नवरात्रि पर सीएम धामी का संदेश- महिलाओं और बेटियों का सम्मान समाज की जिम्मेदारी, सेवा संकल्प अभियान से जनकल्याण को गति
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शारदीय नवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महिलाओं और बेटियों के सम्मान को सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने प्रदेश के लोगों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की. मुख्यमंत्री ने कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का यह पर्व भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नारी शक्ति के महत्व को दर्शाता है.
मुख्यमंत्री ने नवरात्रि में होने वाले कन्या पूजन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परंपरा बालिकाओं के प्रति आदर और सम्मान की भावना को मजबूत करती है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं का सम्मान केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार में भी अपनाया जाना चाहिए.
सेवा संकल्प अभियान से जनकल्याण पर जोर
मुख्यमंत्री धामी ने देहरादून के तपोवन रोड स्थित क्षत्रिय चेतना मंच में सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में भी हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों की ओर से लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया और लाभार्थियों को कृषि उपकरण, मशरूम मिनी-किट तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की महालक्ष्मी और किशोरी किट वितरित कीं.
राज्य सरकार की इस पहल का उद्देश्य विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाना और जरूरतमंद परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना है. कृषि उपकरणों और मशरूम किट के वितरण से आजीविका संबंधी गतिविधियों को प्रोत्साहन देने का प्रयास भी किया गया.
शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शिविरों में प्राप्त जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि जिन मामलों के निस्तारण में अधिक समय लगे, उनमें शिकायतकर्ताओं को प्रक्रिया और संभावित समयसीमा की स्पष्ट जानकारी दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को अपने काम के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें.
उत्तराखंड में सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से संचालित किया जा रहा है. इस अभियान के माध्यम से सरकार ने जनसमस्याओं के समाधान, योजनाओं की पहुंच और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर दिया है.
गुजरात सरकार के संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, एशियाई शेरों का दूसरा घर बन रहा बरड़ा वन क्षेत्र
गुजरात में एशियाई शेरों के संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। सौराष्ट्र स्थित बरड़ा वन्यजीव अभयारण्य अब गिर के बाद शेरों के दूसरे महत्वपूर्ण आवास के रूप में उभर रहा है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में बरड़ा के जंगलों को शेरों की दीर्घकालिक आबादी के लिए अनुकूल बताया गया है। यह उपलब्धि गुजरात सरकार के वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन प्रयासों को मजबूती देती है।
करीब 192.31 वर्ग किलोमीटर में फैला बरड़ा अभयारण्य पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में स्थित है। यहां शेरों के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवास, शिकार की उपलब्धता और अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है। ‘Beyond Gir: Barda Wildlife Sanctuary as a Potential Stronghold for Asiatic Lions’ शीर्षक वाला अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल PLOS One में प्रकाशित हुआ है।
144 वर्षों बाद बरड़ा क्षेत्र में शेरों की वापसी हुई
Fry Pan
जबकि एक नर शेर प्राकृतिक रूप से यहां आया था। इस क्षेत्र में शेरों की मौजूदगी राज्य में उनके आवास विस्तार की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
शेरों के संरक्षण के लिए काम कर रही गुजरात सरकार
गुजरात सरकार शेरों के संरक्षण के लिए निगरानी, आवास सुधार और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने जैसे उपायों पर काम कर रही है। बरड़ा में शेरों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ आवास विकसित करना इसी व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा है।
वन्यजीव विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा महत्वपूर्ण
यह पहल जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ गुजरात की वन्यजीव विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। बरड़ा का विकास एशियाई शेरों की आबादी को एक ही क्षेत्र पर निर्भर रहने से बचाने और उनके दीर्घकालिक अस्तित्व को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
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