मैहर में कार और बाइक की जोरदार भिड़ंत, 2 की मौत, चालक फरार
मैहर में एक भीषण सड़क हादसा देखने को मिला। यहां स्कॉर्पियो की टक्कर से एक बैंक मैनेजर और कर्मचारी की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक ये हादसा मैहर रीवा राष्ट्रीय राजमार्ग 30 स्थित तमस नदी के पुल पर हुआ। जिसमें दो लोगों की जान चली गई।
जानकारी के मुताबिक रविवार की रात एक बाइक और स्कॉर्पियो की इस रास्ते पर आमने-सामने टक्कर हो गई। बाइक पर माइक्रोफाइनेंस मैनेजर और कोलियर कर्मचारी सवार थे। दोनों की मौत हो गई। स्कॉर्पियो का आगे का हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। जो लोग इस वाहन में सवार थे वह मौके से करार हो गए हैं।
रात को हुई जोरदार टक्कर
खबरों के अनुसार रविवार रात 10:30 बजे के करीब ये हादसा हुआ है। बाइक पर सवार दोनों व्यक्ति रीवा की तरफ जा रहे थे और गाड़ी मैहर की तरफ आ रही थी। इस दौरान तमस नदी के पुल पर दोनों वाहनों की टक्कर हो गई। हादसे में दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अस्पताल ले जाते समय हुई मौत
जैसे ही घटना की सूचना मिली पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को मैहर के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टर ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान 28 वर्षीय शिवम बाथरे निवासी शाहपुर भिटौनी जिला जबलपुर और 32 वर्षीय सुजीत निवासी रामपुर बाघेलान जिला सतना के रूप में हुई है। इनमें से शिवम माइक्रोफाइनेंस कंपनी में ब्रांच मैनेजर था। 15 दिन पहले ही उसके घर में बेटे का जन्म हुआ था। वहीं सुजीत एक कोलियरी में सुपरवाइजर के पद पर नौकरी करता था। उसकी एक बेटी है।
ट्रेन में हुई थी पहचान
यह भी सामने आया है कि शिवम छुट्टी होने के चलते अपने घर जबलपुर गया हुआ था। उसने बाइक मैहर रेलवे स्टेशन पर खड़ी कर दी थी। ट्रेन से लौटते समय उसकी मुलाकात सुजीत से हुई। दोनों की जान पहचान हुई और ट्रेन से उतरने के बाद यह बाइक से अमरपाटन की तरफ जा रहे थे। तभी तमस नदी के पुल पर हादसे का शिकार हो गए।
फरार हुआ वाहन चालक
इस घटना के बाद स्कार्पियो सवार लोग अपना वाहन मौके पर छोड़कर गायब हो गए। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। गाड़ी में कौन कौन सवार था, हादसा कैसे हुआ इसके संबंध में जानकारी निकाली जा रही है।
मंडला: मुख्यमंत्री यादव बोले-कान्हा एशिया का सबसे बड़ा नेशनल पार्क, हर नागरिक वन्य प्राणियों के नैसर्गिक जीवन निहारने एक बार जरूर आएं
कान्हा नेशनल पार्क केवल देश ही नहीं, बल्कि एशिया के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है। सघन वनों से आच्छादित इस पार्क मुख्यत बाघ, चीता, लकड़बग्घा, हाथी एवं अन्य कई वन्य जीवों से समृद्ध है। यहां वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां हैं। हर नागरिक को कान्हा की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीव विरासत को देखने के लिए यहां जरूर आना चाहिए। यह बातें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को मंडला जिले के कान्हा किसली में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा के दौरान कहीं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्बसाहट प्रोजेक्ट बड़ी सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा और उनकी सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों (वाइल्ड बफेलो) के पुनर्वास की प्रक्रिया प्रारंभ की है। रविवार. 11 अक्टूबर को ही काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से यहां 6 मादा और 8 नर जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में विमुक्त किया है।
मुख्यमंत्री यादव ने आगे कहा कि प्रदेश के वनों में टाइगर, चीता, लेपर्ड, मगर, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हमारे वन्य जीव प्रदेश का गौरव पर्यटन क्षेत्र में बढ़ा रहे हैं। सरकार वन, वन्य जीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। इन प्रयासों से प्रदेश की जैव विविधता को सुरक्षित रखने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसे वन्य जीवों के संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे प्रयास हमारी प्राकृतिक धरोहर को और समृद्ध बना रहे हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का विषय है। प्रदेश में बारहसिंगा को भी पुनर्जीवन मिला है। मुख्यमंत्री यादव ने सभी वन्य जीव प्रेमियों, पर्यटकों और नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वन्य प्राणियों के साहचर्यपूर्ण नैसर्गिक जीवन को निहारने के लिए कम से कम एक बार कान्हा नेशनल पार्क जरूर आएं।
अगले तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य
गौरतलब है कि रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके 8 जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था।
प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया। इस तरह कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को सभी विमुक्त किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
कान्हा नेशनल पार्क केवल देश ही नहीं, बल्कि एशिया के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है। यहां वन्यजीवों की अनेक प्रजातियां हैं। हर नागरिक को कान्हा की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध वन्यजीव विरासत को देखने के लिए यहां जरूर आना चाहिए।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के मार्गदर्शन में प्रदेश में प्रोजेक्ट चीता भी सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही, असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में विमुक्त किया गया है : CM
@DrMohanYadav51 #CMMadhyaPradesh #MadhyaPradesh
— Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) October 12, 2026
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