाला बड़ा बदलाव मानता है, तो किसी को इसके बढ़ते असर से भविष्य की चिंता है। इसी बीच माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने ओपनएआई के प्रमुख सैम ऑल्टमैन की उस बात पर सवाल उठाया है, जिसमें उन्होंने एआई को लेकर जरूरत से ज्यादा डर फैलाने को गलत बताया था। गेट्स का कहना है कि एआई से जुड़े खतरे वास्तविक हैं और जिम्मेदार लोगों को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।

रविवार को जेक टैपर के साथ एक बातचीत में बिल गेट्स ने कहा कि जब लोग यह मानने लगते हैं कि एआई से पूरी मानवता खतरे में पड़ जाएगी, तब जोखिम को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि एआई को लेकर चिंता करना गलत नहीं है। उनके मुताबिक, यह तकनीक कारों, विमानों और दवाओं से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए इस पर उचित नियंत्रण जरूरी है। अगर इंसानों का इस तकनीक पर नियंत्रण कमजोर पड़ता है, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में कहा था कि एआई को लेकर कुछ लोगों की कल्पनाएं इतनी डरावनी हैं कि वे खराब विज्ञान कथाओं वाली फिल्मों जैसी लगती हैं। 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एआई को लेकर अंधे भरोसे और जरूरत से ज्यादा डर, दोनों से बचने की बात कही थी। ऑल्टमैन ने दो बड़े खतरों का जिक्र किया था। पहला, भविष्य में इंसानों का एआई पर नियंत्रण खो देना और दूसरा, इस तकनीक की ताकत कुछ गिने-चुने लोगों के हाथों में सिमट जाना।

बिल गेट्स का मानना है कि एआई को लेकर पूरी तरह छूट देने या इसके विकास को पूरी तरह रोकने के बजाय बीच का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया ने कारों, विमानों और दवाओं के लिए नियम बनाकर उनके इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने की कोशिश की है। एआई के मामले में भी ऐसा ही संतुलन जरूरी है। गेट्स ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी कहा कि सुरक्षा नियम हर नुकसान को रोक नहीं सकते, लेकिन गलत इरादे वाले लोगों को इस तकनीक का दुरुपयोग करने से रोकने में मदद कर सकते हैं।

बता दें कि गेट्स ने अगस्त में प्रकाशित अपने करीब 6,000 शब्दों के लेख में एआई से जुड़े 3 बड़े खतरों की पहचान की थी। इनमें नौकरियों का हमेशा के लिए खत्म होना, साइबर हमलों और जैविक आतंकवाद के लिए एआई का इस्तेमाल तथा बच्चों के विकास पर एआई आधारित साथियों का असर शामिल है। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारों को एआई के दौर में बदलाव संभालने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए नियम बनाने चाहिए। देखभाल जैसे कुछ काम इंसानों के लिए सुरक्षित रखने, रोबोट और एआई के इस्तेमाल पर कर लगाने तथा प्रभावित कर्मचारियों को दोबारा ट्रेनिग देने जैसे उपाय भी उन्होंने सुझाए हैं।

गेट्स ने यह भी कहा था कि दुनिया के सबसे खतरनाक आविष्कारों में शामिल किसी तकनीक की सुरक्षा केवल कंपनियों के अपने नियमों पर नहीं छोड़ी जा सकती। इस बहस में एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोडेई भी शामिल हैं। सितंबर में उन्होंने एआई के सबसे एडवांस रूपों के विकास की रफ्तार धीमी रखने और बाहरी विशेषज्ञों से कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कराने की जरूरत बताई थी।

दिलचस्प बात यह है कि गेट्स, ऑल्टमैन और अमोडेई तीनों एआई के खतरों को स्वीकार करते हैं, लेकिन नियमों की सख्ती और उन्हें लागू करने के समय को लेकर उनके विचारों में अंतर है। गेट्स अब अमेरिकी सांसदों के सामने भी इस मुद्दे को उठाने की योजना रखते हैं। उनका मानना है कि एआई से मिलने वाले फायदों का इस्तेमाल तभी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा, जब सरकारें और कंपनियां मिलकर इसके खतरों को कम करने के लिए जिम्मेदारी से काम कर रही हैं।

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बेकाबू होती जा रही है महंगाई, CPI बढ़कर 5.54% हुई, प्याज हुआ 108% महंगा!

मुख्य रूप से खाने-पीने की चीज़ों की कीमतें बढ़ने के कारण, सितंबर में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 प्रतिशत हो गई। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) द्वारा जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण और शहरी इलाकों के लिए महंगाई दर क्रमशः 6.08 प्रतिशत और 4.88 प्रतिशत रही। अगस्त में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) पर आधारित महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी। जनवरी में जारी नई इंडेक्स सीरीज़ में सितंबर की महंगाई दर सबसे ज़्यादा है। खाने-पीने की चीज़ों (फूड बास्केट) की महंगाई दर पिछले महीने के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई। पिछले हफ़्ते, महंगाई की चिंताओं के बीच रिज़र्व बैंक ने बेंचमार्क लेंडिंग रेट (रेपो रेट) को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया।

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सितंबर में खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई
जनवरी में नई इंडेक्स सीरीज़ जारी होने के बाद से सितंबर में महंगाई दर अपने सबसे ऊँचे स्तर पर थी। खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले महीने यह 5.97 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी के साथ, महंगाई दर रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई है, हालाँकि यह सेंट्रल बैंक की 2-6 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा के भीतर ही है। महंगाई की चिंताओं के बीच रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने पिछले हफ़्ते रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था।


प्याज की कीमतों में भारी बढ़ोतरी


कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) से मापी जाने वाली खाने-पीने की चीज़ों की महंगाई दर अगस्त में 5.97 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 7.74 प्रतिशत हो गई। मुख्य चीज़ों में प्याज की कीमतों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्याज की महंगाई दर अगस्त के 48.78 प्रतिशत से बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई दर 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत हो गई, जबकि नींबू की कीमतें पिछले महीने के 15.15 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर 36.41 प्रतिशत हो गईं।

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अन्य सभी सेक्टर में भी महंगाई बढ़ी


इनके अलावा, पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन और अन्य सामान व सेवाओं में महंगाई दर सितंबर में 13.75 प्रतिशत रही, जबकि रेस्टोरेंट और होटलों में रहने-खाने की सेवाओं की कीमतें 9.36 प्रतिशत बढ़ गईं। ट्रांसपोर्ट में महंगाई दर 5.01 प्रतिशत रही, जिसमें निजी गाड़ियां चलाने का खर्च 7.46 प्रतिशत बढ़ गया। हेल्थ सेक्टर में महंगाई दर 1.40 प्रतिशत; हाउसिंग और यूटिलिटीज़ में 2.74 प्रतिशत; और एजुकेशन सेवाओं में 3.94 प्रतिशत रही।

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SA vs AUS, Day-4: रन चेज में बिखरी दक्षिण अफ्रीका की टीम, ऑस्ट्रेलिया जीत से सिर्फ 6 विकेट दूर

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में मेजबान दक्षिण अफ्रीका की हालत खराब हो गई है. खेल के चौथे दिन 421 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दक्षिण अफ्रीका ने 102 रन के स्कोर पर अपने 4 विकेट गंवा दिए हैं. ऐसे में अब मेहमान टीम को अंतिम दिन जीत के लिए 6 विकेट की जरूरत है, जबकि दक्षिण अफ्रीका को अगर मैच बचाना है तो उसे 319 रन और बनाने होंगे. Mon, 12 Oct 2026 22:58:19 +0530

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