100 साल बाद कान्हा में जंगली भैंसों की वापसी, CM मोहन यादव ने सूपखार में काजीरंगा से लाए गए 8 जंगली भैंसों को बाड़े में छोड़ा
मध्यप्रदेश के जंगलों में करीब 100 साल पहले विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों की वापसी हो गई है। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों को फिर से बसाने की पहल की गई है। रविवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने कान्हा के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके 8 जंगली भैंसों को छोड़ा, जिनमें 6 मादा और 2 नर भैंसे शामिल हैं। सरकार ने अगले तीन वर्षों में प्रदेश में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। पहले चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में रखा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को भी इसी बाड़े में रखा गया।
इस तरह कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन किया गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुकूल ढल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार, 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर छोड़ा गया।
प्रदेश में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट की दिशा में बड़ा कदम
इस मौके पर सीएम मोहन यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुये कहा कि प्रदेश के वन विभाग और प्रदेशवासियों के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। लगभग 100 वर्षों बाद प्रदेश में जंगली भैंसों की पुनर्बसाहट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार क्षेत्र में इस परियोजना के दूसरे चरण का शुभारंभ हो रहा है।
जंगली भैंसों के अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर जोर
सीएम ने कहा कि करीब 2200 किमी दूर असम से सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के सहयोग से जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश के प्राकृतिक आवास में पुन: बसाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि प्रदेश में वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण और उनके लिए अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
वन्यजीव संरक्षण के लिए लगातार किए जा रहे प्रयास: सीएम यादव
सीएम मोहन यादव ने कहा कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। बाघ, चीता, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ सहित विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण के साथ-साथ उन वन्यजीवों को भी पुनः बसाने के प्रयास किए जा रहे हैं, जो कभी इस क्षेत्र की प्राकृतिक पहचान हुआ करते थे। प्रदेश में हाथियों की स्थायी मौजूदगी भी वन्यजीव विविधता के विस्तार का एक महत्वपूर्ण पहलू है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना हमारी प्राथमिकता है।
प्रदेश प्रधान संगठन के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट, CM धामी बोले- ग्राम पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से आज मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष मती योगिता केंतुरा रावत के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ग्रामीण विकास, ग्राम पंचायतों की भूमिका तथा प्रदेश में संचालित विकास योजनाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि ग्राम पंचायतें लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण और मजबूत इकाइयों में से एक हैं. गांवों के समग्र विकास, स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं के समाधान तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में ग्राम प्रधानों एवं पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है. ग्राम प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों में जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार का प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो.
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की वास्तविक शक्ति उसके गांवों, स्थानीय परंपराओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में निहित है. गांवों को सशक्त बनाकर ही आत्मनिर्भर उत्तराखंड के संकल्प को साकार किया जा सकता है. इस दिशा में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता, जनभागीदारी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनहित से जुड़े विषयों पर पंचायत प्रतिनिधियों के सुझावों और अनुभवों को महत्व देती है. ग्राम पंचायतों को विकास की योजनाओं में प्रभावी भागीदारी के अवसर उपलब्ध कराना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को और बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश प्रधान संगठन और ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि राज्य सरकार के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीण विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे.
इस अवसर पर प्रदेश प्रधान संगठन की प्रदेश अध्यक्ष मती योगिता केंतुरा रावत, पंकज पोखरियाल (प्रदेश प्रभारी), ठाकुर कृपाल सिंह (जिलाध्यक्ष, उत्तरकाशी), शुभम मल (संगठन महामंत्री), सुधीर रतूड़ी (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), सुरेंद्र सिंह चौहान (प्रदेश महामंत्री), जसपाल सिंह जस्सी (कुमाऊं मंडल अध्यक्ष), शौर्य लखेड़ा (प्रभारी, कुमाऊं मंडल), नयन कुमार (प्रदेश प्रवक्ता), सुभाष खत्री (ग्राम प्रधान, लासी) एवं संजय राणा (प्रदेश सचिव) उपस्थित रहे.
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