2026 का साहित्य नोबेल कनाडाई लेखिका ऐन कार्सन को:ग्रीक-रोमन साहित्य को आधुनिक दुनिया से जोड़ा, चर्चित किताब 'द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड'
कनाडा की लेखिका और कवयित्री ऐन कार्सन को 2026 का साहित्य नोबेल पुरस्कार दिया गया है। नोबेल समिति ने उन्हें ऐसी रचनाओं के लिए सम्मानित किया है, जिनमें उन्होंने पुराने यूनानी-रोमन साहित्य को आज की जिंदगी, प्यार, रिश्तों और दुख से जोड़ा। नोबेल समिति ने कहा कि कार्सन की खासियत यह है कि वह पुरानी कहानियों को सिर्फ दोबारा नहीं लिखतीं, बल्कि उनमें अपनी कल्पना और आज की जिंदगी की भावनाएं जोड़ देती हैं। उनकी रचनाओं में कविता, कहानी और निबंध की सीमाएं भी कई बार खत्म हो जाती हैं। यही वजह है कि उनका लेखन बाकी लेखकों से काफी अलग नजर आता है। कार्सन का जन्म 1950 में कनाडा के टोरंटो में हुआ था। उन्होंने प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य की पढ़ाई की। 1981 में उन्होंने इसी विषय पर अपनी डॉक्टरेट की थीसिस प्रकाशित की। एक राक्षस की कहानी को प्यार और हिंसा की कहानी बना दिया कार्सन की चर्चित किताबों में ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड: ए नॉवेल इन वर्स’ भी शामिल है। 1998 में प्रकाशित यह किताब हजारों साल पुरानी यूनानी कथा पर आधारित है। इसमें गेरियोन नाम का एक पंखों वाला लाल राक्षस है। कार्सन ने इस पुराने मिथक को बिल्कुल नए तरीके से लिखा। उनकी कहानी में गेरियोन सिर्फ एक राक्षस नहीं, बल्कि अपनी मां से प्यार करने वाला संवेदनशील युवक है। इस तरह उन्होंने एक पुरानी यूनानी कहानी को प्यार, हिंसा और रिश्तों जैसी मानवीय भावनाओं से जोड़ दिया। कार्सन की 2 और चर्चित पुस्तकें नॉक्स: यह किताब 2010 में प्रकाशित हुई थी। ऐन कार्सन ने इसे अपने भाई माइकल की याद में लिखा था। माइकल की 2000 में डेनमार्क में मौत हो गई थी। उनकी मौत से पहले वह रहस्यमय तरीके से परिवार से दूर हो गए थे। द ब्यूटी ऑफ द हसबैंड: यह किताब 2001 में प्रकाशित हुई। यह एक ऐसे पति की कहानी है, जो अपनी पत्नी को धोखा देता है। कार्सन ने इस रिश्ते की कहानी को 29 हिस्सों में बांटा। हर हिस्सा कवि जॉन कीट्स की पंक्तियों से शुरू होता है। पिछले 10 साल में 5 महिलाओं को मिला साहित्य नोबेल पिछले 10 साल में साहित्य का नोबेल 10 लेखकों को मिला, जिनमें 5 महिलाएं थीं। इनमें 6 ने अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं में लिखा, जबकि 6 विजेता यूरोप से रहे। 2024 में दक्षिण कोरिया की हान कांग एशिया से पुरस्कार जीतने वाली लेखिका थीं। इस दौरान दक्षिण एशिया से कोई लेखक नहीं जीता। हर साल स्वीडिश अकादमी नॉमिनेशन मंगाती है। इसमें अकादमी के सदस्य, साहित्य और भाषा के प्रोफेसर, पूर्व नोबेल विजेता और लेखक संगठनों के प्रमुख नाम भेज सकते हैं। लेखक खुद को नामांकित नहीं कर सकते। नोबेल कमेटी पहले 15 से 20 नाम चुनती है, फिर मई में इन्हें 5 उम्मीदवारों तक सीमित किया जाता है। इसके बाद स्वीडिश अकादमी के 18 सदस्य वोटिंग से विजेता चुनते हैं। 50 साल तक गोपनीय रहता है नॉमिनेशन स्वीडिश अकादमी नोबेल के नामांकित लेखकों की लॉन्गलिस्ट या शॉर्टलिस्ट जारी नहीं करती। नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी 50 साल तक गोपनीय रहती है। इसलिए 2026 में किन लेखकों को नामांकित किया गया, इसकी पूरी जानकारी 2076 में सामने आएगी। नोबेल रिकॉर्ड के मुताबिक, सरवपल्ली राधाकृष्णन, श्री अरविंद, ताराशंकर बंद्योपाध्याय और आरके नारायण जैसे भारतीय लेखकों को अलग-अलग वर्षों में साहित्य नोबेल के लिए नामांकित किया गया था। ग्राफिक्स: अंकित पाठक गूगल पर ट्रेंड कर रहा नोबेल प्राइज सोर्स- गूगल ट्रेंड --------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… 2026 का केमिस्ट्री नोबेल फ्रांस-जापान के वैज्ञानिकों को:अणुओं के मिरर इमेज की 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई; दवाएं बनाने में मदद मिली 2026 का केमिस्ट्री नोबेल पुरस्कार फ्रांस के वैज्ञानिक हेनरी बी. कागन और जापान के केन्सो सोआई को दिया गया है। दोनों वैज्ञानिकों ने रसायन विज्ञान की करीब 100 साल पुरानी गुत्थी सुलझाई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सुपर-डुपर अल नीनो से पूरी धरती लाल:76 साल में सबसे ज्यादा गर्म समुद्र; बाढ़-सूखा और बीमारियों का खतरा, 4.5 लाख मौतों की आशंका
दुनिया इस समय बेहद ताकतवर अल नीनो का सामना कर रही है। प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र का तापमान सामान्य से 3.4°C ज्यादा हो गया है। यह 1950 के बाद का सबसे खतरनाक अल नीनो बताया जा रहा है। मौसम विशेषज्ञ इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ कह रहे हैं। इससे दुनिया के कई हिस्सों में ज्यादा गर्मी, सूखा या भारी बारिश हो सकती है। शिकागो यूनिवर्सिटी के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनियाभर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। दिसंबर में पीक पर रहेगा अल नीनो इस साल अल नीनो दिसंबर में अपने चरम पर पहुंच सकता है। इसके असर से आने वाले महीनों में दुनिया के बड़े हिस्से में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने की आशंका है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने बारिश का पैटर्न बदलने से कई इलाकों में सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। WMO के मुताबिक, अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसका असर उत्तरी गोलार्ध में 2027 के वसंत तक बना रह सकता है। संगठन ने फरवरी 2027 तक इसके जारी रहने की करीब 100% संभावना जताई है। ज्यादा गर्मी से हीट स्ट्रोक और दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। वहीं बारिश का पैटर्न बिगड़ने से कहीं पानी की कमी तो कहीं बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। अल नीनो से भारत में कम बारिश, सूखे का खतरा अल नीनो का असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। 2026 का दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से 13% कम बारिश के साथ खत्म हुआ। यह 2001 के बाद भारत का चौथा सबसे सूखा मानसून रहा। मानसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो का असर भी देखा गया। अल नीनो से तापमान बढ़ने का असर यूरोप में भी दिखा। फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन में इस साल कई जगह रिकॉर्ड गर्मी पड़ी। कम बारिश से डेन्यूब, राइन और टेम्स जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर भी काफी नीचे चला गया। अल नीनो सिर्फ प्रशांत महासागर में क्यों आता है? अल नीनो का मतलब सिर्फ समुद्र का गर्म होना नहीं है। यह प्रशांत महासागर में होने वाली खास प्राकृतिक प्रक्रिया है। सामान्य स्थिति में प्रशांत महासागर की हवाएं पूर्व से पश्चिम की ओर चलती हैं और गर्म पानी को इंडोनेशिया-ऑस्ट्रेलिया की तरफ धकेलती हैं। दक्षिण अमेरिका के पास समुद्र की गहराई से ठंडा पानी ऊपर आता रहता है। अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं। इससे पश्चिम में जमा गर्म पानी पूर्व की तरफ फैलने लगता है और प्रशांत महासागर का मध्य और पूर्वी हिस्सा सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। दूसरे महासागरों में भी तापमान बदलता है, लेकिन वहां हवाओं और समुद्र के पानी की ऐसी खास व्यवस्था नहीं होती, इसलिए उसे अल नीनो नहीं कहा जाता। गूगल पर ट्रेंड में बना हुआ है अल नीनो… सोर्स- गूगल ट्रेंड्स ------------------------- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ के मॉल में पानी घुसा, फर्रुखाबाद में ओले गिरे:यूपी के 42 जिलों में बारिश का अलर्ट; छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बिजली गिरने से 3 मौतें उत्तराखंड, हिमाचल, मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ और झारखंड के आसपास बने ऊपरी हवा के साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण कई क्षेत्रों में बनी ट्रफ के कारण मौसम एक बार फिर बदल गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 









