अमेरिका में मचा हड़कंप! ईरान पर हमले का प्लान लीक, ट्रंप ने इन लोगों को ठहराया जिम्मेदार
US Iran War: लगातार हमलों के बाद अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर हमले रोक दिए हैं. इसके पीछे ट्रंप ने कतर और यूएई के बातचीत के प्रयासों को बताया है. इसी बीच ट्रंप ने बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि ईरान पर हमले से पहले उनका प्लान लीक हो गया है. इसके लिए ट्रंप ने सीधे डीप स्टेट और कतर को जिम्मेदार ठहराया है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि 'डीप स्टेट' के अंदर मौजूद लोगों ने ईरान को युद्ध की योजनाएं लीक कर दीं. इन गद्दारों को लंबे समय के लिए जेल भेजा जाना चाहिए. ट्रंप का कहना है कि गद्दारों ने ईरान पर हमले की उनकी योजना लीक कर दी, जिससे दुश्मन को पहले से ही जानकारी मिल गई. कहा कि लीक करने वालों को जेल में डाल देना चाहिए. लीक करने वालों के लिए कानून और सख्त होने चाहिए.
Trump says the sleaze bag leakers who leaked his plan to attack Iran should be put in jail. pic.twitter.com/p3AHRaVYIP
— Acyn (@Acyn) August 3, 2026
ईरान को चल गया पता
ट्रंप ने कहा कि इस मामले में, लीक करने वालों ने मदद की क्योंकि उन्होंने हमले की गंभीरता के बारे में बताया. कहा कि ईरान को पता था. उन्हें पता था कि क्या होने वाला है. ट्रंप ने कहा कि उन्हें लीक और घटिया लोगों के जरिए पता चला, आप जानते हैं, बहुत सारे घटिया लोग, लीक करने वाले. सभी लीक करने वालों को जेल में डालो.
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कुवैत पर भी किया इशारा
बातचीत में ट्रंप ने कहा कि कुवैत के लोगों को प्लान गुप्त रखना नहीं आता. वे हमेशा उन्हें लीक कर देते हैं, जैसे हमारे विमान को गिराए जाने के मामले में हुआ था. ईरान पर हमले के हमारे प्लान को लीक करने वालों को जेल में डाल देना चाहिए.
???????????????? NEW | Trump: “Kuwaitis don’t know how to keep plans secret; they always leak them, like the downing of our aircraft. Those involved in leaking our plan to attack Iran should be imprisoned.” pic.twitter.com/9MuBoHRoFg
— GBC (@GBC_Press) August 3, 2026
ट्रंप ने ईरान पर क्यों रोके हमले?
ईरान पर हमला रोकने के फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते, क्योंकि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों का होता है. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने सऊदी अरब के राजा और क्राउन प्रिंस से भी बात की थी. दोनों नेताओं ने सैन्य कार्रवाई के बजाय समझौते का रास्ता अपनाने की सलाह दी. ट्रंप ने कहा कि अगर हमला होता, तो हालात बेकाबू हो सकते थे और पूरे क्षेत्र में बड़ा संकट खड़ा हो सकता था.
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मुश्किलों में ट्रंप सरकार! नए टैक्स के खिलाफ अदालत पहुंचे अमेरिका के 25 राज्य
ट्रंप प्रशासन की नई टैक्स पॉलिसी के खिलाफ अमेरिका के ही 25 राज्यों ने अदालत का रुख किया. 25 राज्यों ने अमेरिकी अदालत में सोमवार को केस दायर कर दिया है. राज्यों का कहना है कि कोर्ट ने फरवरी में पुराने आयात करों को रद्द कर दिया था, जिसके बाद ट्रंप प्रशासन अवैध रूप से टैक्स बढ़ाने के लिए नए बहानों का सहारा ले रही है.
जानें क्या है पूरा मामला
बता दें, पिछले महीने अमेरिका ने 59 देशों और यूरोपीय संघ पर भारी इंपोर्ट टैक्स लगाए थे. ट्रंप प्रशासन ने टैक्स लगाने के पीछे तर्क दिया था कि ये देश जबरन श्रम से बने उत्पादों को रोकने में नाकाम रहें. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले अस्थायी टैक्स लगाए थे, जिनकी डेडलाइन खत्म होने के बाद अब नए कदम उठाए जा रहे हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था ट्रंप सरकार का ये फैसला
ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स सहित 25 राज्यों ने अवैध बताया था. उनका कहना है कि अमेरिका के परिवारों और व्यापार पर इस फैसले से बोझ पड़ेगा. डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल ट्रेड डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताया था और भारी-भरकम टैक्स लगाया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति के पास ऐसे टैक्स लगाने का अधिकारी नहीं है, जिसके बाद ट्रंप सरकार ने आयातकों को उनके पैसे वापस किए थे.
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ट्रंप प्रशासन ने निकाला नया लूप होल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्रंप सरकार रुकी नहीं. उसने नया दांव लगाया. बता दें, पुरानी भरपाई के लिए ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 301 का इस्तेमाल किया. इसके तहत, अनुचित व्यापार प्रथाओं और जबरन श्रम रोकने में असफल होने वाले देशों पर 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक का टैक्स लगाया गया है. इस कार्रवाई को व्हाइट हाउस और ट्रंप सरकार ने पूरी तरह से लीगल और वैध बताया. उन्होंने कहा कि ये अमेरिकी मजदूरों और व्यापार को बचाने के लिए आवश्यक था.
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क्या उन 59 देशों में भारत भी शामिल है?
ट्रंप प्रशासन द्वारा पिछले महीने लगाए गए इंपोर्ट टैक्स से कुल 59 देश प्रभावित हुए हैं. ट्रंप प्रशासन ने भारत, कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. तो वहीं चीन और वियतनाम जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत तक का टैक्स लगाया गया था. ट्रंप के 10 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब में भारत, मैक्सिको और कनाडा जैसे कुल 27 देश शामिल हैं तो वहीं 12.5 प्रतिशत वाले टैक्स स्लैब में चीन और वियतनाम सहित कुल 32 देश और यूरोपीय संघ शामिल है.
STORY | US slaps 10 per cent tariff on goods imported from India over forced labour concerns
— Press Trust of India (@PTI_News) July 24, 2026
The United States has imposed a 10 per cent tariff on goods imported from India and 16 other countries as part of its efforts to combat the use of forced labour in the production of such… pic.twitter.com/1yyJUGzNKX
प्रमुख प्रभावित देश और क्षेत्र
- यूरोपीय संघ (EU): इसमें जर्मनी, फ्रांस, और इटली जैसे सभी 27 सदस्य देश शामिल हैं.
- पड़ोसी देश: कनाडा और मैक्सिको (इन पर 10% टैक्स लगाया गया है).
- एशिया-पैसिफिक क्षेत्र: चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड.
- यूरोप (गैर-EU): यूनाइटेड किंगडम (UK), स्विट्जरलैंड और नॉर्वे.
- अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं: ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE).
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