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राहुल गांधी के बयान पर BJP का पलटवार, शिवराज सिंह बोले “राम का विरोध करने वाले शिव की बारात की बात कर रहे”

वोट चोरी के विरोध में आंदोलन कर रहे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका लगाने का ऐलान किया है, उन्होंने आज प्रेस कांफ्रेंस की और लोगों से इसमें उनका साथ देने के अपील की, देश की जनता से कनॉट प्लेस में इकट्ठा होने का आह्वान किया, उन्होंने इसे शिव की बारात कहा, भारतीय जनता पार्टी ने इसपर कड़ा ऐतराज जताया और पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा श्री राम का विरोध करने वाले शिव जी की बारात की बात कर रहे हैं। ये शिव जी की बारात नहीं है, अराजकता फैलाने वाले दंगाइयों की जमात है।

राहुल गांधी के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पार्टी मुख्यालय में मीडिया से बात की उन्होंने कहा, पिछले कई वर्षों से कांग्रेस लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही है। हद तो ये हो गई कि पार्टी चुनाव की हार का दोष भी संवैधानिक संस्थानों पर मढ़ती है। कांग्रेस की हार का सिलसिला लगातार जारी है।

कांग्रेस की हार का कारण विचार शून्य नेतृत्व

अभी उपचुनाव में क्या हुआ? असम में कांग्रेस की स्थिति क्या है? स्थानीय निकाय चुनाव में त्रिपुरा में क्या हुआ, राजस्थान में क्या हुआ, उससे पहले हिमाचल में क्या हुआ? एक के बाद एक चुनाव में हारना और उसकी खीज आंदोलन कर सड़कों पर निकालना, ये कांग्रेस की नियति बन गई है। लेकिन आज मैं कांग्रेस के मित्रों से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस की हार का कारण चुनाव आयोग नहीं है, कांग्रेस की हार का कारण कांग्रेस का विचार शून्य नेतृत्व  है।

नता की नजरों से, जनता के दिलों से भी उतर गई  है कांग्रेस 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा,  आज कांग्रेस की हालत क्या है? उत्तर प्रदेश में जूतमपैजार हो रही है, पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष बदलना पड़ा है। अलग-अलग जगह नेतृत्व के झगड़े चल रहे हैं। मैं फिर से कह रहा हूं कि हार का कारण कांग्रेस का नेतृत्व है जो देश को नहीं जानता, देश की जनता को नहीं जानता, यहां की परंपराओं को नहीं जानता… कांग्रेस नेतृत्वहीन है। नाच न जाने आंगन टेढ़ा, कांग्रेस जनता की नजरों से भी उतर गई है और जनता के दिलों से भी उतर गई है।

शिवराज ने बताया कितने कितने वर्षों से किन राज्यों में नहीं कांग्रेस 

उन्होंने कहा ये क्या संविधान की बात करेंगे, 90 से ज्यादा बार उन्होंने चुनी हुई सरकारों को बदलने का पाप किया है। कपड़ों की तरह ये मुख्यमंत्री बदलते थे। देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर आपातकाल इन्होंने लगाया। आज कांग्रेस का हाल कैसा है? देश के प्रमुख राज्यों में कांग्रेस का लगभग सफाया हो चुका है। तमिलनाडु में लगभग 59 वर्षों से कांग्रेस नहीं है, पश्चिम बंगाल में 49 वर्षों से, सिक्किम में 42 वर्षों से, उत्तर प्रदेश में 37 वर्षों से, बिहार में 36 वर्षों से, त्रिपुरा में 33 वर्षों से, गुजरात में 31 वर्षों से, ओडिशा में 26 वर्षों से, नागालैंड में 23 वर्षों से, गोवा में 15 वर्षों से, दिल्ली में वर्षों से… पूरा हिसाब देखिए, कांग्रेस बची कहां है? तीन-चार राज्य अगर छोड़ दें तो कांग्रेस दूसरे राज्यों में केवल जूनियर पार्टी बनकर रह गई है।

कुर्सी के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही कांग्रेस 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कांग्रेस कुर्सी के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर हमले कर रही है। वो जनता का दिल नहीं जीत सकती है, इसलिए परेशान कांग्रेस संवैधानिक संस्थानों को बदनाम करके, सड़कों पर अराजकता और दंगे फैलाकर, झूठ बोलकर, गुमराह करके अब कुर्सी चाहती है। कांग्रेस की हालत ये है कि कोर्ट का फैसला उसके पक्ष में नहीं आता है तो कोर्ट पर हमले करती है। चुनाव हारती है, तो चुनाव आयोग पर हमला करती है। भारतीय सेना जब आतंकवादियों को ठोकती है, तो सेना पर हमले करती है। भारत की प्रगति और 140 करोड़ देशवासियों के भरोसे को बचा पाना कांग्रेस के लिए असंभव हो गया है। कांग्रेस अब देश को तोड़ने वाली ताकतों के साथ हाथ मिला रही है। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह दिशाहीन है।

ये शिव की बारात नहीं, अराजकता फैलाने वाले दंगाइयों की जमात  

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, राहुल गांधी अभी कह रहे थे कि कांग्रेस तो शिव जी की बारात है। श्री राम का विरोध करने वाले शिव जी की बारात की बात कर रहे हैं। ये शिव जी की बारात नहीं है, अराजकता फैलाने वाले दंगाइयों की जमात है । उन्होंने कहा कांग्रेस ऐसे उपद्रवियों का समूह है जो सड़कों पर अराजकता फैलाना और व्यवस्था का विरोध करना चाहते हैं। कांग्रेस और INDI गठबंधन एक खतरनाक कॉम्बिनेशन बन गए हैं। अब यह विदेशी ताकतों के हाथों की कठपुतली बन गई है। सत्ता के लिए वे कभी बम बनाने वालों, कभी कॉकरोच, कभी जॉर्ज सोरोस जैसी देश-विरोधी ताकतों और कभी NGO का सहारा लेते हैं।

 

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जंतर-मंतर प्रदर्शन-स्थल की सूची से बाहर, गृह मंत्रालय का बड़ा फैसला, दिल्ली में प्रोटेस्ट के लिए तीन नए स्थान निर्धारित

दिल्ली में लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहे जंतर-मंतर को अब प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने यह बदलाव किया है। दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने 11 अक्टूबर को स्थायी आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित करने की व्यवस्था समाप्त कर दी।

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। नए आदेश के बाद प्रदर्शन आयोजित करने के लिए निर्धारित तीन स्थलों का इस्तेमाल करना होगा। अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है।

गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर निर्णय

दिल्ली पुलिस के स्थायी आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर अन्य उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में दी गई अधिसूचना रद्द कर दी गई। आसान भाषा में इसका अर्थ ये हुआ कि अब जंतर मंतर को धरना प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा लिया गया है।

प्रोटेस्ट के लिए तीन स्थान निर्धारित

दिल्ली पुलिस के नए आदेश से जंतर-मंतर का निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में दर्जा समाप्त हो गया है। इसकी जगह रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को चुना गया है। इन स्थानों पर प्रदर्शन के लिए अनुमति लेने की प्रक्रिया, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य शर्तों का विस्तृत ब्योरा एसओपी जारी होने के बाद स्पष्ट होगा। फिलहाल आदेश में इन तीनों स्थानों को नए निर्धारित प्रदर्शन स्थलों के रूप में अधिसूचित किया गया है।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के बीच आया बड़ा फैसला

यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और अन्य समूहों लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जुटने की कोशिश कर रहे लोगों को भारी सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

जंतर-मंतर पर आंदोलनों का इतिहास

दिल्ली में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में इस्तेमाल करने का सिलसिला 1993 के आसपास शुरू हुआ था। इससे पहले राजधानी में विरोध-प्रदर्शनों का सबसे प्रमुख और प्रभावशाली केंद्र इंडिया गेट के पास बोट क्लब के लॉन हुआ करते थे। अक्टूबर 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बोट क्लब पर जुटे थे। बाद में बोट क्लब पर सभाओं और प्रदर्शनों को प्रतिबंधित कर दिया गया।

बोट क्लब पर पाबंदी के बाद 1993 में जंतर-मंतर धीरे-धीरे दिल्ली का प्रमुख विरोध स्थल बन गया। इसे लेकर कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई थी लेकिन यह जगह संसद के करीब होने के बावजूद सीमित क्षेत्र और दो मुख्य प्रवेश-निकास बिंदुओं के कारण पुलिस के लिए नियंत्रित करना आसान थी। सीमित जगह में छोटे-मध्यम स्तर के प्रदर्शन यहाँ आयोजित होने लगे, जबकि बड़े आयोजनों के लिए रामलीला मैदान का इस्तेमाल जारी रहा। अगले तीन दशकों तक जंतर-मंतर राजनीतिक दलों, किसान संगठनों, छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पेंशनरों और न्याय की मांग करने वाले लोगों के लिए सबसे अहम पता बन गया। अन्ना हजारे का लोकपाल आंदोलन, निर्भया आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन और कई अन्य बड़े आंदोलन यहीं से जुड़े रहे।

 

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