Ajay Rai के हटने से भड़का Power Tussle, लखनऊ कांग्रेस दफ्तर में गुटबाजी खुलकर सामने आई
उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में नेतृत्व में बदलाव का मकसद संगठन के लिए एक नए दौर की शुरुआत करना था। लेकिन रविवार को जब आराधना मिश्रा 'मोना' ने राज्य कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाला, तो पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। इस घटना ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रही राज्य इकाई के भीतर गुटीय तनाव और अनिश्चितता को उजागर कर दिया। मामला तब बिगड़ा जब राज्य के निवर्तमान अध्यक्ष अजय राय और महिला कांग्रेस नेता ममता चौधरी के बीच बहस हो गई। लेकिन यूपी कांग्रेस कमेटी के हेडक्वार्टर में हुई यह झड़प सिर्फ़ इस बात तक सीमित नहीं थी कि नए अध्यक्ष के स्वागत के दौरान कौन कहाँ खड़ा होगा। इससे अलग-अलग गुटों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अधिकार, पहचान और भविष्य को लेकर चल रही खींचतान भी खुलकर सामने आ गई।
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नेतृत्व में बदलाव से राज्य इकाई में सत्ता का संतुलन बदल गया था। राय के समर्थक, जिन्होंने उनके नेतृत्व में काम किया था, उन्हें एक नई व्यवस्था का सामना करना पड़ा, जबकि मिश्रा का समर्थन करने वाले अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते थे क्योंकि उन्होंने कमान संभाली थी। इसलिए, यह समारोह इस बात की परीक्षा बन गया कि निवर्तमान नेतृत्व नए अध्यक्ष के लिए कैसे रास्ता बनाता है और नई टीम कितनी जल्दी अपना अधिकार स्थापित कर पाती है।
इस टकराव से यह भी पता चला कि कैसे एक छोटी सी लगने वाली असहमति भी ऐसी पार्टी में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है, जहाँ संगठनात्मक पदों और वरिष्ठ नेताओं तक पहुँच का बहुत महत्व होता है। कांग्रेस के नए कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने सोमवार को इस रिपोर्टर से कहा कि रविवार को जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं से गलती हुई। उन्हें यूपी में पार्टी को खड़ा करने में अजय राय के योगदान को नहीं भूलना चाहिए।
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इस झगड़े की मुख्य वजह राय की जगह मिश्रा को लाना था। राज्य स्तर पर नेतृत्व में बदलाव का मतलब अक्सर सिर्फ़ नए अध्यक्ष की नियुक्ति से कहीं ज़्यादा होता है। राय के समर्थकों के लिए, यह बदलाव निवर्तमान अध्यक्ष के प्रति अपनी वफ़ादारी दिखाने का मौका था। वहीं, जो कार्यकर्ता मिश्रा की टीम के साथ संबंध बनाना चाहते थे, उनके लिए यह उनके कार्यकाल के पहले दिन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने का अवसर था।
MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का पेपर लीक से संबंध नहीं, BJP ने किया बचाव
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार का बचाव करते हुए कहा कि प्रश्नपत्र लीक विवाद से उनका किसी भी तरह का संबंध नहीं है। हालांकि, पार्टी ने उनके ‘‘नैतिक आधार’’ पर छुट्टी पर जाने के फैसले का स्वागत किया। भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के मुख्य प्रवक्ता नवनाथ बन ने आरोप लगाया कि एमपीएससी अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित था, जबकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले ही दिन से उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली थीं।
एमपीएससी अभ्यर्थियों ने रविवार देर रात अपना 10 दिवसीय आंदोलन समाप्त कर दिया। राज्य सरकार ने भर्ती आयोग में प्रश्नपत्र लीक समेत कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक समिति गठित की है और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी तुकाराम मुंढे को इस समिति का सचिव बनाया गया है, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन समाप्त किया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
इसके बाद एमपीएससी के अध्यक्ष भीमनवार ने घोषणा की कि वह जांच पूरी होने तक छुट्टी पर रहेंगे। पत्रकारों से बातचीत में नवनाथ बन ने कहा, ‘‘इस पूरे मामले का भीमनवार से कोई लेना-देना नहीं है। उनके अध्यक्ष रहते हुए कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ था।
इसके बावजूद उन्होंने नैतिक आधार पर छुट्टी पर जाने का फैसला किया। मैं उनके निर्णय का तहे दिल से स्वागत करता हूं और उन्हें धन्यवाद देता हूं।’’ उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ने शुरुआत से ही विद्यार्थियों का समर्थन किया और उनकी सभी मांगें स्वीकार कर ली थीं। इसके बावजूद पुणे में आंदोलन जारी रहा और दुर्भाग्यवश उसने राजनीतिक रूप ले लिया।
बन ने कहा कि फडणवीस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार विद्यार्थियों के साथ खड़ी रहेगी और उनके हित में काम करती रहेगी।
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