भारत के लिए मुक्त व्यापार समझौतों से 85 ट्रिलियन डॉलर के बाजार खुलेंगे : पीयूष गोयल
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि भारत ने जो नए मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, उनसे देश को अगले डेढ़ साल या उसके आस-पास उन विकसित देशों के बाजारों तक प्राथमिकता आधार पर पहुंच मिलेगी, जिनकी कुल जीडीपी 85 ट्रिलियन डॉलर की है।
राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली डायलॉग: भविष्य के लिए तैयार भारत की नीतियां कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, हम ग्लोबल मार्केट का हिस्सा बनना चाहते हैं और लोगों, नौकरियों, स्टार्टअप्स और युवाओं के लिए नए मौके बनाना चाहते हैं। इस प्रक्रिया में हम दोहरी रणनीति अपनाएंगे। इसके लिए हमें दुनिया की बेहतरीन टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा, साथ ही ऐसे क्षेत्रों की पहचान भी करनी होगी जिनमें नौकरी और बिजनेस के विकास की जबरदस्त संभावनाएं हों।
विकास के क्षेत्र के तौर पर पर्यटन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, जरा पर्यटन की संभावनाओं के बारे में सोचिए। यह एआई-प्रूफ है। एआई सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा देने की क्षमता को बेहतर बना सकता है।
मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत के लिए भारत की रणनीति बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ट्रेड डील पर बातचीत में मेरा पक्ष बहुत सीधा है। आज हम 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हैं और आईएमएफ के अनुसार हमारी खरीदने की क्षमता पहले से ही 16 ट्रिलियन डॉलर है। एक देश के तौर पर हमारी क्षमता बहुत बड़ी है।
उन्होंने कहा कि भारत की 1.4 अरब की आबादी, डेमोग्राफिक फायदा और विकास की रफ्तार इसे कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं से अलग बनाती है, जो अधिक उम्र के लोगों और धीमी विकास दर जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं।
गोयल ने कहा कि भारत की व्यापार रणनीति में बातचीत शुरू होने से पहले कमजोर सेक्टर की पहचान करना और ज्यादा बाजार तक पहुंच के संभावित असर का सावधानी से आकलन करना शामिल है।
उन्होंने कहा कि विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए किन सेक्टर को खोला जाए और किन सेक्टर को सुरक्षा की जरूरत है, यह तय करने से पहले सरकार संवेदनशील क्षेत्रों की एक लिस्ट बनाती है। इसमें खास तौर पर किसान, मछुआरे और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) शामिल होते हैं।
गोयल ने आगे कहा कि भारत हर देश की आर्थिक संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए व्यापार से जुड़ी बातचीत करता है।
उन्होंने कहा, ज्यादातर बातचीत मैं एक बुनियादी नियम के साथ शुरू करता हूं: आप मेरी संवेदनशीलता का सम्मान करें, मैं आपकी संवेदनशीलता का सम्मान करूंगा। उन्होंने आगे कहा कि इस तरीके से बातचीत को आसान बनाने में मदद मिलती है।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
केंद्र सरकार का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बड़ा निर्देश, अस्पतालों में इलाज के शुल्क प्रमुखता से किए जाएं प्रदर्शित
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि अस्पताल और अन्य क्लिनिकल प्रतिष्ठान अपनी सेवाओं और सुविधाओं के लिए लिए जाने वाले शुल्क को प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इस कदम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और मरीज-केंद्रित व्यवस्था को मजबूत करना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में कहा है कि संबंधित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और इलाज व स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े शुल्क की जानकारी मरीजों और उनके परिजनों को आसानी से दिखाई और उपलब्ध हो।
मंत्रालय के अनुसार, उपचार शुल्क की स्पष्ट जानकारी मिलने से मरीज और उनके परिवार इलाज पर होने वाले संभावित खर्च को पहले से समझ सकेंगे। इससे उन्हें बेहतर वित्तीय योजना बनाने और सूचित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। साथ ही बिलिंग को लेकर होने वाले भ्रम और विवाद भी कम होंगे तथा स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ेगा।
मंत्रालय ने कहा कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी और मरीजों के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पत्र में क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 और क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 का उल्लेख किया गया है। इन नियमों के तहत संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में क्लिनिकल प्रतिष्ठानों को अपनी सभी सेवाओं और सुविधाओं की दरें प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। शुल्क सूची अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषा में भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि मरीजों और उनके परिजनों को जानकारी आसानी से समझ में आ सके।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में केंद्रीय कानून लागू नहीं है, वहां भी स्वास्थ्य सुविधाओं का नियमन राज्य स्तर के नियमों के तहत किया जाता है और उनमें से कई नियमों में भी सेवा शुल्क प्रदर्शित करने के प्रावधान मौजूद हैं।
स्वास्थ्य सचिव ने याद दिलाया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए इन नियमों को लागू करने और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की है।
मंत्रालय ने विदेशी मरीजों के लिए भी अधिक पारदर्शिता पर जोर दिया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को मेडिकल वीजा और आयुष वीजा पर भारत आने वाले मरीजों के लिए उपलब्ध पैकेज दरों को प्रमुखता से प्रदर्शित करने के लिए प्रोत्साहित करें।
मंत्रालय का मानना है कि इससे विदेशी मरीजों को उपचार से जुड़ी लागत की बेहतर जानकारी मिलेगी, कीमतों से जुड़े विवाद कम होंगे और चिकित्सा एवं आयुष उपचार के लिए भारत की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।
--आईएएनएस
डीबीपी
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