प्रो. डॉ. प्रेम नारायण सक्सेना की जन्म शताब्दी पर भोपाल में समारोह, विश्वास सारंग बोले- उनके शिष्य आज भी उन्हें याद करते हैं
भोपाल। प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. डॉ. प्रेम नारायण सक्सेना की जन्म शताब्दी पर भोपाल के हिन्दी भवन में आयोजित समारोह में उनके शिक्षा जगत के योगदान और जीवन से जुड़े संस्मरणों को याद किया गया। पूर्व शिष्यों और परिजनों ने उनसे जुड़े अनुभव साझा किए, वहीं वरिष्ठ साहित्यकारों, पत्रकारों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रेम कमल जन जागरूकता कल्याण समिति ने 10 अक्टूबर को किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि प्रो. सक्सेना का जीवन अनुकरणीय था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और कई विद्यार्थियों का जीवन संवारा। यही कारण है कि आज भी उनके शिष्य उन्हें याद करते हैं। सारंग ने कहा कि समाज में ऐसे लोगों की याद हमेशा बनी रहती है।
समारोह की अध्यक्षता पूर्व सांसद और हिन्दी भवन एवं मानस भवन के कार्याध्यक्ष रघुनंदन शर्मा ने की। पूर्व सांसद आलोक संजर और साहित्यकार विकास दवे भी मौजूद रहे। सांसद आलोक शर्मा कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके और उन्होंने अपनी शुभकामनाएं भेजीं। प्रो. सक्सेना के पुत्र डॉ. संजय सक्सेना ने अपने माता-पिता को याद किया। इस दौरान प्रो. सक्सेना के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित वीडियो भी दिखाया गया।
छात्रवृत्ति से पढ़ाई, हमीदिया कॉलेज में रहे विभागाध्यक्ष
वर्ष 1926 में जन्मे प्रो. डॉ. प्रेम नारायण सक्सेना ने बचपन में ही अपने पिता को खो दिया था। इसके बावजूद उन्होंने छात्रवृत्ति के सहारे उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने बी.कॉम., एम.कॉम., अर्थशास्त्र में एम.ए., एल.एल.बी. और पीएच.डी. की पढ़ाई की। बाद में वे हमीदिया कॉलेज भोपाल के वाणिज्य विभाग में कई वर्षों तक विभागाध्यक्ष रहे।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका शिक्षा से जुड़ाव बना रहा। उन्होंने भोपाल आईएएस स्टडी सर्किल शुरू किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उनके मार्गदर्शन में कई शोधार्थियों ने पीएच.डी. पूरी की। वर्ष 1998 में उन्हें ‘नेशनल एजुकेशन एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था।
उनकी पोती तनुश्री नरोन्हा ने बताया कि प्रो. सक्सेना शिक्षा और संस्कारों को लेकर बेहद अनुशासित थे। नियमित अध्ययन और समय पर काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्हें हॉकी और हिंदी फिल्म संगीत से भी खास लगाव था। कार्यक्रम के लिए न्यूजीलैंड से आए उनके भतीजे डॉ. राजेंद्र सक्सेना ने भी अपने चाचा से जुड़े संस्मरण साझा किए।
उनके पूर्व पीएचडी शिष्य डॉ. सुरेन्द्र बिहारी गोस्वामी ने शोध और शिक्षा से जुड़े अनुभव बताए। बाल साहित्यकार महेश सक्सेना सहित राजेन्द्र गहनी, अजय श्रीवास्तव ‘नीलू’, कैलाश जोशी और प्रमोद प्रधान की पुत्री डॉ. करिश्मा ने भी प्रो. सक्सेना के साथ बिताए समय और उनके मार्गदर्शन को याद किया।
पत्नी कमला सक्सेना के योगदान को भी किया याद
समारोह में प्रो. सक्सेना की पत्नी स्वर्गीय कमला सक्सेना को भी याद किया गया। वे शिक्षाविद् थीं और वर्ष 1992 में शिक्षक के रूप में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुई थीं। उनकी पांच पुस्तकें प्रकाशित हुईं। वर्ष 1993 में सामाजिक योगदान के लिए उनका नागरिक अभिनंदन भी किया गया था।
प्रो. सक्सेना के हिंदी फिल्म संगीत के प्रति लगाव को देखते हुए कार्यक्रम में उनके पसंदीदा दौर के गीतों की प्रस्तुतियां भी हुईं। श्याम कृष्ण मूर्ति, संदीपा पारे और राधिका मिश्रा ने गीत प्रस्तुत किए। वर्ष 1944 की फिल्म ‘रतन’ के गीतों को भी याद किया गया।
समारोह में यतीन्द्र नाथ राही, जगदीश कौशल, घनश्याम सक्सेना, गौरीशंकर गौरीश, महेश श्रीवास्तव, नरेन्द्र ‘दीपक’, मयंक श्रीवास्तव, डॉ. राजश्री रावत, उषा जायसवाल, बाल मुकुन्द भारती और प्रेम भारती को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन और समन्वय डॉ. संजय सक्सेना, मनोज सक्सेना, अनिल कुमार सक्सेना और तनुश्री नरोन्हा ने किया। अंत में अनिल कुमार सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।
मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टरों के स्टाइपेंड में 4.46% की वृद्धि, नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू, पीजी फर्स्ट ईयर को अब मिलेंगे 81126 रुपए
मध्य प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में प्रशिक्षण ले रहे जूनियर डॉक्टरों और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए खुशखबरी है। वित्त विभाग की सहमति के बाद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने स्टाइपेंड में 4.46% वृद्धि के आदेश जारी कर दिए है। नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी।
इसका लाभ पीजी (प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष) मेडिकल छात्रों, सुपर स्पेशियलिटी विद्यार्थियों और सीनियर-जूनियर रेजिडेंट को लाभ मिलेगा। नई दरों के लागू होने से जूनियर डॉक्टरों को हर महीने पहले की तुलना में अधिक स्टाइपेंड मिलेगा। इससे पहले स्टाइपेंड की दरों में संशोधन 1 अप्रैल 2025 को किया गया था।
आइए जानते हैं किसका कितना बढ़ा स्टाइपेंड
- पीजी प्रथम वर्ष: स्टाइपेंड 77,662 से बढ़ाकर 81,126 रुपये (3,464 रुपये की बढ़ोतरी) किया गया है।
- पीजी द्वितीय वर्ष: 80,050 से बढ़ाकर 83,620 रुपये (3,570 रुपये की बढ़ोतरी)
- पीजी तृतीय वर्ष: 82,441 से बढ़ाकर 86,118 रुपये (3,677 रुपये की बढ़ोतरी)
- सुपर स्पेशलिटी प्रथम वर्ष: 82,441 से बढ़ाकर 86,118 रुपये (3,677 रुपये की बढ़ोतरी)
- सुपर स्पेशलिटी द्वितीय वर्ष: 82,441 से बढ़ाकर 86,118 रुपये (3,677 रुपये की बढ़ोतरी)
- सुपर स्पेशलिटी तृतीय वर्ष: 82,441 से बढ़ाकर 86,118 रुपये (3,677 रुपये की बढ़ोतरी)
- सीनियर रेजिडेंट: 90,803 से बढ़ाकर 94,853 रुपये (4,050 रुपये की बढ़ोतरी)
- जूनियर रेजिडेंट: 63,324 से बढ़ाकर 66,148 रुपये (2,824 रुपये की बढ़ोतरी) किया गया है।
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