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ये कैसा Democracy? Lok Sabha में हंगामे पर Priyanka Gandhi का सवाल- विपक्ष का गला घोंटा जा रहा

कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने के बाद लोकसभा में मचे हंगामे के बीच, पार्टी सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को कहा कि यह लोकतंत्र नहीं है जहां विपक्ष के नेता को अपने विचार रखने की अनुमति न दी जाए।मीडिया से बात करते हुए प्रियंका ने जोर देकर कहा कि राहुल गांधी को एक मिनट भी बोलने की अनुमति न देना हास्यास्पद है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह बहुत दुखद है कि हम सदन (लोकसभा) जाते हैं और बस बाहर आ जाते हैं। विपक्ष के नेता को एक मिनट भी बोलने की अनुमति नहीं दी जाती। यह हास्यास्पद है। यह लोकतंत्र नहीं है। हम यहां किसलिए आते हैं? उन्हें बोलने की अनुमति दी जानी चाहिए।
 

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यह घटना तब हुई जब विपक्ष द्वारा राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न दिए जाने के विरोध में कई बार सदन स्थगित करने के बाद सदन फिर से शुरू हुआ। विपक्ष के विपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि अध्यक्ष ओम बिरला ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उन्हें अपने विचार रखने की अनुमति दी जाएगी। गांधी ने सदन में कहा कि एक घंटे पहले सदन का एक सदस्य अध्यक्ष के पास गया था, अध्यक्ष ने हमें आश्वासन दिया था कि मुझे यहां बोलने और बजट चर्चा से पहले कुछ मुद्दे उठाने की अनुमति दी जाएगी। अब आप अपने वादे से मुकर रहे हैं। इसलिए मैं जानना चाहता हूं कि क्या मुझे वे मुद्दे उठाने की अनुमति है या नहीं?

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में लगातार व्यवधान पैदा करने के लिए विपक्ष की आलोचना की। इसके अलावा, प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला पर उनके उस बयान को लेकर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सदन में न आने का आग्रह किया था, क्योंकि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ कांग्रेस सांसद सदन में प्रधानमंत्री की सीट पर आकर अभूतपूर्व घटना को अंजाम दे सकते हैं।
 

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प्रियंका ने सांसदों का बचाव करते हुए इस बात पर जोर दिया कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हाथ नहीं उठा सकतीं। उन्होंने कहा कि मैं पहले ही कह चुकी हूं कि स्पीकर का अपमान हुआ है और उन पर इतना दबाव है कि उन्हें खुद बयान देने पड़ रहे हैं। महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हाथ नहीं उठा सकतीं। मेरे समेत कांग्रेस की 11 सांसद हैं और सभी बहुत गंभीर हैं... यह बयान सरासर गलत है और सरकार के दबाव में दिया गया है... प्रधानमंत्री सदन में आने का साहस नहीं दिखा पाए, इसीलिए स्पीकर को उनकी ओर से ऐसा बयान देना पड़ा, जो गलत है।

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France से होने वाली है बहुत बड़ी Defence Deal, SCALP मिसाइलों के साथ ही खरीदे जाएंगे 114 Rafale Fighter Jets!

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर दो अहम खबरें सामने आई हैं जो भारत की सैन्य तैयारी, वायु शक्ति और सामरिक सोच की नई दिशा को दिखाती हैं। एक तरफ लंबी दूरी की स्कैल्प क्रूज मिसाइलों के लिए हजारों करोड़ रुपये का प्रस्तावित सौदा चर्चा में है तो दूसरी तरफ 114 राफेल युद्धक विमानों की खरीद को मंजूरी मिलने की संभावना तेज हो गई है। इन दोनों घटनाओं को साथ रखकर देखें तो साफ दिखता है कि भारत अपनी वायु शक्ति को नई धार देने के चरण में है।

स्कैल्प मिसाइल सौदे की बात करें तो आपको बता दें कि भारत और फ्रांस के बीच करीब 3200 करोड़ रुपये के स्कैल्प मिसाइल सौदे पर बातचीत अंतिम दौर में बताई जा रही है। स्कैल्प एक लंबी दूरी की एयर टू सरफेस क्रूज मिसाइल है, जिसे बहुत सटीक प्रहार के लिए जाना जाता है। इसकी मारक दूरी 250 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है और यह दुश्मन के मजबूत हवाई रक्षा तंत्र को चकमा देकर अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है।

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इन मिसाइलों का महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारतीय वायु सेना पहले ही इनका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर में कर चुकी है। उस अभियान में कई अहम आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया और बताया गया कि मिसाइलों ने तय लक्ष्य पर बेहद सटीक प्रहार किया। इस अनुभव ने यह भरोसा मजबूत किया कि ऐसी मिसाइलें भविष्य के किसी भी टकराव में भारत को दूर से सटीक प्रहार की ताकत देती हैं।

स्कैल्प जैसी मिसाइलें पारंपरिक सीमा संघर्ष से आगे की सोच को दिखाती हैं। अब युद्ध केवल सीमा पर तैनात सैनिकों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि दूर बैठे दुश्मन के कमांड सेंटर, हथियार भंडार, आतंकी ढांचे और अहम ठिकानों को बिना सीमा पार किए निशाना बनाने की क्षमता भी उतनी ही जरूरी हो गई है। इस नजरिए से यह सौदा भारत की गहरी प्रहार क्षमता को मजबूत करता है।

इसके अलावा, दूसरी बड़ी खबर 114 राफेल युद्धक विमानों की संभावित खरीद से जुड़ी है। माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से पहले इस पर अहम फैसला हो सकता है। यह सौदा बहुत बड़े आर्थिक आकार का हो सकता है और भारतीय वायु सेना की संरचना पर इसका सीधा असर पड़ेगा। खबरों के अनुसार इस प्रस्ताव में कुछ विमान सीधे तैयार हालत में मिलेंगे, जबकि बाकी का निर्माण भारत में किया जा सकता है। इसमें स्थानीय निर्माण और स्थानीय सामग्री के उपयोग पर खास जोर रहने की बात कही जा रही है। इससे भारत के रक्षा उद्योग, निजी और सरकारी कंपनियों, तथा तकनीकी कौशल को बल मिल सकता है।

हम आपको बता दें कि भारतीय वायु सेना लंबे समय से अपने स्क्वाड्रन की संख्या में कमी की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में आधुनिक बहु भूमिका वाले विमान मिलना उसकी ताकत को नया आधार दे सकता है। राफेल अपनी मारक क्षमता, आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वार प्रणाली और विभिन्न तरह के हथियार ले जाने की योग्यता के कारण पहले ही खुद को साबित कर चुका है।

इन दोनों सौदों को साथ रखकर देखें तो यह सामान्य खरीदारी नहीं बल्कि एक रणनीतिक संकेत है। पहला संकेत यह कि भारत लंबी दूरी से सटीक प्रहार की क्षमता बढ़ा रहा है। दूसरा संकेत यह कि वह अपनी वायु सेना को संख्या और गुणवत्ता दोनों में मजबूत करना चाहता है। क्षेत्रीय संदर्भ में देखें तो भारत को दो मोर्चों की चुनौती का ध्यान रखना पड़ता है। एक तरफ पश्चिमी सीमा पर तनाव की संभावना रहती है, तो दूसरी तरफ उत्तरी दिशा में भी सतर्क रहना जरूरी है। ऐसे माहौल में यदि भारत के पास ऐसी मिसाइलें हों जो दूर से दुश्मन के अहम ठिकानों को नष्ट कर सकें और ऐसे आधुनिक विमान हों जो हर मौसम में असरदार अभियान चला सकें, तो सामरिक संतुलन स्वाभाविक रूप से भारत के पक्ष में झुकता है।

यह भी अहम है कि फ्रांस उन कुछ देशों में है जो भारत को उन्नत रक्षा तकनीक देने में अपेक्षाकृत खुलापन दिखाते रहे हैं। इससे भारत को आपूर्ति की विविधता मिलती है और किसी एक देश पर निर्भरता कम होती है।

देखा जाये तो यह पिछले कुछ वर्षों में भारत की रक्षा नीति में आए बदलाव की झलक है। अब जोर केवल खरीद पर नहीं, बल्कि क्षमता निर्माण, तकनीकी पहुंच, और जहां संभव हो वहां भारत में निर्माण पर है। मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में आधुनिकीकरण, तेज फैसले और आत्मनिर्भरता पर बार बार जोर दिया है। राफेल का पहले का सौदा हो, स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा हो, या रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार, इन सबमें एक स्पष्ट सोच दिखती है कि सुरक्षा पर समझौता नहीं होगा। बदलते वैश्विक माहौल में यह सोच जरूरी भी है।

हालांकि किसी भी बड़े रक्षा सौदे के साथ लागत, समय सीमा और तकनीकी हस्तांतरण जैसे सवाल भी आते हैं, पर समग्र तस्वीर यह बताती है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों को टाल नहीं रहा, बल्कि समय रहते तैयारी कर रहा है। यही तैयारी भविष्य के संकटों को टालने में मदद करती है, क्योंकि मजबूत सैन्य क्षमता खुद में एक प्रतिरोध होती है।

बहरहाल, कहा जा सकता है कि स्कैल्प मिसाइलें और राफेल विमान केवल हथियार नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक सोच के औजार हैं। यदि योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत की वायु शक्ति और सामरिक स्थिति दोनों मजबूत दिख सकती हैं, और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भारत का पलड़ा और भारी हो सकता है।

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