अरुणाचल कैबिनेट के बड़े फैसले, तकनीकी शिक्षा में भर्ती नियमों को मंजूरी; महिला हेल्पलाइन के लिए 20 पद सृजित होंगे
इटानगर, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की अध्यक्षता में रविवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महिलाओं की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए एक समान नियमों को मंजूरी देने के साथ ही महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कैबिनेट ने सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में शिक्षण एवं तकनीकी पदों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और योग्यता आधारित बनाने के लिए भर्ती नियमों को मंजूरी दी है।
कैबिनेट ने सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 12 श्रेणियों के पदों के लिए भर्ती नियमों को मंजूरी दी। ये नियम अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के लागू नियमों और विनियमों, 2019 के अनुरूप होंगे।
अधिकारी के अनुसार, इस फैसले से राज्य के तकनीकी शिक्षा संस्थानों में भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। एआईसीटीई के निर्धारित मानकों के अनुरूप भर्ती नियम लागू होने से इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की संस्थागत व्यवस्था भी मजबूत होगी। साथ ही, विभिन्न पदों पर नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुसार की जा सकेंगी।
महिलाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कैबिनेट ने मिशन शक्ति के दिशा-निर्देशों के अनुरूप महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी। महिला हेल्पलाइन-181 एक टोल-फ्री सेवा है, जो चौबीसों घंटे उपलब्ध रहती है। इसका उद्देश्य संकट में फंसी महिलाओं को तत्काल सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें जरूरी सेवाओं से जोड़ना है।
इस हेल्पलाइन के माध्यम से जरूरतमंद महिलाओं को चिकित्सा सहायता, आश्रय, कानूनी मदद, भावनात्मक सहयोग और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। अधिकारियों के मुताबिक, 20 पदों के सृजन से हेल्पलाइन के प्रभावी संचालन में मदद मिलेगी। इससे हिंसा, आपात स्थिति या अन्य मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रही महिलाओं के लिए सहायता तंत्र मजबूत होगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले के तहत कैबिनेट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) के तहत विभिन्न श्रेणियों के पदों के ग्रेड पे में बढ़ोतरी को मंजूरी दी। सरकार का यह फैसला कार्यक्रम के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन में समानता और निष्पक्षता से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से लिया गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, ग्रेड पे में बढ़ोतरी से कर्मचारियों का मनोबल और कार्यक्षमता बेहतर होने की उम्मीद है। इससे मरीजों की देखभाल और उनके पुनर्वास से जुड़ी सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम कुष्ठ रोग की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार के साथ-साथ प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं एवं पुनर्वास सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कैबिनेट ने राज्य में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पांच खाद्य सुरक्षा अधिकारी (फूड सेफ्टी ऑफिसर) के पदों के सृजन को भी मंजूरी दी।
आधिकारिक बयान के अनुसार, इन पदों के सृजन का उद्देश्य खाद्य कानूनों को लागू करने वाली व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी को दूर करना और खाद्य सुरक्षा नियमों की निगरानी एवं अनुपालन सुनिश्चित करने की क्षमता बढ़ाना है।
अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति से खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन की निगरानी करने और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे अरुणाचल प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा से संबंधित कानूनों एवं नियमों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
कैबिनेट के इन फैसलों का उद्देश्य राज्य में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने, संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं एवं खाद्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना है।
--आईएएनएस
डीएससी
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दिल्ली ईवी नीति 2026 को मिला जोरदार रिस्पॉन्स: 3 महीने में 7,700 से अधिक आवेदन; 7.91 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार की ईवी पॉलिसी 2026 को लॉन्च के बाद से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। 1 जुलाई 2026 से लागू इस नीति के तहत 8 अक्टूबर तक 7,782 प्रोत्साहन (इंसेंटिव) आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि 2,731 लाभार्थियों को 7.91 करोड़ रुपए की सब्सिडी वितरित की जा चुकी है। यह आंकड़े दिखाते हैं कि राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। रविवार को एक बयान में यह जानकारी सामने आई है।
सरकार का कहना है कि यह नीति वायु प्रदूषण कम करने, स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने और दिल्ली को हरित एवं टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
बयान के अनुसार, दिल्ली ईवी नीति के तहत प्राप्त कुल आवेदनों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रही है, जिसमें अब तक 7,706 आवेदन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स से जुड़े मिले।
आंकड़ों के अनुसार, 2,707 लाभार्थियों को 7.61 करोड़ रुपए की खरीद प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है। इसके अलावा, पुराने वाहनों को स्क्रैप कर नए ईवी खरीदने वालों को 29.50 लाख रुपए की स्क्रैपिंग इंसेंटिव राशि दी गई है, जिसका लाभ 79 लोगों ने लिया।
नीति के तहत विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी दी जा रही है। पहले वर्ष में 2.25 लाख रुपए तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर बैटरी क्षमता के आधार पर अधिकतम 30,000 रुपए तक की सब्सिडी उपलब्ध है।
इसी तरह इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर, माल ढुलाई वाले इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य श्रेणियों के लिए भी अलग-अलग प्रोत्साहन राशि निर्धारित की गई है। सरकार का लक्ष्य शुरुआती वर्षों में अधिक से अधिक लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित करना है।
दिल्ली ईवी नीति के तहत पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने के लिए स्क्रैपिंग इंसेंटिव की भी व्यवस्था की गई है।
यदि कोई व्यक्ति अधिकृत स्क्रैपिंग सुविधा में पुराना दिल्ली-पंजीकृत वाहन जमा कर छह महीने के भीतर नया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है, तो उसे अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
उदाहरण के तौर पर, पुराने बीएस-IV या उससे नीचे के दोपहिया वाहन को स्क्रैप कर नया इलेक्ट्रिक दोपहिया खरीदने पर 10,000 रुपए। वहीं, पुराने कार को स्क्रैप कर 30 लाख रुपए तक की कीमत वाली नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने पर 1 लाख रुपए तक का प्रोत्साहन, जबकि पुराने माल वाहक वाहन को स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक गुड्स वाहन खरीदने पर 50,000 रुपए तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
बयान में कहा गया है कि नीति की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक योग्य इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में 100 प्रतिशत छूट है।
30 लाख रुपए तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों को 31 मार्च 2030 तक इस लाभ का फायदा मिलेगा, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की कुल लागत में उल्लेखनीय कमी आती है।
इसके साथ ही, सरकार ने लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किया है। नीति के तहत दिल्ली में खरीदे और पंजीकृत होने वाले पहले 1,000 एन2 श्रेणी के निजी इलेक्ट्रिक ट्रकों को नो-एंट्री समय प्रतिबंध से 10 वर्षों तक छूट दी जाएगी। इससे दिल्ली में इलेक्ट्रिक मालवाहक वाहनों के उपयोग को गति मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, प्रदूषण घटेगा और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था विकसित होगी। लगातार बढ़ते आवेदन इस बात का संकेत हैं कि लोग इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने के लिए तैयार हैं।
--आईएएनएस
डीबीपी
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