WhatsApp अकाउंट्स 24 घंटे की जांच में डाले गए, यूजर्स हुए परेशान
नयी दिल्ली, तीन अगस्त त्वरित संदेश मंच व्हाट्सऐप ने सोमवार शाम अचानक कई उपयोगकर्ताओं के खातों को जांच के दायरे में डाल दिया, जिसकी वजह से वे 24 घंटे तक ऐप की सुविधाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाए। इस कदम से भारत समेत कई जगहों पर लोग परेशान हो गए और सोशल मीडिया पर अपनी शिकायतें भी दर्ज कराईं। सोमवार रात करीब आठ बजे उपयोगकर्ताओं को व्हाट्सऐप पर यह समस्या दिखनी शुरू हुई।
ऐप खोलने पर एक संदेश दिखाई दिया कि उनका खाता जांच में है और उसकी गतिविधियों एवं फोन से संबंधित जानकारी की समीक्षा की जा रही है। इसके साथ ही 24 घंटे के भीतर इस पर फैसला किए जाने की जानकारी भी दी गई। इसके अलावा ऐप में उपयोगकर्ताओं को जिम्मेदारी से उपयोग करने के निर्देश और चोरी हुए फोन या खातों से जुड़ी जानकारी के विकल्प भी दिखाए गए।
कई लोगों ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी नाराजगी जताई। एक उपयोगकर्ता ने कहा कि उसका खाता बिना किसी कारण के बंद कर दिया गया है और अपील के बाद भी सिर्फ सामान्य संदेश ही दिख रहा है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि उसका काम व्हाट्सऐप पर निर्भर है और बिना चेतावनी खाता बंद होना बड़ी समस्या है।
इस संबंध में टिप्पणी के लिए संपर्क किए जाने पर व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने कहा, “हम लगातार उन लोगों पर नजर रखते हैं जो हमारी सेवा का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं और अन्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए ऐसे खातों पर कार्रवाई करते हैं। हालांकि, कभी-कभी हमसे गलती भी हो जाती है। ऐसे मामलों में हम उसे जल्द से जल्द सुधारने की कोशिश करते हैं, ताकि लोग फिर से सामान्य रूप से बात कर सकें।
TRAI से Internet Neutrality नियमों की समीक्षा का आग्रह, दूरसंचार विभाग ने उठाया कदम
नयी दिल्ली, तीन अगस्त दूरसंचार विभाग ने प्रौद्योगिकी एवं बाजार परिदृश्य में आए बदलावों को ध्यान में रखते हुए दूरसंचार नियामक ट्राई से ‘इंटरनेट निरपेक्षता’ (नेट न्यूट्रैलिटी) के मौजूदा नियमों की समीक्षा के लिए संपर्क साधा है। सोमवार को सूत्रों ने यह जानकारी दी। इंटरनेट निरपेक्षता का मतलब इंटरनेट पर हर वेबसाइट, ऐप और सेवा के साथ बराबरी का व्यवहार करना है।
इसमें दूरसंचार कंपनी किसी सामग्री को न तो जानबूझकर तेज कर सकती है, न धीमा, और न ही उसके लिए अलग से ज्यादा पैसे ले सकती है। सूत्रों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग ने ट्राई से कहा है कि वह नई प्रौद्योगिकियों और नेटवर्क के बदलते इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए इन नियमों पर दोबारा विचार करे। खासकर 5जी प्रौद्योगिकी के आने से नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर (जैसे किसी सेवा को ज्यादा तेज या कम देरी से देना) इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ गई है।
सूत्रों ने पीटीआई-से कहा कि दूरसंचार विभाग ने अपने संदर्भ में कहा है कि 2017 में ट्राई की सिफारिशों को लाइसेंस शर्तों में शामिल किए जाने के बाद से दूरसंचार क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और बाजार स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि नियम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ नई प्रौद्योगिकी और नवाचार को भी बढ़ावा दें। आज दूरसंचार क्षेत्र सिर्फ कॉल तक सीमित नहीं रहकर पूरी तरह डेटा पर आधारित हो चुका है।
4जी और 5जी सेवाओं के विस्तार, इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल और क्लाउड सेवाओं के कारण अब लोगों की जरूरतें और उम्मीदें भी बदल गई हैं। हाल के दिनों में 5जी से जुड़ी कुछ प्रीमियम सेवाओं को लेकर यह बहस भी तेज हुई है कि क्या ऐसी सेवाएं इंटरनेट निरपेक्षता के सिद्धांतों के अनुरूप हैं या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, दूरसंचार विभाग का कहना है कि समय-समय पर समीक्षा से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि भारत का नियामकीय ढांचा बदलती प्रौद्योगिकी के साथ कदम मिलाकर चल सके।
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