Supreme Court ने दिल्ली प्रदर्शन पर केंद्र को भेजा नोटिस, अवैध हिरासत पर रोक
उच्चतम न्यायालय ने रविवार को एक विशेष सुनवाई के दौरान दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के विरोध-प्रदर्शन के कारण मेट्रो और ट्रेन सेवाओं से जुड़े अदालत के आदेश के कथित उल्लंघन पर अवमानना की कार्रवाई के अनुरोध वाली याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी करते हुए कई निर्देश दिए। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए: * शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने वाले लोगों को कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अवैध रूप से हिरासत में नहीं लिया जाए। * दिल्ली मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रूप से बहाल की जाएं।
प्रतिबंध केवल तभी लगाए जा सकते हैं, जब वे संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित ठहराए जा सकें। * कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवाएं बहाल की जाएं। * यातायात नियमों के अधीन लोगों की आवाजाही निर्बाध रहे और बैरिकेड लगाने की आवश्यकता की समीक्षा की जाए।
* वकीलों, पत्रकारों और अन्य लोगों को अपने पेशेवर कर्तव्यों के निर्वहन में बाधा नहीं पहुंचाई जाए। * कानून के अनुसार शांतिपूर्ण सभाओं की अनुमति दी जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों के बाहर जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है। * बड़े पैमाने पर हिरासत में लिए जाने के आरोपों से संबंधित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं और अन्य संबंधित मामलों पर मुख्य मामलों के साथ 13 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
* प्रदर्शनकारियों को याद दिलाया गया कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए और दूसरों को उकसाने वाला नहीं होना चाहिए। * उच्चतम न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें लागू कराने के लिए बाध्य है।
प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिए गए लोगों को लेकर Supreme Court के निर्देश, वकीलों ने बताई पूरी बात
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को सुनवाई की। यह प्रदर्शन शनिवार को हुआ था। सुनवाई के बाद वकीलों ने बताया कि अदालत ने लोगों की आवाजाही, इंटरनेट सेवाओं और मेट्रो व ट्रेनों के संचालन को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के आदेश पर आभार जताया। वहीं, वकील कैलाश मोरे और गौरव यादव ने बताया कि सुनवाई के बाद मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चल रहे हैं और इंटरनेट सेवाएं भी बहाल कर दी गई हैं।
कपिल सिब्बल बोले- न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा
सुनवाई के बाद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट के बहुत आभारी हैं। अदालत ने ऐसा आदेश दिया है, जिससे देश की न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा फिर मजबूत होता है।"
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कैलाश मोरे ने बताया, मेट्रो और ट्रेनों का संचालन सामान्य
वकील कैलाश मोरे ने बताया कि इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गई हैं और रविवार को सभी मेट्रो स्टेशन सामान्य रूप से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने साफ किया कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना लोगों का मौलिक अधिकार है। लोग बिना हथियार और कानून का पालन करते हुए प्रदर्शन कर सकते हैं।
मोरे के मुताबिक, दिल्ली के बाहर से आने वाली जिन ट्रेनों को पहले नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर रुकने से रोका गया था, उनके सामान्य संचालन के निर्देश भी दिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में लोगों के आने-जाने पर लगी रोक हटा दी गई है। अब नागरिक शहर में स्वतंत्र रूप से आ-जा सकते हैं।
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गैरकानूनी हिरासत में रखे लोगों को छोड़ने के निर्देश
कैलाश मोरे ने बताया कि अदालत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि शनिवार को हुई गिरफ्तारियों और हिरासत के बाद अगर किसी व्यक्ति को गैरकानूनी तरीके से रोका गया है, तो उसे छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरव यादव बोले- बैरिकेड हटाने और इंटरनेट चालू रखने के निर्देश
वकील गौरव यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे, मेट्रो और सड़क यातायात को सामान्य करने की बात कही है। उन्होंने कहा, "सभी बैरिकेड हटाने और इंटरनेट सेवाएं बंद नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं, जब तक ऐसा करना बिल्कुल जरूरी न हो। हम अदालत का धन्यवाद करते हैं।"
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