सऊदी अरब ने Riyadh airport को बंद रखने की अवधि बढ़ाई, हूती मिसाइल हमले में हुई थी 12 की मौत
हूती विद्रोहियों द्वारा पूरे सऊदी अरब में हवाई हमले करने की धमकी दिए जाने के बीच देश ने रविवार को अपने मुख्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बंद रखने की अवधि बढ़ा दी। इससे एक दिन पहले हुए मिसाइल हमले में 12 लोगों की मौत हो गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हुए थे। शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर हमला यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच जारी युद्ध में वृद्धि का संकेत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल हो या नहीं। ऐसा होने पर हूती विद्रोही एक महत्वपूर्ण जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही रोक सकते हैं तथा फारस की खाड़ी से तेल की आपूर्ति को और सीमित कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने रविवार को हमले की निंदा की।
इसी बीच, हूती विद्रोहियों ने बताया कि यमन की राजधानी सना पर दो हवाई हमले हुए और इसके लिए सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया। सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई और न ही किसी के हताहत होने की खबर मिली। हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के हमलों में 91 यमनी नागरिक मारे गए और 168 घायल हुए।
मंत्रालय ने कहा कि मारे गए लोगों में 60 प्रतिशत महिलाएं और बच्चे थे। फ्लाइटरडार24 के अनुसार, सऊदी अधिकारियों ने शनिवार को बंद किए गए हवाई अड्डे को बंद रखने की अवधि रविवार रात नौ बजे तक बढ़ा दी। इस बीच, हूती विद्रोहियों ने कहा कि सऊदी अरब के हवाई अड्डे उनके निशाने पर हैं।
समूह के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने कहा सभी ‘‘हमारी चेतावनियों को गंभीरता से लें।’’ सऊदी हवाई अड्डे पर हालिया हमले की इराक, लेबनान और सीरिया सहित कई अरब देशों ने निंदा की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी हमले की निंदा की। वॉन डेर लेयेन ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘ईरान के प्रतिनिधियों के हमले क्षेत्र को हिंसा के दुष्चक्र में धकेल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ये हमले वैश्विक परिवहन और ऊर्जा के महत्वपूर्ण केंद्रों को अस्थिर कर रहे हैं।
नाम गुप्त रखने की शर्त पर एक क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि हमला हवाई अड्डे के उस परिसर में हुआ, जहां घरेलू उड़ानों के लिए टर्मिनल तीन और चार स्थित हैं। सऊदी अरब के बयान के अनुसार, मृतकों में सऊदी अरब के चार नागरिक, बांग्लादेश के दो नागरिक और फलस्तीन, अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया तथा सूडान का एक-एक नागरिक शामिल है। बयान में कहा गया कि कई अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में हमले में एक अमेरिकी नागरिक की मौत की पुष्टि की और इसकी निंदा की। मिस्र के सरकारी समाचार चैनल अल-काहिरा न्यूज टेलीविजन के अनुसार, मिस्र की मृतक महिला 28 वर्षीय अजा रमजी थी। वह सऊदी विमानन कंपनी फ्लाईबास में विमान परिचारिका के रूप में काम करती थी।
इस हमले से सऊदी अरब पर अमेरिका सहित अपने सहयोगियों से सैन्य मदद मांगने का दबाव बढ़ने की आशंका है। हमले के कुछ समय बाद ट्रंप ने कहा कि वह इस बात का आकलन कर रहे हैं कि अमेरिका को हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब के हमलों में शामिल होना चाहिए या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘हम ऐसा कर सकते हैं।
हम इस पर विचार करेंगे। हमें हालिया हमले के बारे में अभी पता चला है। इसलिए हम फैसला करेंगे।
हम बहुत तेजी से कार्रवाई करते हैं।’’ ट्रंप ने शनिवार को बाद में कहा कि वह सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से बात करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका के संभावित रूप से संघर्ष में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘देखते हैं।’’ हूती विद्रोहियों ने इससे पहले सप्ताह में किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले करने का दावा किया था। उस हमले में एक पायलट सहित सऊदी अरब के तीन नागरिक मारे गए थे।
हवाई अड्डे पर कोई सैन्य प्रतिष्ठान नहीं है। सऊदी अरब के अन्य हवाई अड्डों, सैन्य इकाइयों और तेल संबंधी बुनियादी ढांचे पर हमलों सहित हमलों में तेजी उस सप्ताह आई, जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। हाल तक हूती विद्रोही ईरान के साथ युद्ध से काफी हद तक दूर रहे थे।
अब तेहरान के लिए ये विद्रोही अमेरिका के एक अहम सहयोगी पर दबाव बनाने का जरिया बन गए हैं। हूती विद्रोहियों के हमलों और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर उनके नियंत्रण से क्षेत्र से तेल की आपूर्ति में और बाधा आने का खतरा है। सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच वर्ष 2015 में संघर्ष शुरू हुआ था, जब सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में वहां के गृहयुद्ध में हस्तक्षेप किया था।
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