अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने भारतीय टीम के साथ द्विपक्षीय श्रृंखलाओं को फिर से शुरू करने की पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) की मांग को खारिज कर दिया है। यह ध्यान देने योग्य है कि पीसीबी ने ये मांगें तब रखीं जब पाकिस्तान सरकार ने चल रहे टी20 विश्व कप 2026 में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद एक बैठक हुई थी। यह उल्लेखनीय है कि टी20 विश्व कप के बहिष्कार विवाद के मद्देनजर पीसीबी ने आईसीसी के सामने तीन मांगें रखीं; बोर्ड ने भारत के साथ द्विपक्षीय श्रृंखलाओं को फिर से शुरू करने की मांग की, साथ ही भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच त्रिकोणीय श्रृंखला की भी मांग की।
इसके अलावा, उन्होंने सितंबर में प्रस्तावित श्रृंखला के लिए भारत के बांग्लादेश दौरे का भी अनुरोध किया। हालांकि, आईसीसी ने इन मांगों को खारिज कर दिया है। खबरों के मुताबिक, बोर्ड ने कहा है कि उनके पास भारत टीम को पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय श्रृंखला खेलने की अनुमति देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। यह अधिकार बीसीसीआई के पास है, और बोर्ड भारतीय सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करेगा। यह उल्लेखनीय है कि आईसीसी ने लाहौर में अपनी बैठक के बाद पीसीबी को 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मैच में भाग लेने या न लेने के संबंध में अंतिम निर्णय देने के लिए एक दिन का समय दिया था।
आईसीसी ने पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से परामर्श करने और बोर्ड के रुख की पुष्टि करने के लिए एक दिन का समय दिया है। वैश्विक शासी निकाय द्वारा भारत-पाकिस्तान मैच की स्थिति पर सोमवार शाम या मंगलवार सुबह आधिकारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है। रविवार को पांच घंटे से अधिक चली इस बैठक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और आईसीसी के उपाध्यक्ष इमरान ख्वाजा भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल भी चर्चा में शामिल होने के लिए लाहौर आए थे। यह बैठक तब हुई जब बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के भारत में मैच खेलने से इनकार करने के बाद बांग्लादेश को टी20 विश्व कप से बाहर करने के खिलाफ मतदान करने वाला पाकिस्तान एकमात्र सदस्य देश बनकर उभरा।
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अमेरिका की बड़ी टेक कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में आगे निकलने की होड़ में हैं और इस दौड़ में विदेशी टैलेंट की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, एआई से जुड़ी नौकरियों के लिए एच-1बी वीज़ा धारकों की मांग तेजी से बढ़ी है, भले ही सरकार विदेशी भर्ती पर सख्ती दिखा रही हो।
बता दें कि फोर्ब्स की एक रिपोर्ट में नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी (NFAP) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025 में अमेज़ॅन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल और एप्पल द्वारा दायर किए गए नए एच-1बी लेबर कंडीशन एप्लिकेशन में 80 प्रतिशत से अधिक पद एआई से जुड़े रहे हैं। इससे साफ है कि अमेरिकी टेक कंपनियों की एआई रणनीति में विदेशी पेशेवर गहराई से शामिल हैं।
गौरतलब है कि एच-1बी वीज़ा अमेरिका में उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों के लिए लंबे समय तक काम करने का एक प्रमुख जरिया है। इस कार्यक्रम के तहत हर साल 65 हजार वीज़ा जारी किए जाते हैं, जबकि अमेरिकी उच्च डिग्रीधारकों के लिए अतिरिक्त 20 हजार वीज़ा का प्रावधान है। मौजूद जानकारी के अनुसार, एआई और संबंधित क्षेत्रों में पढ़ने वाले लगभग 70 प्रतिशत स्नातकोत्तर छात्र अंतरराष्ट्रीय हैं, जो कंपनियों के लिए बड़ा टैलेंट पूल बनते हैं।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि अमेज़ॅन, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और गूगल ने एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश की योजना बनाई है। सीएनबीसी के एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये कंपनियां सामूहिक रूप से सैकड़ों अरब डॉलर का पूंजीगत खर्च करने वाली हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां लागत घटाने के लिए नहीं, बल्कि विशेष कौशल के लिए विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर रही हैं।
हालांकि, दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन की सख्त इमिग्रेशन नीतियां चिंता बढ़ा रही हैं। दिसंबर 2025 में एक संघीय अदालत ने नए एच-1बी आवेदनों पर लगाए गए 1 लाख डॉलर शुल्क को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। इससे कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा, लॉटरी सिस्टम की जगह वेतन आधारित चयन प्रणाली और ओपीटी व छात्र वीज़ा नियमों में संभावित बदलाव भी विदेशी टैलेंट के रास्ते को कठिन बना सकते हैं।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऐसी नीतियों का उल्टा असर हो सकता है। शोध बताते हैं कि विदेशी STEM पेशेवरों ने दशकों तक अमेरिकी उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान दिया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर विदेशी भर्ती पर जरूरत से ज्यादा रोक लगी, तो कंपनियां नौकरियां अमेरिका से बाहर स्थानांतरित कर सकती हैं, जिससे एआई में अमेरिका की बढ़त कमजोर पड़ सकती है।
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