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भारत बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति का नया केंद्र, एआई और बदलते पूंजी प्रवाह से बढ़ेंगे अवसर: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह में बदलाव, भू-राजनीतिक आधार पर बंटते व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत विकास की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। सोमवार को जारी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजी प्रवाह, व्यापारिक रिश्तों और उद्योगों की संरचना तेजी से बदल रही है। एआई क्रांति शुरू हो चुकी है, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है और शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक ने कहा कि इन सभी बदलावों के बीच भारत विकास में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार नेटवर्क 2035 तक देश की जीडीपी में 140 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे घरेलू सुधार इन लाभों को और बढ़ा सकते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले की तुलना में अधिक केंद्रित और राजनीतिक होता जा रहा है। प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश मित्र देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है, जबकि निवेश का बड़ा हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है।

भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और विभिन्न देशों द्वारा दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की अपनी गति बनाए रखे।

रिपोर्ट के मुताबिक, एआई भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुनियादी ढांचे की सीमाएं एआई से मिलने वाले लाभ को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं। विशेष रूप से भारत का आईटी सेवा क्षेत्र अवसरों और चुनौतियों दोनों का सामना करेगा। एआई जहां कंपनियों को उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर ले जा सकता है, वहीं स्वचालन कम लागत वाले श्रम आधारित मॉडल को चुनौती भी दे सकता है।

रिपोर्ट में भारत के शहरीकरण को भी एक बड़ी ताकत बताया गया है। इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं। यदि नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग योजना को और मजबूत किया जाता है, तो यह शहरी आबादी उत्पादकता वृद्धि का एक बड़ा स्रोत बन सकती है।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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कौन हैं ममता चौधरी, जिनसे भिड़े अजय राय और लखनऊ कांग्रेस दफ्तर में चले जूते-चप्पल...

Who is Mamta Chaudhary: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सड़क पर आ गई है. दरअसल, रविवार को लखनऊ के पार्टी मुख्यालय में नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' के पदभार ग्रहण के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के समर्थक आपस में भिड़ गए. 

हुआ कुछ ऐसा कि पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं में धक्का-मुक्की हुई और हाथों में जूते-चप्पल तक दिखे. इसी घटना के बाद ममता चौधरी का नाम अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है. आइए आपको बताते हैं कि ममता चौधरी कौन हैं और उनकी अजय राय से अदावत कब से है. 

कौन हैं ममता चौधरी?

जानकारी के मुताबिक ममता चौधरी उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की महिला विंग (मध्य क्षेत्र) की अध्यक्ष हैं. वे दलित समुदाय की धोबी जाति से आती हैं और लंबे समय से कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे और महिला कांग्रेस की गतिविधियों में सक्रिय रही हैं. उनके पति का नाम मनीष कुमार तिवारी बताया जाता है.

क्या ममता चौधरी किसी चुनावी पद पर भी हैं?

ममता चौधरी लखनऊ के मालवीय नगर वार्ड से कांग्रेस की पार्षद हैं और नगर निगम में पार्टी का प्रतिनिधित्व करती हैं. बता दें साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें लखनऊ की आरक्षित मोहनलालगंज सीट से उम्मीदवार बनाया था लेकिन उन्हें सिर्फ 2,990 वोट मिल सके थे.

11 अक्टूबर को कांग्रेस मुख्यालय में आखिर हुआ क्या?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पार्टी की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण का कार्यक्रम चल रहा था. इसी बीच अजय राय अपने समर्थकों के साथ मुख्यालय पहुंचे. आरोप है कि इस दौरान ममता चौधरी की तरफ से उनकी मौजूदगी पर तीखी टिप्पणी की गई, जिसके बाद अजय राय के समर्थक भड़क गए और माहौल बिगड़ गया.

दोनों पक्षों का अपना-अपना दावा क्या है?

अजय राय ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से शिकायत करते हुए अनुशासनहीनता करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की. उनके खेमे का कहना है कि ममता चौधरी की तरफ से अपशब्दों का इस्तेमाल हुआ. वहीं, ममता चौधरी ने रोते हुए आरोप लगाया कि वे आराधना मिश्रा के स्वागत के लिए रास्ता बनवा रही थीं तभी अजय राय उन पर चिल्लाने लगे. उनके मुताबिक अजय राय के समर्थकों और साथ आए बाहरी लोगों ने गाली-गलौज और मारपीट की. दोनों पक्षों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है.

घटना के बाद अजय राय को कैसे मनाया गया?

मामला बिगड़ता देख कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी और इमरान मसूद ने अजय राय को शांत कराया. बताया जा रहा है कि अजय राय पहले कार्यक्रम से नाराज होकर बाहर निकल गए थे लेकिन समझाने के बाद वापस लौटे और बाकी कार्यक्रम में शामिल हुए. हालांकि कुछ रिपोर्टों के मुताबिक वे नई प्रदेश अध्यक्ष की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं पहुंचे.

अजय राय की क्या मांग है और पार्टी का क्या रुख है?

अजय राय ने ममता चौधरी को पार्टी से बाहर करने की मांग की है. सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि उन्हें मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है. फिलहाल पार्टी की तरफ से किसी औपचारिक कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों पक्ष अपने-अपने आकाओं को साधने में और अपना पक्ष मजबूत करने में लगा हुआ है.

अजय राय और ममता चौधरी के बीच यह तनातनी पुरानी है?

सियासी गलियारों में चर्चा है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है. कहा जाता है कि अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी ममता चौधरी कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से उनके फैसलों पर सवाल उठाती रही हैं. यह भी चर्चा है कि अजय राय को पद से हटाए जाने की प्रक्रिया में ममता चौधरी की भूमिका रही, जिससे वे उनसे नाराज चल रहे थे. हालांकि ये बातें सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं, इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है.

क्या ममता चौधरी को आराधना मिश्रा खेमे का माना जाता है?

पार्टी के भीतर यह चर्चा आम है कि ममता चौधरी नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा के गुट के करीब मानी जाती हैं. इसकी एक वजह उनके पति का कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी से करीबी रिश्ता बताया जाता है. 

इस घटना का कांग्रेस की चुनावी तैयारी पर क्या असर पड़ सकता है?

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 2027 के चुनाव की तैयारी में है और संगठन में बदलाव के साथ नई टीम खड़ी की जा रही है. ऐसे वक्त में नई प्रदेश अध्यक्ष के पहले ही दिन खुलकर सामने आई गुटबाजी पार्टी के लिए असहज स्थिति है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आराधना मिश्रा के सामने सबसे पहली चुनौती यही होगी कि वे अलग-अलग खेमों को साथ लेकर चल पाएं. अब सबकी नजरें इस पर हैं कि पार्टी नेतृत्व इस मामले में जांच के बाद किस तरह की कार्रवाई करता है. देखना यह होगा कि कार्रवाई दोनों पक्षों पर होती है या किसी एक पर और क्या इससे पार्टी के भीतर की दरार भरती है या और गहरी होती है.

'रास्ता छोड़ो, अध्यक्ष जी आ रहे हैं' पर भड़कीं ममता चौधरी, लखनऊ कांग्रेस दफ्तर में जमकर चले जूते

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