मानवाधिकार कार्यकर्ता को इलाज नहीं मिलने पर यूएन ने चीन की कड़ी आलोचना की
बीजिंग, 8 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने चीन सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ता यांग ली को बार-बार चिकित्सकीय उपचार से वंचित किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने चीनी अधिकारियों से यांग ली और उनके परिवार के खिलाफ उत्पीड़न व डराने-धमकाने की कार्रवाई रोकने और उन्हें तत्काल इलाज की अनुमति देने की अपील की है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने अपने बयान में कहा, “यांग ली की गिरफ्तारी और उन पर आरोप तय किया जाना इस बात का संकेत है कि अधिकारी उन्हें अपनी वैध शिकायतों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांगने से रोकना चाहते हैं। यह उत्पीड़न और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि इसके साथ उन्हें चिकित्सा उपचार से भी वंचित किया जा रहा है।” यह जानकारी जुरिस्ट न्यूज की रिपोर्ट में दी गई है।
यांग ली चीन के जिंतान क्षेत्र की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं, जो लंबे समय से आवास और भूमि अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम कर रही हैं। उन्होंने अवैध भूमि अधिग्रहण, जबरन बेदखली और मकानों को गिराने जैसे मामलों पर खुलकर आवाज उठाई है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय लोगों के विस्थापन और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा न मिलने जैसे मुद्दों को भी उजागर किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 18 जनवरी को जब यांग ली इलाज के लिए बीजिंग जा रही थीं, तभी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। घर से निकलते ही यांग ली और उनके पिता को सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने जबरन जिंतान लॉ एनफोर्समेंट केस मैनेजमेंट सेंटर ले जाया। यह गिरफ्तारी उनकी पिछली हिरासत से रिहा होने के करीब पांच दिन बाद हुई। इससे पहले उन्हें 11 से 13 जनवरी तक हिरासत में रखा गया था।
बताया गया है कि वर्ष 2025 में हिरासत में लिए जाने के बाद से यांग ली को अब तक किसी भी प्रकार का चिकित्सा उपचार नहीं मिल पाया है। अगस्त 2024 में उन्हें एक गंभीर बीमारी का पता चला था, जिसके लिए विशेष इलाज जरूरी बताया गया था। इसके बावजूद हिरासत केंद्र के अधिकारियों ने उन्हें अस्पताल ले जाने की अनुमति नहीं दी। 30 दिसंबर को रिहाई के बाद भी उनकी आवाजाही पर पाबंदी लगी रही और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जाया गया।
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन फ्रंट लाइन डिफेंडर्स (एफएलडी) ने भी इस मामले पर चिंता जताई है। संगठन ने कहा कि यांग ली को उनके मानवाधिकार कार्यों के कारण निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें चिकित्सा सुविधा से वंचित करना भूमि अधिकारों से जुड़े कथित दुरुपयोगों को उजागर करने के बदले “प्रतिशोध की एक सुनियोजित नीति” का हिस्सा प्रतीत होता है।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
एनएसए अजीत डोवाल ने कनाडा में हाई लेवल वार्ता की, कई मुद्दों पर सहमति बनी
ओटावा, 8 फरवरी (आईएएनएस)। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने कनाडा के साथ द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए इस सप्ताह ओटावा में उच्च स्तरीय वार्ता की। यह वार्ता दोनों देशों के संबंधों को फिर से मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है।
शनिवार को डोवाल ने कनाडा के प्रधानमंत्री की उप सचिव और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं खुफिया सलाहकार नताली जी. ड्रौइन से मुलाकात की। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बैठक दोनों देशों के बीच नियमित द्विपक्षीय सुरक्षा वार्ता का हिस्सा थी।
दोनों पक्षों ने अपने राष्ट्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए चल रही पहलों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन मामलों पर भविष्य के सहयोग को निर्देशित करने के लिए एक साझा कार्य योजना पर सहमति व्यक्त की। इस कदम से साझा प्राथमिकताओं पर अधिक व्यावहारिक संयुक्त प्रयासों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
चर्चाओं का एक अहम निर्णय दोनों देशों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन संपर्क अधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्धता थी। इस कदम का उद्देश्य संचार चैनलों को बेहतर बनाना और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी, विशेष रूप से फेंटानिल प्रीकर्सर और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क की गतिविधियों सहित साझा खतरों पर जानकारी का तेजी से आदान-प्रदान करना है।
दोनों अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा में सहयोग को औपचारिक रूप देने का भी संकल्प लिया, जिसमें नीतिगत समन्वय और साइबर खतरों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है। उन्होंने प्रत्येक देश के घरेलू कानूनों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का सम्मान करते हुए, धोखाधड़ी की रोकथाम और आव्रजन प्रवर्तन से संबंधित संयुक्त कार्यों पर बातचीत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
इस यात्रा से संबंधों में अतीत में आए तनाव के बावजूद व्यावहारिक सुरक्षा संबंधों को और मजबूत करने में दोनों देशों की आपसी रुचि स्पष्ट हुई।
दो दिवसीय यात्रा के अंतर्गत, डोवाल ने शुक्रवार (6 फरवरी) को कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री से भी मुलाकात की। ये मुलाकातें भारत-कनाडा सुरक्षा संबंधों में सकारात्मक गति का संकेत देती हैं, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध जैसी सीमा पार चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
दोनों पक्षों के अधिकारियों ने इन मुलाकातों को दोनों देशों में सार्वजनिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दों पर विश्वास बढ़ाने और प्रभावी सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
--आईएएनएस
एमएस/
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